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संसाधनों के उचित प्रबंधन की जरूरत : अलका
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल का बुधवार को 57वां स्थापना दिवस मनाया गया।
इसमें बतौर मुख्य अतिथि पहुंची डेयर की अतिरिक्त सचिव एवं आईसीएआर नई दिल्ली की वित्तीय सलाहकार अल्का नांगिया अरोड़ा ने कहा कि हमें प्राकृतिक संसाधनों के उचित प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता है, देश के वैज्ञानिकों को इस पर अपने शोध और तकनीक विकास को फोकस करना चाहिए।
स्थापना दिवस समारोह में पहुंचे अतिथियों, वैज्ञानिकों और किसानों को सीएसएसआरआई के निदेशक डॉ. आरके यादव ने स्वागत किया। मुख्य अतिथि अलका नांगिया ने किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड और समय पर मृदा परीक्षण के महत्व को पारिभाषित करते हुए इसे आवश्यक बताया।
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र और नीति अनुसंधान संस्थान (एनआईएपी) के निदेशक प्रो. प्रताप सिंह बिर्थल ने प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों और सरकारी नीतियों के प्रभाव पर चर्चा कर सीएसएसआरआई की लवण प्रभावित भूमि सुधार तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
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संस्थान के पूर्व निदेशक एवं कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. गुरबचन सिंह ने संस्थान की 1969 में स्थापना से अब तक की यात्रा को याद किया। पूर्व निदेशक डॉ. डीके. शर्मा ने संस्थान की उपलब्धियों के महत्व को रामायण के एक दोहे के माध्यम से स्पष्ट किया। पूर्व निदेशक, डॉ. प्रबोधचंद्र शर्मा ने संस्थान की निरंतर प्रगति को स्वीकार करते हुए कहा कि संस्थान ने अब तक 2.2 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनः उपयोगी बनाया है।
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करनाल। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल का बुधवार को 57वां स्थापना दिवस मनाया गया।
इसमें बतौर मुख्य अतिथि पहुंची डेयर की अतिरिक्त सचिव एवं आईसीएआर नई दिल्ली की वित्तीय सलाहकार अल्का नांगिया अरोड़ा ने कहा कि हमें प्राकृतिक संसाधनों के उचित प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता है, देश के वैज्ञानिकों को इस पर अपने शोध और तकनीक विकास को फोकस करना चाहिए।
स्थापना दिवस समारोह में पहुंचे अतिथियों, वैज्ञानिकों और किसानों को सीएसएसआरआई के निदेशक डॉ. आरके यादव ने स्वागत किया। मुख्य अतिथि अलका नांगिया ने किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड और समय पर मृदा परीक्षण के महत्व को पारिभाषित करते हुए इसे आवश्यक बताया।
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विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र और नीति अनुसंधान संस्थान (एनआईएपी) के निदेशक प्रो. प्रताप सिंह बिर्थल ने प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों और सरकारी नीतियों के प्रभाव पर चर्चा कर सीएसएसआरआई की लवण प्रभावित भूमि सुधार तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
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संस्थान के पूर्व निदेशक एवं कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. गुरबचन सिंह ने संस्थान की 1969 में स्थापना से अब तक की यात्रा को याद किया। पूर्व निदेशक डॉ. डीके. शर्मा ने संस्थान की उपलब्धियों के महत्व को रामायण के एक दोहे के माध्यम से स्पष्ट किया। पूर्व निदेशक, डॉ. प्रबोधचंद्र शर्मा ने संस्थान की निरंतर प्रगति को स्वीकार करते हुए कहा कि संस्थान ने अब तक 2.2 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनः उपयोगी बनाया है।