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कृषि कानून पर किसान बोले-साहब लिखित में चाहिए एमएसपी गारंटी
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म्हारै तै बोल्ले कुत्ते नै नहीं पाड़ राख्या.. जो गेहूं-धान ही लगावेंगे, तुम सब्जी फल में भाव दो हम एमएसपी नहीं पूछेंगे..। यह बात पानीपत के किसान बिजेंद्र सिंह ने उस वक्त कही। जब रविवार को डॉ. मंगलसेन ऑडिटारियम में प्रगतिशील किसान सम्मेलन एवं कृषि अधिनियम पर आयोजित विचार विमर्श कार्यक्रम में पैनालिस्ट एमएसपी और गेहूं-धान की जगह सब्जी और फल बोने की बात कर रहे थे।
किसान ने कहा कि हम नए तीनों कानूनों का विरोध नहीं कर रहे, सिर्फ सियोरिटी मांग रहे हैं कि एमएसपी नहीं जाएगा। यह बात पीएम भी कहते हैं और सीएम भी, लेकिन किसान को इसकी गारंटी नहीं मिल रही। हमें क्या जरूरत पड़ी है कि हम गेहूं और धान ही उगाएं? हमें तो भाव मिलना चाहिए। अगर आपकी जेब में पैसा फल और सब्जी बोने से आएगा तो गेहूं और धान क्यों लगाएंगे। देसी अंदाज में किसान बोला, मैं तो न्यू कहूं सू जी... जब लाला (सरकार) खुद ही कह रही है कि हमने एमएसपी देना है और किसान ने लेना है, तो फिर लिखित में यह बात कहने में क्या दिक्कत है। साहब इसे मूछ की लड़ाई ना बनाएं। किसान के लिए पहले देश है फिर अपना घर बाद में। जबकि कार्पोरेट में कंपनी पहले होती है और देश बाद में। पैनलिस्टों में विजय सरदाना, डीपी मलिक, डॉ. केके कुंडू और पुनीत सिंह थिंड थे।
एसीएस बोले, मंडी सिस्टम ऐसे ही चलेगा, आय बढ़ाने का हो रहा प्रयास
पैनालिस्ट विनय सरदाना और एसीएस देवेंद्र सिंह ने किसान की बात का जवाब भी दिया। सरदाना ने कहा कि कानून में क्लीयर लिखा है कि जमीन को नुकसान नहीं होने देंगे। किसी भी कानून से किसान की जमीन को दिक्कत नहीं आएगी, इसकी मैं गारंटी देता हूं। फिर एसीएस बोले, मंडी सिस्टम ऐसा ही चलेगा। इस पर कोई संशय ना रखें। किसान की फसल के दाम में 5 से 50 रुपये तक का जो बिचौलिया सिस्टम में अंतर है, इसे खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। एमएसपी सिस्टम पहले की तरह ही चलेगा।
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सीएम बोले, प्रति एकड़ एक लाख आय सुनिश्चित हो..
वहीं सीएम मनोहर लाल ने भी एमएसपी प्रणाली को जारी रखने के तहत किसानों को आश्वस्त किया। कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए कृषि अधिनियम किसानों के लिए बड़े ही हितकारी हैं और निकट भविष्य में इन कृषि सुधारों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये आय प्राप्त हो।
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किसान ने कहा कि हम नए तीनों कानूनों का विरोध नहीं कर रहे, सिर्फ सियोरिटी मांग रहे हैं कि एमएसपी नहीं जाएगा। यह बात पीएम भी कहते हैं और सीएम भी, लेकिन किसान को इसकी गारंटी नहीं मिल रही। हमें क्या जरूरत पड़ी है कि हम गेहूं और धान ही उगाएं? हमें तो भाव मिलना चाहिए। अगर आपकी जेब में पैसा फल और सब्जी बोने से आएगा तो गेहूं और धान क्यों लगाएंगे। देसी अंदाज में किसान बोला, मैं तो न्यू कहूं सू जी... जब लाला (सरकार) खुद ही कह रही है कि हमने एमएसपी देना है और किसान ने लेना है, तो फिर लिखित में यह बात कहने में क्या दिक्कत है। साहब इसे मूछ की लड़ाई ना बनाएं। किसान के लिए पहले देश है फिर अपना घर बाद में। जबकि कार्पोरेट में कंपनी पहले होती है और देश बाद में। पैनलिस्टों में विजय सरदाना, डीपी मलिक, डॉ. केके कुंडू और पुनीत सिंह थिंड थे।
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एसीएस बोले, मंडी सिस्टम ऐसे ही चलेगा, आय बढ़ाने का हो रहा प्रयास
पैनालिस्ट विनय सरदाना और एसीएस देवेंद्र सिंह ने किसान की बात का जवाब भी दिया। सरदाना ने कहा कि कानून में क्लीयर लिखा है कि जमीन को नुकसान नहीं होने देंगे। किसी भी कानून से किसान की जमीन को दिक्कत नहीं आएगी, इसकी मैं गारंटी देता हूं। फिर एसीएस बोले, मंडी सिस्टम ऐसा ही चलेगा। इस पर कोई संशय ना रखें। किसान की फसल के दाम में 5 से 50 रुपये तक का जो बिचौलिया सिस्टम में अंतर है, इसे खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। एमएसपी सिस्टम पहले की तरह ही चलेगा।
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सीएम बोले, प्रति एकड़ एक लाख आय सुनिश्चित हो..
वहीं सीएम मनोहर लाल ने भी एमएसपी प्रणाली को जारी रखने के तहत किसानों को आश्वस्त किया। कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए कृषि अधिनियम किसानों के लिए बड़े ही हितकारी हैं और निकट भविष्य में इन कृषि सुधारों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये आय प्राप्त हो।