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Karnal News: हरियाणा गठन के बाद बदलता रहा करनाल का नक्शा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 02:09 AM IST
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The map of Karnal kept changing after the formation of Haryana.
गगन तलवार
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करनाल। विश्व विख्यात दानवीर राजा कर्ण की नगरी करनाल ने देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने में खास योगदान दिया है। राजा कर्ण की तरह अपने हिस्से को देकर करनाल ने हरियाणा के नक्शे में बढ़ाया। इससे करनाल का स्वरूप भी बदलता रहा। दूसरों को समृद्ध करते हुए आगे बढ़ने का यह सिलसिला अभी भी जारी है। आजादी से पहले के करनाल में पानीपत, कुरुक्षेत्र और कैथल भी उपमंडल हुआ करते थे, आज ये तीनों स्वतंत्र जिले हैं। वहीं वर्तमान में जिले का सबसे बड़ा उपमंडल असंध अब करनाल से चौथा जिला बनने की ओर अग्रसर है। इससे एकबार फिर करनाल के नक्शे में बदलाव देखने को मिलेगा।

वहीं विकास की दृष्टि से देखें तो 1739 में अस्तित्व में आए करनाल में कभी संकरी सड़कों पर केवल टांगों की ही सवारी हुआ करती थी। आज जिले के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और 709ए के अलावा पांच छह लेन के राजमार्ग भी हैं, जिन पर तेज रफ्तार से वाहन दौड़ते हैं। इससे दिनों का सफर घंटों में तय होना शुरू हुआ। तो वहीं अगले 20 वर्ष की स्थिति देखें तो यहां से रैपिड रेल और हवाई अड्डे से घंटों के सफर को मिनटों में तय करने की तैयारी है।
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कृषि, खेल, शिक्षा और अनुसंधान के बाद कर्ण नगरी को पर्यटन नगरी के रूप में भी पहचान देने के लिए सरकार और प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी के तहत 900 करोड़ रुपये शहर की सुंदरता पर खर्च किए जा रहे हैं। यहां कई ऐतिहासिक मंदिर और गुरुद्वारे भी हैं। 286 साल पुराने करनाल से निकलकर अलग बने जिलों का 1959 तक का संयुक्त रिकॉर्ड भी यहां मौजूद है। करनाल कैसे अस्तित्व में आया, पुराने शहर के बाद नए शहर का कैसे विस्तार हुआ, हरियाणा दिवस के अवसर पर पढ़े अमर उजाला की विशेष प्रस्तुति -
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जिले की वर्तमान स्थिति -

क्षेत्र : 2520 वर्ग किलोमीटर

जनसंख्या : 1505324

साक्षरता दर : 74.73 प्रतिशत

खंड : 08

गांव : 435

नगरपालिका व नगर निगम : 07



ऐतिहासिक निशानियां समेटे हुए हैं कर्ण नगरी

कर्ण नगरी कई ऐतिहासिक धरोहर भी अपने में समेटे हुए है। महाभारत काल, मुगल काल और ब्रिटिश काल की कुछ निशानियों यहां पर हैं। जिनके पुराने वजूद को नए रूप में जिंदा करने के लिए भी काम हो रहा है। पुरानी धरोहरों में रेलवे स्टेशन, करनाल क्लब भी शामिल है। पुराने शहर की कुछ निशानियों को अब स्मार्ट सिटी के तहत हैरीटेज कॉरीडोर में भी विकसित किया गया। जिनमें 200 साल पुरानी क्रिश्चियन सिमेटरी, ब्रिटिश काल में बना ओल्ड कचहरी भवन, रिकॉर्ड रूम, कोस मीनार और आजादी से पूर्व का विक्टोरिया मेमोरियल हाल शामिल है।



ऐसे बने करनाल से अलग जिले

- कुरुक्षेत्र : 23 जनवरी 1973 को करनाल से अलग करके कुरुक्षेत्र को जिला बनाया गया। तीर्थ स्थलों की पावन धरा धर्मनगरी कुरुक्षेत्र का इतिहास अपने आप में बेहद रोचक है। करनाल से जुड़ी महाभारत काल की कई निशानियां इस जिले में चली गई।

- पानीपत : 01 नवंबर 1989 को चौ. देवीलाल ने पानीपत को करनाल से अलग जिला घोषित किया। भजनलाल सत्ता में आए तो 1991 में पानीपत को फिर से करनाल जिले का हिस्सा बना दिया। लोगों ने आंदोलन किया तो राजनैतिक दबाव बढ़ने दो साल बाद पानीपत को फिर से जिला घोषित किया। हालांकि, लोकसभा क्षेत्र आज भी करनाल ही है।

- कैथल : 1989 में हरियाणा जिले के रूप में अस्तित्व में आया। माना जाता है कि वर्तमान में कैथल जिला उस समय करनाल का हिस्सा भगवान युधिष्ठर द्वारा महाभारत काल के दौरान स्थापित किया गया था।



तब सात द्वारों में बंद था शहर, 2019 में मिले नए नाम

पुराना शहर के केवल सात द्वारों के अंदर ही बसा था। शाम को छह बजते ही सुरक्षा के लिहाज से इन्हें बंद कर दिया जाता था। 1960 तक कमेटी रात में इन पर दीये जलाती थी। आजादी से पहले जुंडला गेट पर दो चुंगी हुआ करती थी। बासों गेट में बांस की मंडी लगती थी। कर्ण गेट और कलंदरी गेट बाजार का रस्ता था, कलंदरी गेट में ही मीना बाजार भी लगता था। अंग्रेजों के जमाने में वर्तमान के सराफा बाजार की गली को प्रिंसिपल स्ट्रीट के नाम से जाना जाता था। वहीं कर्ण गेट मार्केट भी शहर का नेशनल हाईवे भी हुआ करता था। 14 जून 2019 को इन पुराने द्वारों को महाभारत के इतिहास से जोड़ते हुए और कर्ण की नगरी होने के कारण नए नाम दिए गए। इनमें कलंदरी गेट को कृष्ण द्वार, कर्ण गेट को कर्ण द्वार, सुभाष गेट को सहदेव द्वार, बांसो गेट को भीम द्वार, दयालपुरा गेट को नकुल द्वार, जुंडला गेट को युद्धिष्ठर द्वार और अर्जुन गेट को अर्जुन द्वार का नाम दिया गया।



इतिहास : राजा कर्ण द्वारा स्थापित शहर में हुई पांच लड़ाई

करनाल शहर महाभारत के प्रसिद्ध राजा कर्ण द्वारा स्थापित किया गया था। यहां भी शासन को लेकर पांच लड़ाई हुई हैं। सन 1739 में करनाल प्रमुखता से अस्तित्व में आया, जब नादिर शाह ने करनाल में मुहम्मद शाह को हराया था। जींद के राजा गोपाल सिंह ने 1763 में करनाल पर कब्जा कर लिया था। 1785 में मराठों ने करनाल में खुद को स्थापित किया था। 1795 में मराठों ने अंत में जींद के राजा भाग सिंह से करनाल शहर को जीत लिया और इसे जॉर्ज थॉमस को सौप दिया, जिन्होंने इस लड़ाई में भाग लिया। इस बीच लाडवा के राजा गुरदित सिंह ने करनाल पर कब्जा कर लिया। 1805 में अंग्रेजों ने यहां कब्जा किया और मंडल बनाया। करनाल को ब्रिटिश छावनी में तबदील कर दिया गया और जींद के राजा गजपत सिंह द्वारा निर्मित किले पर कब्जा कर उसे काबुल के आमिर दोस्त मोहम्मद खान के घर में परिवर्तित कर दिया। इस किले का उपयोग जेल के रूप में, घुड़सवार सेना के क्वार्टर और गरीब घर के रूप में किया गया।




1974 में कटा था पहला सेक्टर, पांच और कटेंगे

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण 1977 में गठित हुआ था। इससे पहले ही अर्बन अस्टेट के तहत 1974 में सबसे पहले सेक्टर-13 बना था। इससे पहले कॉलोनियों में ही लोग रहते थे। आज एचएसवीपी के कामर्शियल और आवासीय मिलाकर 20 सेक्टर हैं। 2013 में करनाल नगर निगम बना, इससे पहले नगर पालिका थी। कई कॉलोनियां निगम में भी कटी हैं। लाइन पार क्षेत्र भी पुराने समय से कैंप कहा जाता है। अधिकारियों के अनुसार, अगले 10 वर्ष में पांच नए सेक्टर और बन सकते हैं। 2018 के बाद से करनाल में नया सेक्टर नहीं कटा है।
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