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बारिश बनी आफत, मंडियों में भीगा गेहूं
karnal
Updated Thu, 17 Apr 2014 11:56 PM IST
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बारिश से प्रशासन के अनाज मंडियों में किए इंतजामों की पोल खुल गई है।
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वीरवार को किसानों का करीब 22 हजार क्विंटल गेहूं मंडियों में ही भीग गया।
किसानों का कहना है कि बारिश होने पर जब मंडी में गेहूं को सुरक्षित रखने तक की जगह नहीं है तो ऐसी व्यवस्था किस काम की है। प्रशासन बात ही बातों में दम भर रहा है, फील्ड में व्यवस्था चरमराई हुई है। इससे किसानों का नुकसान हो रहा है।
जिले में तीन लाख 25 हजार मीट्रिक गेहूं की आवक हो चुकी है। सीजन जोरों पर चल रहा है। शेडों के नीचे बारदाना भरा है। अधिकारी इसको अनदेखा कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन किसान का हिमायती नहीं है, बल्कि उनके नुकसान में अहम भूमिका निभा रहा है।
किसानों का कहना है कि मंडियों की व्यवस्था भी किसानों के हाथ में दे देनी चाहिए। इस तरह मंडी में आकर गेहूं की दुर्गति तो नहीं होने देंगे। छह महीने की खून पसीने की मेहनत से पकाई गेहूं प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से भीग गया है।
शेड के नीचे बारदाना
करनाल अनाज मंडी में व्यवस्था देखकर ही प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। खराब मौसम में किसानों के गेहूं डालने के लिए बनाए शेडों के नीचे बारदाना रखा है। अधिकारी कहते हैं कि घंटे भर बाद बारदाना उठा लेंगे। यदि यह बारदाना समय रहते उठा लेते हैं तो हजारों क्विंटल किसानों की गेहूं नहीं भीगती। अमर उजाला ने इस संदर्भ में प्रशासन को पहले ही आगाह किया था, लेकिन प्रशासन की हठधर्मिता वीरवार को उजागर हो गई।
बारिश रुकते ही हाथों में उठाई झाड़ू
वीरवार को जैसी ही बारिश बंद हुई किसान ही झाड़ू लेकर ढेरी से पानी हटाने लगे। इससे किसानों को करीब पांच हजार क्विंटल गेहूं पानी के साथ बह गया। इसका किसानों को भारी नुकसान हुआ है। धूप निकलने के बाद किसानों ने ढेरियों को बिछा दिया, ताकि गेहूं दाना से हवा निकलकर वह नमीमुक्त हो सके।
दो दिन खराब मौसम की संभावना
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक खराब मौसम के चार दिन बताए हुए हैं। दो दिन बीत चुके हैं, जिनमें बूंदाबांदी सहित बारिश हुई है। अब दो दिन और शेष रह गए हैं। इस बारिश से निपटने के लिए किसान अपने जतन करने में लगे हैं, लेकिन प्रशासन गंभीर नहीं है। अनाज मंडियों में समस्याएं बरकरार हैं। सीवरेज सिस्टम ठप है, जिसके चलते पानी गेहूं की बोरियाें और ढेरियाें में घुस रहा है।
टॉर्च की रोशनी में करते हैं ढेरी की रखवाली
अनाज मंडियों में रात को समुचित लाइट की व्यवस्था नहीं है। बिजली कट लगते ही टॉर्च की रोशनी में तुलाई शुरू होती है। इस कम रोशनी में तुलाई के दौरान हेराफेरी होने के चांस अधिक रहते हैं। अपने गेहूं का पहरा देने वाले किसान घर से टॉर्च लेकर आते हैं। यदि तुलाई नहीं हुई तो उन्होंने अपनी ढेरी के आसपास टॉर्च से ही ध्यान रखना पड़ता है। यदि ऐसा न करें तो चोर इतने हैं कि सुबह तक पूरी ढेरी को ही साफ कर देंगे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरक्षा रामभरोसे है।
न के बराबर हुई खरीद
बारिश में गेहूं भीगने से खरीद एजेंसियाें ने नाममात्र ही गेहूं खरीदी है। जो किसान तिरपाल आदि से अच्छी ढक पाए उनकी ढेरी तुल गई। जिनकी ढेरी में थोड़ा सा भी पानी गया उनका गेहूं नहीं खरीदा। गेहूं सुखाने के बाद ही तुलाई का काम शुरू होगा। यदि मौसम साफ रहा तो शुक्रवार दोपहर बाद गेहूं की खरीद बढ़ सकती है।
कंबाइन भी रुकी
बारिश का असर गेहूं सीजन पर पड़ा है। गेहूं की हाथ से कटाई के साथ कंबाइन भी बंद हो गई हैं। मौसम साफ होने पर ही किसान गेहूं कटाई करवाएंगे। खड़ी गेहूं में इतना नुकसान नहीं है, जितना कटने के बाद है। नमीयुक्त गेहूं के दाना खराब होने लगता है।
कोट
शेड के एक हिस्से में बारदाना रखा है। गेहूं को ढकने के लिए तिरपाल थे। इससे गेहूं की ढेरी में थोड़ा बहुत ही पानी गया है।
महेंद्र गर्ग, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन करनाल।
किसानों का कहना है कि बारिश होने पर जब मंडी में गेहूं को सुरक्षित रखने तक की जगह नहीं है तो ऐसी व्यवस्था किस काम की है। प्रशासन बात ही बातों में दम भर रहा है, फील्ड में व्यवस्था चरमराई हुई है। इससे किसानों का नुकसान हो रहा है।
जिले में तीन लाख 25 हजार मीट्रिक गेहूं की आवक हो चुकी है। सीजन जोरों पर चल रहा है। शेडों के नीचे बारदाना भरा है। अधिकारी इसको अनदेखा कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन किसान का हिमायती नहीं है, बल्कि उनके नुकसान में अहम भूमिका निभा रहा है।
किसानों का कहना है कि मंडियों की व्यवस्था भी किसानों के हाथ में दे देनी चाहिए। इस तरह मंडी में आकर गेहूं की दुर्गति तो नहीं होने देंगे। छह महीने की खून पसीने की मेहनत से पकाई गेहूं प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से भीग गया है।
शेड के नीचे बारदाना
करनाल अनाज मंडी में व्यवस्था देखकर ही प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। खराब मौसम में किसानों के गेहूं डालने के लिए बनाए शेडों के नीचे बारदाना रखा है। अधिकारी कहते हैं कि घंटे भर बाद बारदाना उठा लेंगे। यदि यह बारदाना समय रहते उठा लेते हैं तो हजारों क्विंटल किसानों की गेहूं नहीं भीगती। अमर उजाला ने इस संदर्भ में प्रशासन को पहले ही आगाह किया था, लेकिन प्रशासन की हठधर्मिता वीरवार को उजागर हो गई।
बारिश रुकते ही हाथों में उठाई झाड़ू
वीरवार को जैसी ही बारिश बंद हुई किसान ही झाड़ू लेकर ढेरी से पानी हटाने लगे। इससे किसानों को करीब पांच हजार क्विंटल गेहूं पानी के साथ बह गया। इसका किसानों को भारी नुकसान हुआ है। धूप निकलने के बाद किसानों ने ढेरियों को बिछा दिया, ताकि गेहूं दाना से हवा निकलकर वह नमीमुक्त हो सके।
दो दिन खराब मौसम की संभावना
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक खराब मौसम के चार दिन बताए हुए हैं। दो दिन बीत चुके हैं, जिनमें बूंदाबांदी सहित बारिश हुई है। अब दो दिन और शेष रह गए हैं। इस बारिश से निपटने के लिए किसान अपने जतन करने में लगे हैं, लेकिन प्रशासन गंभीर नहीं है। अनाज मंडियों में समस्याएं बरकरार हैं। सीवरेज सिस्टम ठप है, जिसके चलते पानी गेहूं की बोरियाें और ढेरियाें में घुस रहा है।
टॉर्च की रोशनी में करते हैं ढेरी की रखवाली
अनाज मंडियों में रात को समुचित लाइट की व्यवस्था नहीं है। बिजली कट लगते ही टॉर्च की रोशनी में तुलाई शुरू होती है। इस कम रोशनी में तुलाई के दौरान हेराफेरी होने के चांस अधिक रहते हैं। अपने गेहूं का पहरा देने वाले किसान घर से टॉर्च लेकर आते हैं। यदि तुलाई नहीं हुई तो उन्होंने अपनी ढेरी के आसपास टॉर्च से ही ध्यान रखना पड़ता है। यदि ऐसा न करें तो चोर इतने हैं कि सुबह तक पूरी ढेरी को ही साफ कर देंगे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरक्षा रामभरोसे है।
न के बराबर हुई खरीद
बारिश में गेहूं भीगने से खरीद एजेंसियाें ने नाममात्र ही गेहूं खरीदी है। जो किसान तिरपाल आदि से अच्छी ढक पाए उनकी ढेरी तुल गई। जिनकी ढेरी में थोड़ा सा भी पानी गया उनका गेहूं नहीं खरीदा। गेहूं सुखाने के बाद ही तुलाई का काम शुरू होगा। यदि मौसम साफ रहा तो शुक्रवार दोपहर बाद गेहूं की खरीद बढ़ सकती है।
कंबाइन भी रुकी
बारिश का असर गेहूं सीजन पर पड़ा है। गेहूं की हाथ से कटाई के साथ कंबाइन भी बंद हो गई हैं। मौसम साफ होने पर ही किसान गेहूं कटाई करवाएंगे। खड़ी गेहूं में इतना नुकसान नहीं है, जितना कटने के बाद है। नमीयुक्त गेहूं के दाना खराब होने लगता है।
कोट
शेड के एक हिस्से में बारदाना रखा है। गेहूं को ढकने के लिए तिरपाल थे। इससे गेहूं की ढेरी में थोड़ा बहुत ही पानी गया है।
महेंद्र गर्ग, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन करनाल।