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फिर मिली नई तारीख, नहीं हुई आंगनबाड़ी वर्कर्स की वार्ता, अब 21 को होगी बात
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। आंगनबाड़ी वर्कर्स के साथ एक बार फिर सरकार की वार्ता नहीं हो पाई। फिर नई तारीख दी गई है। अब 21 फरवरी को बातचीत होगी। करनाल में महापड़ाव शुरू होने पर उपायुक्त ने सरकार से 18 फरवरी को बातचीत का समय दिलाया था। वीरवार देर रात को ही महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से अधिकारियों की व्यस्तता का हवाला देते हुए बातचीत के लिए मना कर दिया गया। इससे आंगनबाड़ी वर्कर्स में रोष है।
शुक्रवार को बातचीत न होने के विरोध में दोपहर में आंगनबाड़ी वर्कर्स ने लघु सचिवालय का घेराव किया। करीब दो घंटे तक मुख्य द्वार के सामने धरना देकर नारेबाजी की। इसके बाद एसडीएम गौरव कुमार ने आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने बातचीत करके 21 फरवरी को दोपहर तीन बजे बातचीत का समय तय कराया। रात को शहर में मशाल जुलूस निकालकर रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता आंगनबाड़ी फेडरेशन की राष्ट्रीय महासचिव एआर संधु ने की। े
आज धरने पर आएंगे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा
धरने पर शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहुंचेंगे। शुक्रवार को बार एसोसिएशन के प्रदेश सह सचिव राजविंद्र सिंह ने पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने आर्थिक मदद भी दी। वहीं सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान, संयुक्त कर्मचारी मंच महासचिव सूबे सिंह, यूटीयूसी उपाध्यक्ष ईश्वर राठी, सर्व कर्मचारी संघ के नेता कृष्ण शर्मा, तालमेल कमेटी की नेता देवेंद्री शर्मा, कृष्णा, आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य महासचिव सुनीता, जिला प्रधान सुदेश, बिजनेश राणा ने संबोधित किया।
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सरकार का महिला विरोधी चेहरा सामने आ रहा है। 75 दिन से आंगनबाड़ी वर्कर्स सड़कों पर हैं, किसी ने सुध नहीं ली।
- कमला
आशा वर्कर्स को अंबाला जाने से रोकने के लिए राज्य भर में तैयारी की गई। इसकी हम निंदा करते हैं। यह गलत है।
- उमा
सरकार मांगों का समाधान नहीं करना चाहती। तभी बार-बार वार्ता की तिथि आगे बढ़ाई जाती है। सरकार के पास सवालों का जवाब नहीं है। - ईश्वरी देवी
झूठ आंकड़े प्रस्तुत करके सरकार हमारे आंदोलन को कमजोर करना चाहती है लेकिन जनता सब जानती है। आंदोलन कोई ऐसे ही नहीं करता।
- दर्शनी
सरकार जनता को जवाब दे कि जो आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं, क्या यह उनकी सरकार द्वारा घोषित नहीं है, यदि हैं तो लागू क्यों नहीं कर रहे। - गीता रानी
सरकार महिलाओं के सब्र का इम्तिहान न ले। यदि परियोजना वर्कर्स न हों तो विभाग का काम करने वाला ढांचा कमजोर हो जाएगा। - शीलावंती
जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रही वर्कर्स को टर्मिनेट करना गलत है। अब मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं।
- कृष्णा
सरकार को हमारी मांग माननी ही होगी। चाहे आज बात करें या कल, हम तैयार हैं। हमें समाधान चाहिए।
- पूनम
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करनाल। आंगनबाड़ी वर्कर्स के साथ एक बार फिर सरकार की वार्ता नहीं हो पाई। फिर नई तारीख दी गई है। अब 21 फरवरी को बातचीत होगी। करनाल में महापड़ाव शुरू होने पर उपायुक्त ने सरकार से 18 फरवरी को बातचीत का समय दिलाया था। वीरवार देर रात को ही महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से अधिकारियों की व्यस्तता का हवाला देते हुए बातचीत के लिए मना कर दिया गया। इससे आंगनबाड़ी वर्कर्स में रोष है।
शुक्रवार को बातचीत न होने के विरोध में दोपहर में आंगनबाड़ी वर्कर्स ने लघु सचिवालय का घेराव किया। करीब दो घंटे तक मुख्य द्वार के सामने धरना देकर नारेबाजी की। इसके बाद एसडीएम गौरव कुमार ने आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने बातचीत करके 21 फरवरी को दोपहर तीन बजे बातचीत का समय तय कराया। रात को शहर में मशाल जुलूस निकालकर रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता आंगनबाड़ी फेडरेशन की राष्ट्रीय महासचिव एआर संधु ने की। े
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आज धरने पर आएंगे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा
धरने पर शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहुंचेंगे। शुक्रवार को बार एसोसिएशन के प्रदेश सह सचिव राजविंद्र सिंह ने पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने आर्थिक मदद भी दी। वहीं सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान, संयुक्त कर्मचारी मंच महासचिव सूबे सिंह, यूटीयूसी उपाध्यक्ष ईश्वर राठी, सर्व कर्मचारी संघ के नेता कृष्ण शर्मा, तालमेल कमेटी की नेता देवेंद्री शर्मा, कृष्णा, आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य महासचिव सुनीता, जिला प्रधान सुदेश, बिजनेश राणा ने संबोधित किया।
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सरकार का महिला विरोधी चेहरा सामने आ रहा है। 75 दिन से आंगनबाड़ी वर्कर्स सड़कों पर हैं, किसी ने सुध नहीं ली।
- कमला
आशा वर्कर्स को अंबाला जाने से रोकने के लिए राज्य भर में तैयारी की गई। इसकी हम निंदा करते हैं। यह गलत है।
- उमा
सरकार मांगों का समाधान नहीं करना चाहती। तभी बार-बार वार्ता की तिथि आगे बढ़ाई जाती है। सरकार के पास सवालों का जवाब नहीं है। - ईश्वरी देवी
झूठ आंकड़े प्रस्तुत करके सरकार हमारे आंदोलन को कमजोर करना चाहती है लेकिन जनता सब जानती है। आंदोलन कोई ऐसे ही नहीं करता।
- दर्शनी
सरकार जनता को जवाब दे कि जो आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं, क्या यह उनकी सरकार द्वारा घोषित नहीं है, यदि हैं तो लागू क्यों नहीं कर रहे। - गीता रानी
सरकार महिलाओं के सब्र का इम्तिहान न ले। यदि परियोजना वर्कर्स न हों तो विभाग का काम करने वाला ढांचा कमजोर हो जाएगा। - शीलावंती
जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रही वर्कर्स को टर्मिनेट करना गलत है। अब मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं।
- कृष्णा
सरकार को हमारी मांग माननी ही होगी। चाहे आज बात करें या कल, हम तैयार हैं। हमें समाधान चाहिए।
- पूनम