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Karnal News: कंपनी को उठाना चाहिए वाहन की मरम्मत का पूरा खर्च

Sun, 15 Feb 2026 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sun, 15 Feb 2026 12:57 AM IST
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The company should bear the entire cost of repairing the vehicle.
करनाल।
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रजनी सिंगला बनाम पॉलिसी बाजार और अन्य के मामले में सुनवाई की। मामला कार दुर्घटना के बाद बीमा कंपनी की ओर से पूरे क्लेम का भुगतान नहीं किए जाने से जुड़ा था। आयोग ने कहा कि जब वाहन का बीमा ऑल रिस्क पॉलिसी के तहत था तो कंपनी को पूर्ण मरम्मत का खर्च उठाना चाहिए।

मोती नगर निवासी शिकायतकर्ता रजनी सिंगला ने अपनी गाड़ी महिंद्रा केयूवी 100 कार का बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से करवाया था। 30 मई, 2023 को मेरठ रोड, करनाल पर हादसा हुआ। इसमें कार के अगले और पिछले हिस्से में काफी नुकसान हुआ। शिकायतकर्ता ने कार की मरम्मत कार लवर्स क्लब से कराई थी, इसमें कुल 11 हजार 546 रुपये का खर्च आया। सर्वेक्षक ने केवल छह हजार 316 रुपये के क्लेम को मंजूरी दी और पिछले हिस्से (रियर बंपर) के नुकसान के खर्च को कवर करने से इनकार कर दिया।
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शिकायतकर्ता रजनी सिंगला ने बकाया चार हजार 230 रुपये, मानसिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये की मांग करते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
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आयोग के समक्ष पॉलिसी बाजार ने तर्क दिया कि वह केवल एक सुविधा प्रदाता हैं और क्लेम को मंजूरी देने या खारिज करने की जिम्मेदारी पूरी तरह बीमा कंपनी की है। बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि उन्होंने सर्वेक्षक की रिपोर्ट के आधार पर क्लेम का उचित निपटान कर दिया है और सेवा में कोई कमी नहीं की है। इसके अलावा वर्कशॉप के अधिवक्ता ने पक्ष रखा कि वर्कशॉप ने केवल मरम्मत का काम किया है और उन्हें इस विवाद में अनावश्यक रूप से घसीटा गया है।
कानूनी कार्रवाई पर खर्च भी बीमा कंपनी को देना होगा
आयोग ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और मामले के दस्तावेज, जैसे बीमा पॉलिसी और मरम्मत के बिलों का बारीकी से निरीक्षण किया। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी की ओर से पिछले हिस्से के नुकसान को क्लेम से बाहर रखना गलत था, जबकि सर्वेक्षक पहले इसके लिए मौखिक रूप से सहमत हो गया था। आयोग ने बीमा कंपनी को बकाया चार हजार 230 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया। कानूनी कार्रवाई में हुए खर्च की भरपाई भी बीमा कंपनी को ही करनी होगी।

पॉलिसी बाजार के खिलाफ शिकायत खारिज
आयोग ने पॉलिसी बाजार और मरम्मत करने वाली वर्कशॉप के खिलाफ शिकायतों को खारिज कर दिया, क्योंकि क्लेम का निपटान बीमा कंपनी का दायित्व था। आयोग ने टिप्पणी कि बीमा कंपनी का यह तर्क कि पिछला नुकसान कवर नहीं है, अनुचित है। जब वाहन का बीमा ऑल रिस्क पॉलिसी के तहत था, तो कंपनी को पूर्ण मरम्मत का खर्च उठाना चाहिए था।
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