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उत्तराखंडी लोककला की बिखरी छटा, झांकियों ने मोहा मन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 02:42 AM IST
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The scattered shade of Uttarakhandi folk art, the floats captivated the mind
उत्तराखंड सभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अपनी प्रस्तति देते कलाकार। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। देवभूमि उत्तराखंड लोक कला की रविवार को करनाल में छटा बिखरी। मौका था उत्तराखंड राज्य के 21वें स्थापना दिवस का। लोकगायक शिवदत्त पंत व उनके साथियों ने उत्तराखंड की झलक पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर उत्तराखंड के ऐतिहासिक, पौराणिक, धार्मिक महत्व की भी झांकी प्रस्तुत की गई। उत्तराखंड की भूमि तेरी जय जयकारा, देवतो की तपो भूमि म्यर कुंमौ गढ़वाला गीत पर श्रोता झूम उठे।
उत्तराखंड सभा के तत्वावधान में नगर के डॉ. मंगलसेन ऑडिटोरियम में उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह में हरियाणा के विभिन्न जिलों से उत्तराखंड के लोगों ने सहभागिता की। मुख्य अतिथि घरौंडा विधायक हरविंद्र कल्याण व विशिष्ट अतिथि महापौर रेणू बाला गुप्ता, सीएम के प्रतिनिधि संजय बठला, भाजपा प्रवक्ता भारत भूषण जुयाल, व्यापारी नेता कृष्णलाल तनेजा व सीनियर डिप्टी मेयर राजेश अग्घी रहे। भोपाल सिंह आर्य की अध्यक्षता में संचालन राकेश शर्मा व गीता शर्मा ने संभाला। प्रधान पूरण चंद पांथरी ने अतिथियों व कलाकारों का स्वागत किया। दीपा पंत ने - घुघती घुराण लैगे, म्हारा मैत की गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद लगातार गढ़वाली लोक गीतों का सिलसिला चलता रहा।
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मौके पर भाजपा उत्तराखंड प्रकोष्ठ के संयोजक ओमप्रकाश भट्ट, इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर अजय खंतवाल, एडवोकेट मायाराम देवली, हीरो सिंह रावत, रमेश चंद बलोदी, धीरज सिंह रावत, सुरेंद्र सिंह, श्याम सिंह, भूपेश चंद शर्मा, हरीश शर्मा, राकेश शर्मा, शशांक ध्यानी विभिन्न जिलों से आए हुए उत्तराखंडी प्रवासी मौजूद रहे।
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उत्तराखंड की संस्कृति-कला को जीवंत रखने का प्रयास कर रहे: शिवदत्त
उत्तराखंड के लोकगायक शिवदत्त पंत भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ ओवान, दुबई आदि कई देशों में गढ़वाली व कुमांउनी लोक कला की छटा बिखेर चुके हैं। लोक गायक शिवदत्त पंत ने बताया कि उन्हें अपनी संस्कृति से प्यार है, आधुनिकता के इस दौर में भी वह अपनी संस्कृति को जीवंत रखने का प्रयास कर रहे हैं। अपने देश के साथ-साथ विदेशों में भी उत्तराखंड की लोक कला को प्यार मिल रहा है। उनकी टीम में सोलोगीत, ग्रुप नृत्य, घस्यारी नृत्य, गढ़वाली पांडव नृत्य के साथ कई ऐसी विधाएं हैं, जो अब प्राय: देखने को नहीं मिल रही हैं लेकिन वह अपने ग्रुप के साथ उनकी प्रस्तुतियां देते हैं और उन्हें जीवंत रखते हैं। करीब 150 कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें प्रशिक्षित किया है, देश के अलग अलग मंचों पर वह उत्तराखंड की विभिन्न कलाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं।

हरियाणा की राजनीति में भी उत्तराखंडियों का महत्व
उत्तराखंड सभा के प्रधान पूरणचंद पांथरी ने बताया कि करनाल जिले में उत्तराखंड के प्रवासियों के करीब 1200 परिवार हैं। यदि पूरे हरियाणा की बात करें तो विभिन्न जिलों में उत्तराखंड के परिवारों के करीब 13 लाख मतदाता हैं, आबादी करीब 25 लाख है। जो हरियाणा की सियासत में अपना योगदान देते हैं। वह उत्तराखंड के जरूर हैं, लेकिन हरियाणा को अपनी कर्मभूमि मानते हैं। इसका सभी बेहद सम्मान करते हैं। यदि उत्तराखंड का जयकारा लगाते हैं तो पहले जय हरियाणा कहते हैं।
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