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शहर में आम हुआ जाम

Sat, 30 Nov 2013 11:35 PM IST
करनाल
करनाल Updated Sat, 30 Nov 2013 11:35 PM IST
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The city was jammed in common
करनाल शहर के मुख्य बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण शहर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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शहर के लोग इस परेशानी से बचने के लिए काफी हद तक पुलिस प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के साथ क्षेत्र की विधायक को भी जिम्मेदार मान रहे हैं। लोगों का कहना है प्रशासन दूरदृष्टि से शहर की प्लानिंग करता तो संभवत: लोगों को अब पार्किंग नहीं होने के परेशानियां नहीं झेलनी पड़तीं।

यहां सब कुछ उल्टा हो रहा है। लोगों की सुविधा के लिए बनाई गई पार्किंग पर शुल्क वसूला जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों और विधायक के ठोस प्रयासों के बिना लोगों को राहत मिलना संभव नहीं लगता। शहर के मुगल केनाल के सेक्टर 14 पुल से लेकर सब्जी मंडी, महावीर चौक, घंटाघर चौक, रेलवे रोड से रेलवे स्टेशन तक करीब तीन किलोमीटर के सीधे डबल रोड पर भी पूरा दिन जाम की स्थिति बनी रहती है।
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कोई भी वाहन सेक्टर 14 पुल से लेकर घंटाघर चौक की एक किलोमीटर की दूरी तय करने में 10 से 15 मिनट में लगाता है। हर वाहन जाम में किसी भी समय फंसा देखा जा सकता है। ऐसा ही हाल कर्ण गेट से सर्राफा बाजार और चौड़ा बाजार का है। घंटाघर चौक से लेकर बस अड्डे तक लोगों को परेशानियों से दो चार होना पड़ता है। सब्जी मंडी चौक से लेकर अस्पताल चौक तक लोगों की खूब फजीहत होती है।
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शहर के रामसिंह, जयसिंह, तिलकराज, पंडित सुरेंद्र शर्मा समेत कई लोगों का कहना है अधिकारियों को जनता की कोई परवाह नहीं है। पिछले करीब दस साल से अधिक समय से लोग जाम की समस्या में रोजाना फंसने की समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों की शिकायतों के बाद प्रशासन थोड़ा बहुत सतर्क होता है।

दो चार दिन बाद फिर वही पुराना हाल हो जाता है। जाम से निपटने का कोई ठोस हल नहीं है। सरकार ने सब्जी मंडी चौक से लेकर घंटाघर चौक तक सड़क पर खडे़ किए जाने वाले वाहनों से ही पैसा वसूलना प्रारंभ कर दिया है। लोग गाड़ियों का रोड टैक्स भरते हैं।

सड़क पर गाड़ी खड़ी करने के नाम पर देश भर में कहीं पार्किंग फीस नहीं वसूली जाती। करनाल में अलग कानून प्रयोग किया जा रहा है। अलग से पार्किंग कराई जाए तो फीस लेनी चाहिए। इसके लिए लोग भी तैयार होंगे। यहां जबरदस्ती वाली बात है। लोग मजबूर हैं।

प्रशासन और विधायक जिम्मेदार
भाजपा के जिला उपाध्यक्ष दीपक धवन ने कहा कि इसके लिए प्रशासन और विधायक जिम्मेदार हैं। शहर के लोगों की सुविधा का ध्यान रखने के लिए विधायक की जिम्मेदारी बनती है।

विधायक ने कभी पार्किंग बनवाने की ओर ध्यान नहीं दिया। विधायक प्रयास करतीं तो संभवत: दिक्कत नहीं आती और लोगों को पार्किंग की सुविधा भी मिलती लेकिन ऐसा नहीं किया गया। प्रशासन की ओर छह महीने के लिए सड़क को ही ठेके पर देकर करीब पांच लाख रुपये कमा लिए गए।

सड़क पर पार्किंग नहीं होती। विशेष स्थान पर पार्किंग बनाई जाती है। हमेशा गेट के भीतर गाड़ी पार्क कराने के बाद फीस ली जाती है। यहां सड़क पर ही फीस वसूली जा रही है। शुरुआत पर यह सुविधा लोगों को मुफ्त दी गई थी। अब पैसा वसूला जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

लोगों के लिए काम कर रही पुलिस
डीएसपी जोगेंद्र सिंह राठी ने बताया कि शहर में जाम की स्थिति नहीं बने, इसके लिए पुलिस पूरा प्रयास करती है। हर चौक पर पुलिस तैनात की जाती है।

गाड़ियों को गलत पार्क नहीं होनेे देते लेकिन बढ़ती आबादी और गाड़ियों की संख्या से भी काफी दिक्कत बढ़ रही है। इसके बावजूद पुलिस लोगों के पक्ष में काम कर रही है। समस्याओं का जल्द समाधान करेंगे।

पुलिस बर्बरता के खिलाफ प्रदर्शन आज
करनाल में प्रदेश में बढ़ती पुलिस बर्बरता की घटनाआें पर चिंता जाहिर करते हुए विधिक एवं सामाजिक सुधाराें के लिए आंदोलनरत फाइट फॉर जस्टिस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एडवोकेट हरीश आर्य ने क्लब कार्यालय में बैठक ली।

मौके पर उन्होंने कहा कि पुलिस बर्बरता की सारी सीमाएं लांघ चुकी है लेकिन दु:ख की बात है कि सारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं मूक बधिर बनी हुई हैं।

नागरिकाें से बदतमीजी से पेश आना, झूठे मुकदमे दर्ज व सच्ची शिकायत दर्ज न करना, गैर कानूनी वसूली करना, तफतीश के नाम पर नागरिक अधिकारों का हनन करना, अवैध हिरासत में रखना, गिरफ्तारी की सूचना वारसान को न देना, धाराओं का गलत प्रयोग करना, अपराधियों के साथ सांठगांठ रखना, थर्ड डिग्री टॉर्चर करना और अपराध के आंकड़े कम दिखाने के नाम पर एफआईआर दर्ज नहीं करना पुलिस दिनचर्या का एक चरित्र बन चुका है।

जन प्रतिनिधियों ने अपने निजी हित साधने मात्र के लिए बर्बर पुलिस को अधिकाराें का हनन करने के लिए खुला व अनियंत्रित छोड़ा हुआ है। न्यायालयों के काम के बोझ तले दबे होने का कारण तो समझ आता है लेकिन मानवाधिकार आयोग लकवाग्रस्त है, यह समझ से परे की बात है।


हाथ पर हाथ धरे बैठने का समय नहीं है। अपने अधिकारों का हनन रोकने के लिए नागरिकाें को एकजुट होकर संघर्ष करना पड़ेगा। रविवार को शहरभर में प्रदर्शन होगा, जो कर्ण गेट से प्रारंभ होगा और आगामी सप्ताह में शैक्षणिक संस्थाआें के साथ मिलकर प्रदर्शन किया जाएगा।
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