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पोषण, रोग प्रबंधन और नई तकनीकों से आगे बढ़ा देश : डॉ. बीएन त्रिपाठी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Apr 2023 02:22 AM IST
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The country has moved ahead with nutrition, disease management and new technologies: Dr. BN Tripathi
माई सिटी रिपोर्टर करनाल। आईसीएआर के उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान) डाॅ. भूपेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों को देसी नस्लों की गायों का संवर्धन करने की आवश्यकता है। वह राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेले में पहुंचे थे। उन्होंंने कहा कि 1950 में देश की आबादी 35 करोड़ थी, जो चार गुना बढ़ी, लेकिन दूध उत्पादन में हमने 12 गुणा प्रगति की है। आजादी के बाद गाय-भैंसों की संख्या 19-20 करोड़ थी जो अब बढ़कर 30 करोड़ हो गई है। दो करोड़ किसान डेयरी से जुड़े, आठ करोड़ उन पर निर्भर हैं। ऐसा बेहतर पोषण, रोगों का प्रबंधन, नवीनतम तकनीकियों के इस्तेमाल किए जाने के कारण हुआ है। किसानों के एफपीओ तथा स्वयं सहायता समूह बनाकर लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
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वैज्ञानिक तौर तरीकों से खेती करने का समय : डॉ. मनमोहन चौहान

-गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को परंपरागत तरीके छोड़कर खेती को वैज्ञानिक तौर तरीकों से करने की आवश्यकता है। उन्हें फायदा निश्चित होगा। वैज्ञानिक जो भी लाइन बोलते हैं, इसके पीछे वर्षो की मेहनत छिपी होती है।
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एक-एक इंच जमीन पर खेती करनी होगी : डॉ. अरुण तोमर

केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविका नगर (राजस्थान) के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने किसानों को समेकित कृषि अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बीज से बाजार तक किसानों को ध्यान देना होगा। खेती करें, पशु पालें, एक-एक इंच जमीन से उत्पादन लेना होगा, तभी हम श्रेष्ठ बन सकेंगे।
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20 दिन के प्रशिक्षण के बाद युवा शुरू करें स्टार्टअप : डॉ. गौतम

आईसीएआर नई दिल्ली के उप महानिदेशक (कृषि प्रसार), डाॅ. उधम सिंह गौतम ने कहा कि भारत में 731 कृषि विज्ञान केंद्र हैं जिनके माध्यम से सरकार कृषि क्षेत्र की नवीनतम प्रौद्योगिकियों एवं तकनीकियों को किसानों के दरवाजे तक पहुंचाने का अथक प्रयास कर रही है। महिलाओं की 49 प्रतिशत आबादी है, उन्हें कृषि में शामिल करना जरूरी है। इसलिए सरकार ने हर केवीके में गृह विज्ञान को लेकर पोस्टिंग की है। युवाओं को खेती से जोड़ने के लिए आयार योजना शुरू की है। वह 20 दिन के प्रशिक्षण के बाद स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। सुझाव दिया कि युवाओं, उद्यमियों के साथ बैठक करें, कुछ बजट उपलब्ध कराएंगे ताकि तकनीक किसानों तक पहुंचे। मुख्य अतिथि डॉ. बीएन त्रिपाठी, निदेशक डॉ.धीर सिंह व सभी विशिष्ट अतिथियों ने एक डेरी स्माधरिका, संस्थान की राजभाषा गृह पत्रिका ‘’दुग्ध गंगा’’ व एक काव्य संग्रह का विमोचन किया।
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