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घुड़सवारी का हुनर सीख सकेंगे कर्णनगरी के खिलाड़ी
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पुंडरक में घुड़सवारी केंद्र का निर्माण पूरा हो गया है। इसी सप्ताह गुरुग्राम से चार थौरी नस्ल के घोड़े इस केंद्र में पहुंच जाएंगे। जिससे कर्णनगरी के खिलाड़ी यहां घुड़सवारी का हुनर सीख सकेंगे। वहीं उन्हें इसके प्रशिक्षण के लिए अन्य जिले में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हरियाणा की पहचान कहे जाने वाले परंपरागत खेल कुश्ती, कबड्डी, रेसलिंग आदि खेलों के अलावा घुड़सवारी, क्लाइंबिंग वॉल और थाग ता जैसे खेलों को भी प्रोत्साहन देने की योजना पर काम चल रहा है। इसी दिशा में खेल विभाग पुुुंडरक खेल परिसर में घुड़सवारी और कर्ण स्टेडियम में क्लाइंबिंग वॉल जैसे खेलों के केंद्र खोलने जा रहा है।
अब तक घुड़सवारी के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए दूसरे जिलों की ओर रुख करना पड़ता था, अब पुंडरक में घुड़सवारी केंद्र खुलने से ये सुविधा जिले में ही प्राप्त हो सकेगी। खेल विभाग जुलाई के अंत तक हरियाणा राज्य घुड़सवारी संघ के सहयोग से पुंडरक स्थित राजीव गांधी खेल परिसर में घुड़सवारी का अभ्यास शुरू करा देगा। जिसमें 25 से 30 खिलाड़ी अभ्यास कर सकेंगे। खेल विभाग द्वारा घोड़ों के रखरखाव के लिए पर्याप्त सुविधा और शेड का निर्माण करा दिया गया है, अब केवल गुरुग्राम से घोड़ों के पहुंचने का इंतजार हैं। अभी तक जिले का एक मात्र घुड़सवारी केंद्र मधुबन पुलिस अकादमी में संचालित किया जाता है, जहां केवल पुलिस विभाग के लोगों को ही प्रशिक्षण दिया जाता है।
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खेल विभाग भविष्य में प्रदेश की पदक तालिका में वृद्धि करने पर काम कर रहा है, इसलिए परंपरागत खेलों के अलावा अन्य खेलों का भी और अधिक विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा। ताकी खिलाड़ी पदक ला सकें। इसी कड़ी में पुंडरक में बन रहे घुड़सवारी केंद्र का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसी सप्ताह गुरुग्राम से चार घोडे़ भी पहुंच जाएंगे। जिसके बाद खिलाड़ियों को किसी और जिले में नहीं जाना पड़ेगा और प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया जाएगा।
- सतबीर सिंह, वरिष्ठ फेंसिंग कोच
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करनाल। पुंडरक में घुड़सवारी केंद्र का निर्माण पूरा हो गया है। इसी सप्ताह गुरुग्राम से चार थौरी नस्ल के घोड़े इस केंद्र में पहुंच जाएंगे। जिससे कर्णनगरी के खिलाड़ी यहां घुड़सवारी का हुनर सीख सकेंगे। वहीं उन्हें इसके प्रशिक्षण के लिए अन्य जिले में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हरियाणा की पहचान कहे जाने वाले परंपरागत खेल कुश्ती, कबड्डी, रेसलिंग आदि खेलों के अलावा घुड़सवारी, क्लाइंबिंग वॉल और थाग ता जैसे खेलों को भी प्रोत्साहन देने की योजना पर काम चल रहा है। इसी दिशा में खेल विभाग पुुुंडरक खेल परिसर में घुड़सवारी और कर्ण स्टेडियम में क्लाइंबिंग वॉल जैसे खेलों के केंद्र खोलने जा रहा है।
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अब तक घुड़सवारी के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए दूसरे जिलों की ओर रुख करना पड़ता था, अब पुंडरक में घुड़सवारी केंद्र खुलने से ये सुविधा जिले में ही प्राप्त हो सकेगी। खेल विभाग जुलाई के अंत तक हरियाणा राज्य घुड़सवारी संघ के सहयोग से पुंडरक स्थित राजीव गांधी खेल परिसर में घुड़सवारी का अभ्यास शुरू करा देगा। जिसमें 25 से 30 खिलाड़ी अभ्यास कर सकेंगे। खेल विभाग द्वारा घोड़ों के रखरखाव के लिए पर्याप्त सुविधा और शेड का निर्माण करा दिया गया है, अब केवल गुरुग्राम से घोड़ों के पहुंचने का इंतजार हैं। अभी तक जिले का एक मात्र घुड़सवारी केंद्र मधुबन पुलिस अकादमी में संचालित किया जाता है, जहां केवल पुलिस विभाग के लोगों को ही प्रशिक्षण दिया जाता है।
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खेल विभाग भविष्य में प्रदेश की पदक तालिका में वृद्धि करने पर काम कर रहा है, इसलिए परंपरागत खेलों के अलावा अन्य खेलों का भी और अधिक विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा। ताकी खिलाड़ी पदक ला सकें। इसी कड़ी में पुंडरक में बन रहे घुड़सवारी केंद्र का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसी सप्ताह गुरुग्राम से चार घोडे़ भी पहुंच जाएंगे। जिसके बाद खिलाड़ियों को किसी और जिले में नहीं जाना पड़ेगा और प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया जाएगा।
- सतबीर सिंह, वरिष्ठ फेंसिंग कोच