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Karnal News: बड़ी बहन ने रुकवाया छोटी का बाल विवाह... भाभी ने तय कराया था रिश्ता, 12 को आनी थी बरात

Fri, 10 Apr 2026 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Fri, 10 Apr 2026 02:22 AM IST
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The elder sister stopped the younger one's child marriage... The sister-in-law had arranged the marriage, and the wedding procession was to arrive on the 12th.
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। छोटी बहन की 12 अप्रैल को बरात आनी थी लेकिन बड़ी विवाहित बहन ने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर पर बाल विवाह की शिकायत दे दी। इसके बाद शादी रुकवा दी गई। मामला सालवन गांव का है, जहां 17 वर्षीय किशोरी की शादी 25 वर्षीय युवक से करवाई जा रही थी। किशोरी के माता-पिता और भाई का निधन हो चुका है। वह अपनी भाभी और बुआ के साथ रह रही थी।
महिला सरंक्षण अधिकारी सविता राणा ने बताया कि किशोरी ने दसवीं तक की पढ़ाई की है। उसकी भाभी व बुआ ने बड़ी बहन को सूचना दिए बिना शादी कराने का फैसला लिया था। फतेहाबाद के टोहाना से बरात आनी थी लेकिन सूचना मिलते ही महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी की टीम ने किशोरी के घर पहुंचकर शादी को रुकवाया। वहीं लड़का पक्ष को फोन पर चेतावनी दी गई कि शादी होगी तो कानूनी अपराध होगा। इसके बाद लड़की के परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग की गई।
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अन्य मामला : बाल विवाह करवाने वाले पंडित पर प्राथमिकी

एक 18 वर्ष के लड़के और 23 साल की लड़की ने भाग कर शादी कर ली। वे सुरक्षा की मांग के लिए महिला संरक्षण कार्यालय पहुंचे थे। अधिकारियों ने मामले की जांच की तो सामने आया कि लड़के की उम्र तय सीमा से कम है जिसमें यह शादी बाल विवाह की श्रेणी में आती है। जांच के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शादी करवाने वाले पंडित और लड़की पर बाल विवाह करने और करवाने के मामले पर प्राथमिकी दर्ज कर दी। बाल विवाह निषेध अधिकारी सविता राणा ने कहा कि बाल विवाह कराने या उसमें सहयोग करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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बाल विवाह करने पर कड़ी सजा का प्रावधान : सविता
महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सविता राणा ने बताया कि बाल विवाह गंभीर सामाजिक अपराध है जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि शादी से पहले सूचना मिल जाती है तो हमारी टीम मौके पर पहुंचकर काउंसलिंग के जरिए विवाह रुकवाती है और परिवार को चेतावनी देती है। अगर शादी हो चुकी होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है। लोगों से अपील है कि वे ऐसे मामलों की तुरंत सूचना दें। उन्होंने शादी करवाने वाले पंडितों से अनुरोध किया कि शादी करवाते समय दसवीं का प्रमाणपत्र या जन्म प्रमाणपत्र जरूर जांच करें। अक्षय तृतीया तक महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी से तरह से अलर्ट रहेगा जिसमें स्कूल, काॅलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह रोकने के लिए जागरूक अभियान चलाए जाएंगे।

कानूनी प्रावधान
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह करवाना, उसमें शामिल होना या सहयोग करना, बालिग पुरुष के नाबालिग लड़की से शादी करने पर और पंडित, मौलवी या कोई भी व्यक्ति जो विवाह संपन्न करवाता है, वह भी दोषी माना जाएगा। इसमें दो साल की सजा, एक लाख जुर्माना और माता-पिता या अभिभावक भी जिम्मेदार पाए जाने पर कार्रवाई के दायरे में आते हैं। इसके अलावा 1098,112,100 और 181 हेल्पलाइन नंबर पर कोई भी बाल विवाह की सूचना दे सकता है।
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