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Karnal News: संघ की 145 शाखाओं में पढ़ाया जा रहा समाज और देश सेवा का पाठ

Mon, 06 Oct 2025 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Mon, 06 Oct 2025 01:42 AM IST
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The lesson of serving society and the country is being taught in 145 branches of the Sangh.
सिवाह गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौजूद स्वयंसेवक। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। राष्ट्रीय स्वयं सेवक की शाखा में खुद के साथ समाज व देश की रक्षा का पाठ पढ़ाया जा रहा है। देश के मुद्दों की लड़ाई में भी स्वयंसेवक आगे रहे हैं और शाखा से राजनीति के क्षेत्र में आकर सेवा कार्यों में लगे हैं। आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर पहली बार दो दिन शस्त्र पूजन और पथ संचलन किया गया। पहले दिन दशहरा और दूसरा कार्यक्रम रविवार को किया गया।
आरएसएस की स्थापना 1925 में की थी। जिले में करीब 1941 को शाखा शुरू की थी। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद से कार्यकर्ता पानीपत शाखा लगाने आते थे। उस समय एक शाखा लगती थी। जिला प्रचार प्रमुख प्रदीप कुमार ने बताया कि जिले में आज एक महानगर और 12 इकाइयां नगरीय हैं। पानीपत नगर में 11 इकाई व एक इकाई समालखा नगर है। इसके साथ 30 इकाई ग्रामीण अंचल में हैं। इस समय जिले में करीब 145 शाखा हैं और करीब 80 स्थानों पर शाखा लगाई जाती हैं। एक शाखा में 15 से 20 कार्यकर्ता शामिल होते हैं। इस बार दशहरा व रविवार को शस्त्र पूजन व पथ संचलन का कार्यक्रम किया गया है।
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संघ के साथ राजनीति में कर रहे सेवा
जिले से राजेश कुमार प्रांत प्रचार प्रमुख कार्य देख रहे हैं। भादौड़ गांव के सुशील गौड़ कुरुक्षेत्र विभाग में सह विभाग संघचालक का काम देख रहे हैं। जिले के 15-20 कार्यकर्ता प्रचारक के रूप में कार्य कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा संघ की शाखा से सीखकर आगे बढ़े हैं। वे भाजपा में युवा मोर्चा और किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं। पूर्व सांसद संजय भाटिया संघ की शाखा से आगे बढ़े हैं।
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आपातकाल में आगे रहे कार्यकर्ता
संघ में विभाग कार्यवाह रहे रमेश नांगरू ने बताया कि आपातकाल में अपनी मांग सरकार के सामने रखी थी। उस समय उनकी कोई सुनवाई नहीं की। संघ ने एक लाख कार्यकर्ताओं के साथ जेल भरने का फैसला लिया। वे उस समय राजस्थान में थे। उस समय करीब 94 हजार कार्यकर्ता जेल में गए थे। कुछ को सरकार ने ही गिरफ्तार किया था। अयोध्या में राम मंदिर के लिए कई यात्राएं निकाली गई। लोगों में जाकर जन जागरण अभियान चलाया। उनको याद है कि उन्होंने उस समय नई मोटरसाइकिल ली थी। वे हर रोज गांव व दूसरे शहरों में जाते थे। राम मंदिर के संघर्ष के दौरान मोटरसाइकिल पुरानी हो गई। वे अयोध्या में कार सेवा गए थे। उनके पास जिला संघचालक और विभाग सह संघचालक का दायित्व भी रहा है।
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