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जिन वाहनों के नंबरों पर कटे गेटपास, उनकी परिवहन विभाग कर रहा जांच
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। इंद्री अनाज मंडी में बाइक, स्कूटर और कार के नंबर पर गेट पास काटने के मामले में डीएफएससी और हैफेड विभाग के अधिकारी जांच में जुटे हैं। जिन वाहनों के नंबर से गेटपास कटे हैं उन नंबरों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए डीएफएससी ने उन नंबरों की सूची परिवहन विभाग को दे दी है। ताकि यह पता चल सके कि जिन नंबरों से गेटपास कटे हैं, उस नंबर पर कौन सा वाहन पंजीकृत है।
दूसरी ओर इंद्री अनाज मंडी के निरीक्षक को जारी नोटिस का जवाब शुक्रवार को निरीक्षक द्वारा दिया जाएगा। इधर हैफेड के डीएम अभी धान के कट्टों का उठान करने वाले ठेकेदार द्वारा दिए गए वाहनों के नंबरों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की पूरी जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
इंद्री मार्केट कमेटी के अधिकारी व कर्मचारी की हो सकती है मिलीभगत
मामले में इंद्री मार्केट कमेटी के अधिकारियों व कर्मचारियों की भी मिलीभगत की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि खरीद एजेंसी द्वारा काटे गए गेटपास के बाद मार्केट कमेटी का कर्मचारी उस गेटपास के आधार पर वाहन को चेक करता है और उसमें लदे धान के कट्टों की भी गिनती करता है और फिर मार्केट कमेटी द्वारा एक और गेटपास काटा जाता है। ऐसे में मार्केट कमेटी के कर्मचारियों द्वारा भी कोई जांच नहीं की गई।
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मामले को दबाने का प्रयास
बताया जा रहा है कि जिन कर्मचारियों की देखरेख में ये गेटपास काटे गए हैं वे इस मामले को लिपिकीय त्रुटि बताकर दबाने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि उन पर विभागीय कार्रवाई न हो। लेकिन बाइक, स्कूटर व कार के नंबरों पर कटने वाले गेटपास की संख्या 50 के आसपास हैं। जिससे साफ है कि यह जानबूझकर किया गया है।
असंध मंडी के निरीक्षक ने नहीं दिया जवाब
असंध अनाज मंडी में आढ़ती द्वारा फर्जी किसानों के नाम पर पोर्टल बनवाकर धान बेचने के मामले में डीएफएससी निरीक्षक योगेश ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। उन्हें दो दिन का कारण बताओ नोटिस दिया गया था। वहीं दो अन्य निरीक्षकों ने डीएफएससी को जवाब दे दिया है। डीएफएससी का कहना है कि अभी मामले की जांच चल रही है। दूसरी ओर आढ़ती ने जिन फर्जी किसानों के नाम पर पोर्टल बनाया था, उनके खाते में धान की पेमेंट भी विभाग ने डाल दी है। ऐसे में सरकार और विभाग दोनों को ही चपत लग रही है।
जिन वाहनों के नंबरों से गेटपास कटे हैं उन्हें परिवहन विभाग में भेजा गया है ताकि उनका सत्यापन हो सके कि वह किस वाहन के नंबर हैं। लिपिकीय त्रुटि एक-दो नंबर में होती है लेकिन बाइक, स्कूटर के नंबर से गेटपास काट देना लिपिकीय त्रुटि नहीं है। इस मामले की गहनता से जांच की जा रही है और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- अशोक कुमार, डीएफएससी, करनाल।
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करनाल। इंद्री अनाज मंडी में बाइक, स्कूटर और कार के नंबर पर गेट पास काटने के मामले में डीएफएससी और हैफेड विभाग के अधिकारी जांच में जुटे हैं। जिन वाहनों के नंबर से गेटपास कटे हैं उन नंबरों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए डीएफएससी ने उन नंबरों की सूची परिवहन विभाग को दे दी है। ताकि यह पता चल सके कि जिन नंबरों से गेटपास कटे हैं, उस नंबर पर कौन सा वाहन पंजीकृत है।
दूसरी ओर इंद्री अनाज मंडी के निरीक्षक को जारी नोटिस का जवाब शुक्रवार को निरीक्षक द्वारा दिया जाएगा। इधर हैफेड के डीएम अभी धान के कट्टों का उठान करने वाले ठेकेदार द्वारा दिए गए वाहनों के नंबरों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की पूरी जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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इंद्री मार्केट कमेटी के अधिकारी व कर्मचारी की हो सकती है मिलीभगत
मामले में इंद्री मार्केट कमेटी के अधिकारियों व कर्मचारियों की भी मिलीभगत की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि खरीद एजेंसी द्वारा काटे गए गेटपास के बाद मार्केट कमेटी का कर्मचारी उस गेटपास के आधार पर वाहन को चेक करता है और उसमें लदे धान के कट्टों की भी गिनती करता है और फिर मार्केट कमेटी द्वारा एक और गेटपास काटा जाता है। ऐसे में मार्केट कमेटी के कर्मचारियों द्वारा भी कोई जांच नहीं की गई।
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मामले को दबाने का प्रयास
बताया जा रहा है कि जिन कर्मचारियों की देखरेख में ये गेटपास काटे गए हैं वे इस मामले को लिपिकीय त्रुटि बताकर दबाने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि उन पर विभागीय कार्रवाई न हो। लेकिन बाइक, स्कूटर व कार के नंबरों पर कटने वाले गेटपास की संख्या 50 के आसपास हैं। जिससे साफ है कि यह जानबूझकर किया गया है।
असंध मंडी के निरीक्षक ने नहीं दिया जवाब
असंध अनाज मंडी में आढ़ती द्वारा फर्जी किसानों के नाम पर पोर्टल बनवाकर धान बेचने के मामले में डीएफएससी निरीक्षक योगेश ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। उन्हें दो दिन का कारण बताओ नोटिस दिया गया था। वहीं दो अन्य निरीक्षकों ने डीएफएससी को जवाब दे दिया है। डीएफएससी का कहना है कि अभी मामले की जांच चल रही है। दूसरी ओर आढ़ती ने जिन फर्जी किसानों के नाम पर पोर्टल बनाया था, उनके खाते में धान की पेमेंट भी विभाग ने डाल दी है। ऐसे में सरकार और विभाग दोनों को ही चपत लग रही है।
जिन वाहनों के नंबरों से गेटपास कटे हैं उन्हें परिवहन विभाग में भेजा गया है ताकि उनका सत्यापन हो सके कि वह किस वाहन के नंबर हैं। लिपिकीय त्रुटि एक-दो नंबर में होती है लेकिन बाइक, स्कूटर के नंबर से गेटपास काट देना लिपिकीय त्रुटि नहीं है। इस मामले की गहनता से जांच की जा रही है और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- अशोक कुमार, डीएफएससी, करनाल।