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Karnal News: ग्रामीण बसों में खामियां ज्यादा और जांच कम, कैसे सुरक्षित रहेंगे बच्चे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Apr 2024 05:24 AM IST
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There are more defects in rural buses and less inspection, how will children remain safe?
- अब तक जांचीं 984 बसों में महज 167 ग्रामीण, बिना पासिंग चलने वाली 254 बसों में 182 देहात के स्कूलों की
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- अभिभावक उठा रहे सवाल, जांच करके बसें दुरुस्त करवा रहे या लापरवाह स्कूलों को नजरअंदाज कर रहे अधिकारी



गगन तलवार

करनाल। महेंद्रगढ़ में हुए स्कूल बस हादसे के बाद करनाल में हुई जांच में सामने आया है कि जिले में शहर से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की बसों में खामियां हैं। इसके बावजूद हैरान करने वाली स्थिति यह है कि इन बसों को दुरुस्त करने वाले अधिकारी ग्रामीण क्षेत्र की बसों की जांच ही कम कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

आरटीए कार्यालय की ओर से जारी जांच के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 984 स्कूल बसों की जांच आरटीए व सभी एसडीएम कार्यालय की ओर से की गई है। इनमें से करनाल एसडीएम और आरटीए टीम द्वारा 817 बसें जांचीं हैं। जबकि इंद्री, घरौंडा और असंध एसडीएम कार्यालय की ओर से महज 167 बसों की जांच की गई है।
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इधर, बिना पासिंग चलने वाली बसों की स्थिति पर नजर डालें तो करनाल के सेक्टर-32 स्थित पासिंग मैदान में अब तक 254 बसें पासिंग के लिए पहुंचीं हैं। इनमें से 182 बसें ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की हैं। फिर भी ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में जांच कम होने पर अभिभावक व सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। एडवोकेट संदीप राणा और अभिभावक संघ के अध्यक्ष दिनेश नरूला का कहना है कि अधिकारी जांच करके बसें दुरुस्त करवा रहे हैं या लापरवाह स्कूलों को नजरअंदाज करते हुए शहर में जांच करके केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। अधिकारियों को सजगता से कार्य करना चाहिए। स्थिति सामने है कि अब तक 254 बसें बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के ही विद्यार्थियों को सफर करा रही थी। खामियां ज्यादा होने के कारण 74 बसों की फाइल को भी जांच टीम ने रोक दिया है। ब्यूरो
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कंडम मानी जाने वाली 18 बसें हो चुकीं इंपाउंड

जिले में जांच के दौरान 18 ऐसी बसें भी इंपाउंड हो चुकी हैं, जिनकी वैधता अवधि खत्म हो चुकी है। करनाल आरटीए कार्यालय में ऐसी छह बसें इंपाउंड खड़ी हैं। आरटीए निरीक्षक सुरेंद्र सैनी का कहना है कि डीजल चलित बसों की 10 साल तक की वैधता होती है, पकड़ी गई बसों की समय अवधि पूरी हो चुकी है। कुछ स्कूल समयावधि पूरी होने से पहले बसों की एनओसी भी ले रहे हैं। क्योंकि एनसीआर क्षेत्र में ऐसी बसें चलाई नहीं जा सकती। जिले भर में 3.51 लाख रुपये जुर्माना लगाया जा चुका है।




स्कूल बसों की जांच में असंध और चालान में घरौंडा पीछे

अधिकारी

कुल जांच
चालान
जुर्माना राशि इंपाउंड

आरटीए करनाल
421
53
191500
06

एसडीएम करनाल
396
48
-
01

एसडीएम इंद्री

83
21
79500
05

एसडीएम घरौंडा
43
06
60300
06

एसडीएम असंध
41
17
20000
-

कुल

984
145
351300
18

(यह जानकारी आरटीए कार्यालय के अनुसार है)



----

अब तक 254 में से 182 बसें ग्रामीण, 74 की रुकी पासिंग

दिन
बसें
फेल

27 अप्रैल
16
01

26 अप्रैल
88
15

22 अप्रैल
18
04

21 अप्रैल
09
02

20 अप्रैल
14
03

19 अप्रैल
20
04

17 अप्रैल
10
03

15 अप्रैल
79
06

कुल
254
74

(यह आंकड़े सेक्टर-32 पासिंग मैदान में हुई जांच के अनुसार हैं)





शनिवार को पासिंग मैदान में 16 स्कूल बसें पासिंग के लिए पहुंचीa। इनमें से एक बस में कैमरे न होने के कारण इसे फेल कर दिया गया। इसके अलावा 22 बसों की जांच भी की गई। ये निसिंग क्षेत्र के स्कूलों की थी। जिले भर में जांच जारी है। लापरवाही पर बख्शा नहीं जाएगा। सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के मानकों पर खरा न उतरने वाली बसों के संचालकों पर सख्त कार्रवाई होगी।
- विजय देसवाल, डीटीओ
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