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फसलों पर शीथ ब्लाइट का खतरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
निसिंग। फसलों में शीथ ब्लाइट का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की फसल में तने पर धब्बे दिखाई देते हैं। यह शीथ ब्लाइट बीमारी की दस्तक होती है। यह बीमारी जिंक की कमी से हो रही है। इससे धान के पौधों का विकास रुक जाता है और तने पर काले दाने बन जाते हैं। इससे किसान को सीधे आर्थिक नुकसान हो जाता है। कुछ किसान इसे सामान्य बीमारी समझ लेते हैं पर जब फसल पक जाती है तो यह धान कम चमकीला होता है और कम कीमत में बिकता है। इससे पैदावार घट जाती है। बीएओ डॉ. राधेश्याम गुप्ता के अनुसार किसान धान के पौधों पर धब्बे या बुरा तेला दिखाई देते ही उसमें स्प्रे करवाने से पहले कृषि विभाग के डॉक्टर से सुझाव लें। कई बार गलत दवा का उपयोग करने पर स्प्रे में देरी होने पर पौधा कमजोर हो जाता है।
डॉं. विकास ने बताया कि धान की फसल के तने पर भूरे तेले, शीथ ब्लाइट और गंदी बाली जैसी समस्याओं के हमलों के प्रति अतिसंवेदनशील होती है। जिससे फसल की गुणवत्ता और उपज को नुकसान पहुंचता है। इसके बचाव के लिए लस्तर 400 मिली लीटर प्रति एकड़, वेल्डामाइसीन 400 मी. लीटर प्रति एकड़ और हल्दी की समस्या बालियों के आने पर बावास्टीन व प्रोपीक्रोनालझोन का छिड़काव पानी की उचित मात्रा के साथ किसान अपनी फसल में करें।
पछेती फसलों में अधिक यूरिया न डालें
डॉ. राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि धान में अधिक फुटाव व फसल का रंग काला हरा करने के लिए किसान उसमें अंधाधुंध यूरिया डालते हैं। जिससे फसल में फायदा कम और नुकसान अधिक होता है। यूरिया की अधिक मात्रा से धान का पौधा नरम हो जाता है। जिसमें बीमारियां जल्दी व अधिक आती हैं।
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निसिंग। फसलों में शीथ ब्लाइट का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की फसल में तने पर धब्बे दिखाई देते हैं। यह शीथ ब्लाइट बीमारी की दस्तक होती है। यह बीमारी जिंक की कमी से हो रही है। इससे धान के पौधों का विकास रुक जाता है और तने पर काले दाने बन जाते हैं। इससे किसान को सीधे आर्थिक नुकसान हो जाता है। कुछ किसान इसे सामान्य बीमारी समझ लेते हैं पर जब फसल पक जाती है तो यह धान कम चमकीला होता है और कम कीमत में बिकता है। इससे पैदावार घट जाती है। बीएओ डॉ. राधेश्याम गुप्ता के अनुसार किसान धान के पौधों पर धब्बे या बुरा तेला दिखाई देते ही उसमें स्प्रे करवाने से पहले कृषि विभाग के डॉक्टर से सुझाव लें। कई बार गलत दवा का उपयोग करने पर स्प्रे में देरी होने पर पौधा कमजोर हो जाता है।
डॉं. विकास ने बताया कि धान की फसल के तने पर भूरे तेले, शीथ ब्लाइट और गंदी बाली जैसी समस्याओं के हमलों के प्रति अतिसंवेदनशील होती है। जिससे फसल की गुणवत्ता और उपज को नुकसान पहुंचता है। इसके बचाव के लिए लस्तर 400 मिली लीटर प्रति एकड़, वेल्डामाइसीन 400 मी. लीटर प्रति एकड़ और हल्दी की समस्या बालियों के आने पर बावास्टीन व प्रोपीक्रोनालझोन का छिड़काव पानी की उचित मात्रा के साथ किसान अपनी फसल में करें।
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पछेती फसलों में अधिक यूरिया न डालें
डॉ. राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि धान में अधिक फुटाव व फसल का रंग काला हरा करने के लिए किसान उसमें अंधाधुंध यूरिया डालते हैं। जिससे फसल में फायदा कम और नुकसान अधिक होता है। यूरिया की अधिक मात्रा से धान का पौधा नरम हो जाता है। जिसमें बीमारियां जल्दी व अधिक आती हैं।
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