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प्रशासन ने चारदीवारी पर ही दिलाया किरायेदार को कब्जा
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सेक्टर-14 स्थित मकान नंबर-325 को लेकर हाईकोर्ट के आदेशों के बाद जिला प्रशासन ने किरायेदार को मकान नहीं बल्कि प्लाट पर कब्जा दिला दिया। एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक के नेतृत्व में भारी पुलिस बल के बीच चारदीवारी के साथ लगते गेट पर मकान मालिक का ताला हटाकर किरायेदार हरजिंद्र कौर का ताला लगवाया गया। इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों में तीखी नोक-झोंक भी हुई। उधर, मकान मालिक का कहना है कि वे इस मामले को लेकर अब उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, जबकि किरायेदार के वकील का कहना है कि हम प्रशासन के खिलाफ अवमानना का केस दायर करेंगे।
सेक्टर-14 में बिमला देवी और बिशंबरदास का 325 नंबर मकान है। मालिक का कहना है कि उन्होंने ये मकान किराये पर दे रखा था। दोनों में विवाद होने के कारण अनबन रहने लगी थी। इस मामले में बुजुर्ग दंपति को न्याय दिलाने के लिए कई बार धरने प्रदर्शन भी हुए थे और तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी। शहर की समाजसेवी संस्थाओं ने बुजुर्ग दंपति को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया था। मकान मालिक ने डीसी निशांत कुमार यादव के पास प्रार्थना पत्र देकर मकान खाली करने की गुहार लगायी थी। इसके बाद डीसी के आदेश पर जिला प्रशासन ने बुजुर्ग दंपति को मकान पर कब्जा दिलाया। डीसी के इस फैसले के खिलाफ हरजिंद्र कौर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंची थी और न्याय की गुहार लगाई थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि लाकडाउन के दौरान उससे मकान जबरन खाली करा लिया गया, जबकि प्रशासन द्वारा खुद ऐसा करने पर प्रतिबंध लगाया गया था। सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने डीसी को चेतावनी देते हुए सेक्टर-14 के मकान नंबर-325 की किराएदार हरजिंद्र कौर को वापस मकान में बैठाने के आदेश दिए हैं। इन्हीं आदेशों को अमलीजामा पहनाने के लिए गुरुवार को एसडीएम नरेंद्र पाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान मकान मालिक और उनके वकील, किरायदार हरजिंद्र कौर और उनके वकील मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से यथा स्थिति में किरायेदार को कब्जा दिलाया गया। इसके लिए प्रशासन ने चारदीवारी के साथ लगते गेट पर मकान मालिक के ताले को हटवा दिया और किरायेदार का ताला लगवा दिया। बता दें कि जिस मकान पर कब्जा दिलाने के लिए प्रशासन पहुंचा था, वहां पर मकान नहीं होकर केवल दीवारें हैं, छत नहीं। मकान मालिक का तर्क है कि किरायेदार की तरफ से देखभाल नहीं करने और मकान पुराना होने के कारण छत गिर गई है।
वकीलों में हुई तीखी नोक-झोंक
किरायदार हरजिंद्र कौर के वकील विनय बंसल और मकान मालिक के वकील राजीव शर्मा के बीच कहासुनी भी हुई। इस दौरान बीच में एसडीएम और ड्यूटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह ने दोनों को समझाने की कोशिश की। बाद में किरायेदार से यथास्थिति कब्जे को लेकर दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी कराए गए। किरायदार के वकील विनय बंसल ने कहा कि वे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना में जिला प्रशासन के खिलाफ केस भी दायर करेंगे। बंसल ने आरोप लगाया कि प्रशासन की मिलीभगत से ये मकान तोड़ा गया है, ताकि किरायदार को कब्जा न मिल सके। अभी हमें मकान पर नहीं बल्कि यथास्थिति के तहत कब्जा मिला है। वहीं, मकान मालिक के वकील ने इसे निराधार बताया और कहा कि मकान अपने आप गिरा है।
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हाईकोर्ट का आदेश मकान पर है, ना कि प्लाट पर : मालिक
मकान मालिक बिशंबर दास और बिमला देवी का कहना है कि हम कानून पर विश्वास रखते हैं, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा गलत तरीके से प्लाट पर किरायेदार को कब्जा दिलाया गया है। जबकि ये मामला मकान पर कब्जा दिलाने का है। वे आगामी लड़ाई के लिए कानून के जानकारों से सलाह ले रहे हैं और अपने मकान को बचाने के लिए वे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
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सेक्टर-14 में बिमला देवी और बिशंबरदास का 325 नंबर मकान है। मालिक का कहना है कि उन्होंने ये मकान किराये पर दे रखा था। दोनों में विवाद होने के कारण अनबन रहने लगी थी। इस मामले में बुजुर्ग दंपति को न्याय दिलाने के लिए कई बार धरने प्रदर्शन भी हुए थे और तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी। शहर की समाजसेवी संस्थाओं ने बुजुर्ग दंपति को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया था। मकान मालिक ने डीसी निशांत कुमार यादव के पास प्रार्थना पत्र देकर मकान खाली करने की गुहार लगायी थी। इसके बाद डीसी के आदेश पर जिला प्रशासन ने बुजुर्ग दंपति को मकान पर कब्जा दिलाया। डीसी के इस फैसले के खिलाफ हरजिंद्र कौर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंची थी और न्याय की गुहार लगाई थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि लाकडाउन के दौरान उससे मकान जबरन खाली करा लिया गया, जबकि प्रशासन द्वारा खुद ऐसा करने पर प्रतिबंध लगाया गया था। सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने डीसी को चेतावनी देते हुए सेक्टर-14 के मकान नंबर-325 की किराएदार हरजिंद्र कौर को वापस मकान में बैठाने के आदेश दिए हैं। इन्हीं आदेशों को अमलीजामा पहनाने के लिए गुरुवार को एसडीएम नरेंद्र पाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान मकान मालिक और उनके वकील, किरायदार हरजिंद्र कौर और उनके वकील मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से यथा स्थिति में किरायेदार को कब्जा दिलाया गया। इसके लिए प्रशासन ने चारदीवारी के साथ लगते गेट पर मकान मालिक के ताले को हटवा दिया और किरायेदार का ताला लगवा दिया। बता दें कि जिस मकान पर कब्जा दिलाने के लिए प्रशासन पहुंचा था, वहां पर मकान नहीं होकर केवल दीवारें हैं, छत नहीं। मकान मालिक का तर्क है कि किरायेदार की तरफ से देखभाल नहीं करने और मकान पुराना होने के कारण छत गिर गई है।
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वकीलों में हुई तीखी नोक-झोंक
किरायदार हरजिंद्र कौर के वकील विनय बंसल और मकान मालिक के वकील राजीव शर्मा के बीच कहासुनी भी हुई। इस दौरान बीच में एसडीएम और ड्यूटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह ने दोनों को समझाने की कोशिश की। बाद में किरायेदार से यथास्थिति कब्जे को लेकर दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी कराए गए। किरायदार के वकील विनय बंसल ने कहा कि वे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना में जिला प्रशासन के खिलाफ केस भी दायर करेंगे। बंसल ने आरोप लगाया कि प्रशासन की मिलीभगत से ये मकान तोड़ा गया है, ताकि किरायदार को कब्जा न मिल सके। अभी हमें मकान पर नहीं बल्कि यथास्थिति के तहत कब्जा मिला है। वहीं, मकान मालिक के वकील ने इसे निराधार बताया और कहा कि मकान अपने आप गिरा है।
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हाईकोर्ट का आदेश मकान पर है, ना कि प्लाट पर : मालिक
मकान मालिक बिशंबर दास और बिमला देवी का कहना है कि हम कानून पर विश्वास रखते हैं, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा गलत तरीके से प्लाट पर किरायेदार को कब्जा दिलाया गया है। जबकि ये मामला मकान पर कब्जा दिलाने का है। वे आगामी लड़ाई के लिए कानून के जानकारों से सलाह ले रहे हैं और अपने मकान को बचाने के लिए वे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।