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Karnal News: स्टार प्रचारक का खर्च प्रत्याशी के बजाय पार्टी व्यय में जुड़ेगा
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। लोकसभा चुनाव के दौरान स्टार प्रचारकों व उनके साथ के अमले का खर्च प्रत्याशी की बजाय पार्टी खर्च में जोड़ा जाएगा। अधिकारी किसी भी प्रत्याशी के प्रचार में लगी गाडिय़ों का खर्च जोड़ते समय रोजाना शाम को वाहन के मीटर की रीडिंग भी नोट करेंगे। हर व्यक्ति को उम्मीदवार की ओरसे खर्च की गई राशि का रिकॉर्ड देखने का अधिकार है।
लघु सचिवालय में जिले के पांचों हलकों के चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को जिला परिषद के मुख्य अधिकारी विवेक चौधरी ने प्रशिक्षण दिया। इस मौके पर उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव की यह सुंदरता है कि यहां रिकॉर्ड पर हर चीज स्पष्ट है।
उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि चुनाव आयोग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करते हुए हर चीज को रिकॉर्ड करना है। प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा। सीईओ ने कहा कि कानून की पालना करते हुए सकारात्मक सोच होनी चाहिए। अनावश्यक रूप से किसी को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। लोकसभा प्रत्याशी के लिये खर्च की सीमा 95 लाख और विधानसभा के लिए 40 लाख रुपये तय की गई है।
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प्रत्याशी द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथि से ही खर्च का आकलन शुरू हो जाता है। इस बात की जानकारी दी कि कानून चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को किन खर्चों की अनुमति देता है। अधिकारियों से गैर कानूनन किये जाने वाले खर्चों पर निगरानी रखते हुए उनका पूरा रिकॉर्ड विधानसभा क्षेत्र अनुसार रखने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति से दस लाख से अधिक की राशि मिलती है तो उसके बारे में आयकर विभाग के अधिकारियों को भी सूचित करें।
प्रशिक्षण में दी यह जानकारी
सीईओ से खर्च पर्यवेक्षक, सहायक खर्च पर्यवेक्षक, एसएसटी(स्टेटिक सर्विलांस टीम), वीएसटी(वीडियो सर्विलांस टीम), वीवीटी(वीडियो व्यूविंग टीम), अकाउंट टीम, एक्साइज टीम, एमसीएमसी(मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मानिटरिंग कमेटी)के कार्यों व दायित्वों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही शैडो रजिस्टर, अनुलग्नक- 48(एनेक्सर) तथा चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न फार्मों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि एसएसटी और एफएसटी की रिपोर्ट के आधार पर ही लेखा टीम रिपोर्ट तैयार करेगी।
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करनाल। लोकसभा चुनाव के दौरान स्टार प्रचारकों व उनके साथ के अमले का खर्च प्रत्याशी की बजाय पार्टी खर्च में जोड़ा जाएगा। अधिकारी किसी भी प्रत्याशी के प्रचार में लगी गाडिय़ों का खर्च जोड़ते समय रोजाना शाम को वाहन के मीटर की रीडिंग भी नोट करेंगे। हर व्यक्ति को उम्मीदवार की ओरसे खर्च की गई राशि का रिकॉर्ड देखने का अधिकार है।
लघु सचिवालय में जिले के पांचों हलकों के चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को जिला परिषद के मुख्य अधिकारी विवेक चौधरी ने प्रशिक्षण दिया। इस मौके पर उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव की यह सुंदरता है कि यहां रिकॉर्ड पर हर चीज स्पष्ट है।
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उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि चुनाव आयोग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करते हुए हर चीज को रिकॉर्ड करना है। प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा। सीईओ ने कहा कि कानून की पालना करते हुए सकारात्मक सोच होनी चाहिए। अनावश्यक रूप से किसी को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। लोकसभा प्रत्याशी के लिये खर्च की सीमा 95 लाख और विधानसभा के लिए 40 लाख रुपये तय की गई है।
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प्रत्याशी द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथि से ही खर्च का आकलन शुरू हो जाता है। इस बात की जानकारी दी कि कानून चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को किन खर्चों की अनुमति देता है। अधिकारियों से गैर कानूनन किये जाने वाले खर्चों पर निगरानी रखते हुए उनका पूरा रिकॉर्ड विधानसभा क्षेत्र अनुसार रखने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति से दस लाख से अधिक की राशि मिलती है तो उसके बारे में आयकर विभाग के अधिकारियों को भी सूचित करें।
प्रशिक्षण में दी यह जानकारी
सीईओ से खर्च पर्यवेक्षक, सहायक खर्च पर्यवेक्षक, एसएसटी(स्टेटिक सर्विलांस टीम), वीएसटी(वीडियो सर्विलांस टीम), वीवीटी(वीडियो व्यूविंग टीम), अकाउंट टीम, एक्साइज टीम, एमसीएमसी(मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मानिटरिंग कमेटी)के कार्यों व दायित्वों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही शैडो रजिस्टर, अनुलग्नक- 48(एनेक्सर) तथा चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न फार्मों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि एसएसटी और एफएसटी की रिपोर्ट के आधार पर ही लेखा टीम रिपोर्ट तैयार करेगी।