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Karnal News: निगम ने नहीं लिया सबक गोशाला में अब भी अंधेरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 May 2023 02:35 AM IST
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The corporation did not take a lesson, still dark in the cowshed
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। गणतंत्र दिवस की रात नगर निगम की फूसगढ़ गोशाला में एक साथ जहर खिलाकर 45 गायों को मारने की वारदात होने के बाद भी नगर निगम की नींद नहीं टूटी है। भले ही इस मामले में पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया लेकिन अंधेरे का लाभ उठाकर साइड से टूटी दीवारों के सहारे ही जहर देने के आरोपी गोशाला में दाखिल हुए थे।

वारदात को तीन माह से अधिक का समय बीतने के बाद गोशाला में पर्याप्त लाइटों की व्यवस्था नहीं की गई है। अभी गोशाला में अंधेरा रहता है। जिससे कोई भी आरोपी गोशाला में दाखिल हो सकता है। 26 जनवरी की रात कुछ आरोपियों ने फूसगढ़ की गोशाला-नंदी ग्राम में घुसकर 45 गायों को जहर दे दिया था। 27 जनवरी की सुबह को ये सभी गायें मृत मिली थीं।
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इसकी जांच के लिए हरियाणा सरकार ने मंडलायुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की थी। पहले तो ये माना गया कि हरी घास जहरीली थी, लेकिन बाद में पुलिस ने खुलासा किया कि हड्डी व खाल की तस्करी करने वाले गिरोह ने वारदात को अंजाम दिया था। जांच में गोशाला प्रबंधक व गोशाला के कर्मचारियों की लिप्तता से पुलिस ने इनकार कर दिया। उच्च स्तरीय जांच कमेटी भी सरकार को अंतरिम रिपोर्ट भेजने तक सीमित रही। पुलिस ने अब तक इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
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मामले की जांच तो अभी भी चल रही है, क्योंकि अभी कई सवाल अनसुलझे हैं। आरोपियों के जिले की कितनी गोशाला से तार जुड़े थे, गोशाला का कोई कर्मचारी तो शामिल नहीं है।


ये बताया गया कि आरोपी हड्डी व खाल को पंजाब में ले जाकर बेचते थे, लेकिन किसको बेचते थे, उसका कोई पता नहीं चला।

इधर, गोशाला में 45 गायों की मौत के बाद भी रोजाना कई दिनों तक चार से पांच गायों की मौत का सिलसिला जारी रहा। हालांकि इसके बाद नगर निगम ने प्रबंधक संस्था को ब्लैकलिस्ट कर दिया। प्रबंधक ने भी पद छोड़ दिया। अब नगर निगम ही गोशाला की व्यवस्था संभाल रहा है। चारे आदि की तो अब दिक्कत नहीं है, लेकिन निगम ने वारदात से कोई सबक लिया है, यदि लिया होता तो गोशाला के अंदर व गोशाला जाने वाले प्रमुख रास्तों पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था जरूर की होती।
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