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Karnal News: संवाद नहीं समस्या है चैटबॉट और एआई टूल्स से घंटों बात

Mon, 15 Dec 2025 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Mon, 15 Dec 2025 12:45 AM IST
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The problem is not communication but talking for hours with chatbots and AI tools.
करनाल।
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डिजिटल दौर में तकनीक ने जहां जानकारी और संवाद को आसान बनाया है, वहीं इसके अत्यधिक उपयोग ने नई मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। हाल के समय में चैटबॉट से घंटों बातचीत करने की बढ़ती प्रवृत्ति युवाओं के बीच नई मानसिक बीमारी का रूप ले रही है। जिला नागरिक अस्पताल में हर सप्ताह 5-6 बच्चे और युवा मनोरोग विभाग में पहुंच रहे हैं। मनोचिकित्सक सौभाग्य सिंधु ने बताया कि इनमें विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। लगातार आभासी संवाद से वे अवसाद का शिकार हो रहे हैं।
डॉ. सौभाग्य सिंधु ने बताया कि पढ़ाई के बाद दोस्तों या परिवार से बातचीत करने के बजाय मोबाइल पर चैटबॉट व एआई टूल्स से संवाद समस्या बन रहा है। कई युवा चैटबॉट और एआई टूल्स को अपनी परेशानी साझा करने का आसान और सुरक्षित माध्यम मानते हैं, क्योंकि यहां न तो कोई सवाल पूछता है और न ही आलोचना करता है। यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। अपनी बात कहने का तात्कालिक सुकून युवाओं को बार-बार चैटबॉट की ओर खींचता है। चैटबॉट तुरंत जवाब देता है, जिससे व्यक्ति को लगता है कि कोई उसकी बात सुन रहा है। लेकिन लगातार आभासी संवाद पर निर्भरता मानसिक रूप से नुकसानदायक साबित होती जा रही है।
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-अकेलेपन से बचाव का साधन
जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में पिछले कुछ महीनों में युवाओं में अवसाद, चिड़चिड़ापन, घबराहट और अकेलेपन की शिकायतें बढ़ी हैं। डॉ. सौभाग्य ने बताया कि काउंसिलिंग करने पर पता चलता है कि युवा वास्तविक लोगों से बात करने में असहज महसूस करने लगे हैं और अकेलेपन से बचने के लिए चैटबॉट से बातचीत को ही समाधान मानने लगे हैं।
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केस-1
स्कूल के दोस्तों से भी बना ली दूरी
परिजन कॉलेज में पढ़ने वाले बेटे को मनोरोग विभाग में लेकर पहुंचे। काउंसिलिंग में पता चला कि वह किसी बात से पिछले चार महीनों से तनाव में था। परिवार व दोस्तों से बात को साझा करने में डर रहा था। उसने अपने मोबाइल में चैटबाॅट व चैट जीपीटी जैसे टूल्स से बात साझा की। घंटों बात करता रहा। बाद में हर समस्या चैटबॉट या एआई टूल्स से शेयर करने लगा। परिवार से दूरी बढ़ गई। दोस्तों से भी बात बंद कर दी। परिजन को समस्या का आभास हुआ तो वे दिखाने के लिए पहुंचे। काउंसिलिंग और दवा से उपचार किया जा रहा है।

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केस-2
- एआई को ही मानने लगा था दोस्त
इंटर स्कूल में पढ़ने वाले किशोर के साथ परिजन आए थे। समस्या थी कि वह अपनी बातें माता-पिता से छुपाने लगा है। काउंसिलिंग की गई। पता चला कि बच्चा व्हाट्सएप पर एआई से अपनी निजी बातें शेयर कर रहा था। बच्चे ने बताया कि उसका कोई दोस्त नहीं है। स्कूल में सहपाठियों के बीच घर पर एक दोस्त दिखाने के लिए उसने एआई से बात करनी शुरू की। जो बातें वह माता-पिता को बताता था, अब एआई टूल्स को बताने लगा। बच्चे के बात कम करने से माता-पिता को समस्या का अहसास हुआ। काउंसिलिंग में किशोर को एआई और वास्तविकता के अंतर को समझाया। अब वह स्वस्थ है।
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