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Karnal News: मंडी प्रशासन ने यूपी से आने वाली बारीक जीरी की आवक पर लगाई रोक
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पिछले छह दिन से बंद अनाज मंडी सोमवार को खुली। मंडी खुलते ही इंतजार कर रहे किसान अपनी धान लेकर मंडी में पहुंचने लगे। किसानों के ट्रैक्टर की लंबी कतारों से दोपहर तक अनाज मंडी से जुड़ी शहर की सड़कों पर जाम जैसे हालात बने रहे। मंडी में धान की आवक को ज्यादा देखते हुए मार्केट कमेटी ने उत्तर प्रदेश से आने वाली 1509 किस्म की बारीक जीरी पर भी रोक लगा दी। इसे लेकर अनाज मंडी के आढ़ती मार्केट पदाधिकारियों से भी मिले। उन्होंने आश्वासन दिया कि अभी मंडी में आवक बहुत ज्यादा है। धान का उठान होने और यहां के किसानों की धान खरीदने के बाद बारीक धान को अंदर आने दिया जाएगा।
दूसरी ओर भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने आरोप लगाए कि कृषि विभाग ने पोर्टल पर प्रति एकड़ 35 क्विंटल धान उत्पादन का डेटा फीड कर रखा है जबकि किसान के खेत से प्रति एकड़ धान का केवल 17 से 20 क्विंटल ही उत्पादन हो रहा है। ऐसे में पोर्टल पर बची हुई 15-16 क्विंटल की जगह को फर्जी धान दिखाकर भर दिया जाता है। दूसरे प्रदेशों से सस्ते दामों पर धान खरीदा जाता है या हरियाणा के किसानों से कम रेट पर धान लिया जाता है। सरकारी कंप्यूटरों के बजाय निजी सिस्टम से गेट पास काटे जाते हैं। मंडियों में जब धान की बोली लगाई जाती है तो एच रजिस्टर में खरीदारों की जानकारी दर्ज होती है लेकिन कर्मचारी इसे मौके पर भरने के बजाय मनमाने ढंग से भर देते हैं। यही वजह है कि कई बार अच्छी क्वालिटी के धान की बोली 2500 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक चली जाती है, जबकि सरकारी खरीद 300 रुपये कम रेट पर होती है।
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करनाल। पिछले छह दिन से बंद अनाज मंडी सोमवार को खुली। मंडी खुलते ही इंतजार कर रहे किसान अपनी धान लेकर मंडी में पहुंचने लगे। किसानों के ट्रैक्टर की लंबी कतारों से दोपहर तक अनाज मंडी से जुड़ी शहर की सड़कों पर जाम जैसे हालात बने रहे। मंडी में धान की आवक को ज्यादा देखते हुए मार्केट कमेटी ने उत्तर प्रदेश से आने वाली 1509 किस्म की बारीक जीरी पर भी रोक लगा दी। इसे लेकर अनाज मंडी के आढ़ती मार्केट पदाधिकारियों से भी मिले। उन्होंने आश्वासन दिया कि अभी मंडी में आवक बहुत ज्यादा है। धान का उठान होने और यहां के किसानों की धान खरीदने के बाद बारीक धान को अंदर आने दिया जाएगा।
दूसरी ओर भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने आरोप लगाए कि कृषि विभाग ने पोर्टल पर प्रति एकड़ 35 क्विंटल धान उत्पादन का डेटा फीड कर रखा है जबकि किसान के खेत से प्रति एकड़ धान का केवल 17 से 20 क्विंटल ही उत्पादन हो रहा है। ऐसे में पोर्टल पर बची हुई 15-16 क्विंटल की जगह को फर्जी धान दिखाकर भर दिया जाता है। दूसरे प्रदेशों से सस्ते दामों पर धान खरीदा जाता है या हरियाणा के किसानों से कम रेट पर धान लिया जाता है। सरकारी कंप्यूटरों के बजाय निजी सिस्टम से गेट पास काटे जाते हैं। मंडियों में जब धान की बोली लगाई जाती है तो एच रजिस्टर में खरीदारों की जानकारी दर्ज होती है लेकिन कर्मचारी इसे मौके पर भरने के बजाय मनमाने ढंग से भर देते हैं। यही वजह है कि कई बार अच्छी क्वालिटी के धान की बोली 2500 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक चली जाती है, जबकि सरकारी खरीद 300 रुपये कम रेट पर होती है।
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