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कोर्स से अलग स्ट्रीम के विषय पढ़ने की व्यवस्था लागू नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 02:39 AM IST
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The system of studying subjects of a stream other than the course is not applicable
नरेंद्र शर्मा
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करनाल। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) प्रदेश के विश्वविद्यालयों मेें सीबीसीएस (च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) लागू करने की गाइडलाइन जारी कर चुका है लेकिन अब तक यह सुविधा विद्यार्थियों को नहीं मिल सकी है। इस प्रणाली के तहत विद्यार्थी अपने कोर्स से अलग स्ट्रीम के विषयों का चयन कर पढ़ाई कर सकता है। लेकिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय अब तक यह प्रणाली लागू नहीं कर पाया है। जिस कारण विद्यार्थी इसका लाभ लेने से वंचित हैं।
यह प्रणाली स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों के लिए लागू होनी हैं। इसके तहत विद्यार्थियों को परीक्षा में नंबर के बजाय क्रेडिट प्राप्त होंगे। इससे विद्यार्थी कला संकाय लेकर भी अपनी पसंद से विज्ञान, वाणिज्य, संगीता आदि से एक या दो विषयों का चयन कर सकता है। जानकारी के अनुसार एमडीयू रोहतक में यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है। जिले में दर्जन भर राजकीय व एडिड कॉलेज और लगभग 10 प्राइवेट कॉलेज हैं। संवाद
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जानिए, क्या है सीबीसीएस
सीबीसीएस यानी विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली के तहत विद्यार्थी अपने कोर्स से अलग किसी भी स्ट्रीम के एक या दो विषयों का चयन कर सकता है। वहीं विश्व के किसी भी विश्वविद्यालय में पढ़ाए जाने वाले विषय का चुनाव करने का भी विकल्प है। यानी देश के किसी भी शहर से विद्यार्थी विषय का चुनाव कर विदेश की यूनिवर्सिटी से भी पढ़ाई कर सकता है। विदेशों में यही प्रणाली लागू है।
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सेमेस्टर के हिसाब से होता है मूल्यांकन
इस व्यवस्था के अंतर्गत विद्यार्थी विज्ञान, कला, वाणिज्य के तीन साल व इंजीनियरिंग के चार साल के पाठ्यक्रम के बजाय सीबीसीएस पाठ्यक्रम के आधार पर आगे बढ़ता है। सभी सेमेस्टर में 15 से 18 सप्ताह का शैक्षणिक कार्य होता है, जो करीब 90 शिक्षण दिवस का होता है। वहीं, इसमें विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। परीक्षा में प्राप्त क्रेडिट प्वाइंट और उपस्थिति को गुणा कर सीजीपीए यानी कम्यूलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज मिलेगा।
क्रेडिट हस्तांतरण का भी है नियम
क्रेडिट हस्तांतरण नियम के तहत अगर किसी कारण से विद्यार्थी पढ़ाई का भार सहन नहीं कर पाता या बीमार हो जाता है। तो ऐसे में पाठ्यक्रमों को पढ़ने या कम क्रेडिट लेने का भी नियम बनाया गया है। इससे विद्यार्थी अगले सेमेस्टर में अपने क्रेडिट पूरे कर सकता है।

कॉलेजों के सामने होंगी ये चुनौतियां
यह प्रणाली लागू होने से कॉलेजों को कई चुनौतियों से पार पाना होगा। इससे स्टाफ की अधिक जरूरत पड़ेगी। वहीं, एक ही विषय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने से कमरों की भी दिक्कत होगी। दूसरी ओर, समय सारणी की समस्या के साथ-साथ आर्थिक समस्याओं से भी जूझना पड़ सकता है।
यूनिवर्सिटी से नहीं मिला कोई पत्र
अब तक विश्वविद्यालय की ओर से इस प्रणाली को लागू करने के लिए कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही आदेश प्राप्त होंगे उन्हें लागू किया जाएगा।
- डॉ राजेश रानी, प्राचार्या पंडित चिरंजी लाल शर्मा राजकीय कॉलेज
आदेश मिलेंगे तो कॉलेज तैयार
यूजीसी ने गाइडलाइन जारी की है लेकिन अब तक इस बारे में संबंधित विश्वविद्यालय से कोई सूचना नहीं मिली है। आदेश प्राप्त हुए तो इसके लिए कॉलेज तैयार है।
- डॉ रामपाल सैनी, प्राचार्य डीएवी पीजी कॉलेज
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