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पापाें को नष्ट करता है देवशयनी एकादशी का व्रत : विनाेद
Sat, 13 Jul 2024 07:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 13 Jul 2024 07:15 AM IST
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भगवान दास
करनाल। हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित होती है और इसी के साथ शुभ फल की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि एकादशी व्रत रखने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। आषाढ़ माह में देवशयनी एकादशी का व्रत बेहद खास होता है।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस एकादशी को देवशयनी एकादशी, पद्मनाभा एकादशी और हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है वही आषाढ़ माह की एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि योगनिद्रा करने चले जाते हैं और फिर कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। देवशयनी एकादशी से लेकर चार महीने तक भगवान विष्णु शयन करते हैं। इन चार महीने को चातुर्मास कहा जाता है।
चातुर्मास में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस माह में भगवान की विशेष पूजा जाती है वही इन चार महीने में संसार का संचालन भगवान शिव करते हैं। देवशयनी एकादशी का दिन हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना गया है, इसी दिन से जैन धर्म के लोगों का चातुर्मास भी शुरू हो जाता है। इन चार महीनों तक संत भी यात्रा नहीं करते, बल्कि एक ही जगह पर रहकर भगवान की भक्ति-साधना करते हैं।
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पंडित विनोद ने बताया कि पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की एकादशी या देवशयनी एकादशी तिथि की शुरुआत 16 जुलाई, दिन मंगलवार रात 8 बजकर 33 मिनट से होगी और 17 जुलाई, दिन बुधवार को रात 09 बजकर 02 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदयातिथि के अनुसार, इस साल देवशयनी एकादशी व्रत 17 जुलाई को रखा जाएगा। इस दिन एकादशी व्रत रखकर भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा की जाएगी। ऐसा करने से श्री हरि की असीम कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। संवाद
देवशयनी एकादशी के दिन क्या करें
- सुबह स्नान करने के बाद पीले कपड़े पहने
- भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें
- एकादशी व्रत का संकल्प लेकर व्रत रखना चाहिए.
- धन, अनाज और कपड़ों का दान करना चाहिए
- श्रीहरि के भोग में तुलसी के पत्ते को जरूर शामिल करना चाहिए.
देवशयनी एकादशी पर ये न करें
- तामसिक भोजन खाने से बचे
- चावल भूल से भी खाने चाहिए
- किसी महिला और बुजुर्गों का अपमान नही करना चाहिए
- तुलसी के पत्ते नही तोड़ने चाहिए
- व्रतधारी को किसी के प्रति मन में गलत विचार नहीं लाने चाहिए
देवशयनी एकादशी के क्या है नियम
- चावल से बनी चीजें नहीं खाई जाती
- महिलाओं को पूर्ण स्नान नहीं करना चाहिए
- नाखून या बाल काटने नहीं चाहिए
- लाल या पीले रंग के ही कपड़े पहनें
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करनाल। हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित होती है और इसी के साथ शुभ फल की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि एकादशी व्रत रखने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। आषाढ़ माह में देवशयनी एकादशी का व्रत बेहद खास होता है।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस एकादशी को देवशयनी एकादशी, पद्मनाभा एकादशी और हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है वही आषाढ़ माह की एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि योगनिद्रा करने चले जाते हैं और फिर कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। देवशयनी एकादशी से लेकर चार महीने तक भगवान विष्णु शयन करते हैं। इन चार महीने को चातुर्मास कहा जाता है।
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चातुर्मास में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस माह में भगवान की विशेष पूजा जाती है वही इन चार महीने में संसार का संचालन भगवान शिव करते हैं। देवशयनी एकादशी का दिन हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना गया है, इसी दिन से जैन धर्म के लोगों का चातुर्मास भी शुरू हो जाता है। इन चार महीनों तक संत भी यात्रा नहीं करते, बल्कि एक ही जगह पर रहकर भगवान की भक्ति-साधना करते हैं।
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पंडित विनोद ने बताया कि पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की एकादशी या देवशयनी एकादशी तिथि की शुरुआत 16 जुलाई, दिन मंगलवार रात 8 बजकर 33 मिनट से होगी और 17 जुलाई, दिन बुधवार को रात 09 बजकर 02 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदयातिथि के अनुसार, इस साल देवशयनी एकादशी व्रत 17 जुलाई को रखा जाएगा। इस दिन एकादशी व्रत रखकर भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा की जाएगी। ऐसा करने से श्री हरि की असीम कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। संवाद
देवशयनी एकादशी के दिन क्या करें
- सुबह स्नान करने के बाद पीले कपड़े पहने
- भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें
- एकादशी व्रत का संकल्प लेकर व्रत रखना चाहिए.
- धन, अनाज और कपड़ों का दान करना चाहिए
- श्रीहरि के भोग में तुलसी के पत्ते को जरूर शामिल करना चाहिए.
देवशयनी एकादशी पर ये न करें
- तामसिक भोजन खाने से बचे
- चावल भूल से भी खाने चाहिए
- किसी महिला और बुजुर्गों का अपमान नही करना चाहिए
- तुलसी के पत्ते नही तोड़ने चाहिए
- व्रतधारी को किसी के प्रति मन में गलत विचार नहीं लाने चाहिए
देवशयनी एकादशी के क्या है नियम
- चावल से बनी चीजें नहीं खाई जाती
- महिलाओं को पूर्ण स्नान नहीं करना चाहिए
- नाखून या बाल काटने नहीं चाहिए
- लाल या पीले रंग के ही कपड़े पहनें