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खेतों से निकल शहर में घुसा ‘भूरा फुदका’
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204: बरसात के दिनों में पैदा होने वाले कीड़े। प्रतिकात्मक फोटो
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करनाल। बारिश, उमस व धूप की वजह से धान के खेतों में पनपे भूरा फुदका (ब्राउन प्लांट हॉपर) कीटों की संख्या काफी बढ़ गई है। धान के पौधे के तने के साथ ही इनकी संख्या हजारों के हिसाब से है। खेतों से निकले इन कीटों ने टिड्डी दल की तरह शहर व गांवों में लोगों के लिए परेशानी पैदा कर दी है। शाम को सड़कों पर ये सबसे बड़ी चुनौती वाहन चालकों के लिए बन जाते हैं। एकाएक इनके आंखों में आने पर हादसे का खतरा होता है।
घर की जालियों को पार कर घुस जाते हैं अंदर
ये जीव घरों में खिड़की-दरवाजों पर लगी जाली को पार कर अंदर घुस जाते हैं। टीवी स्क्रीन व लाइट के आगे, खाने-पीने की चीजों पर गिर जाते हैं। रोशनी पर आकर्षित होने के कारण शहर में लगी तमाम लाइटों पर शाम को ये कीट बड़ी संख्या में नजर आते हैं। होटल, ढाबा, दुकान सहित हर जगह इनका प्रकोप बढ़ चुका है। बिना शीशे वाले वाहनों के चालकों, दोपहिया वाहन चालकाें व ट्रैक्टर चालकों का शाम को सड़कों पर चलना मुश्किल कर दिया है।
धान को भी पहुंचाता है क्षति
गन्ना प्रजनन केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक कीट विज्ञान डा. एसके पांडेय ने बताया कि धान के तने पर इनकी बहुत अधिक संख्या पाई जा रही है। यह कीट पत्तियों पर नहीं बैठता। इनका प्रकोप अगस्त से बढ़ा है। धान के पौधे पर जहां पत्तियों का पर्ण कंचूक होता है वहां ये लगातार रस चूसते हैं। रस चूसने के दौरान अपने मलद्वार से चीनी का घोल गिराते हैं। उस घोल पर काले फफूंद की वृद्धि हो जाती है। इस कारण खेत में पैच के रूप में धान में हॉपर बर्न हो जाता है। पौधे पीले पड़ जाते हैं। नतीजन बालियां कम निकलती हैं और नुकसान होता है।
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ये करें उपाय
डा. पांडेय ने बताया कि इन कीड़ों का स्वभाव प्रकाश स्रोत पर जाना है। इसलिए शाम को दो-तीन घंटे घर के बाहर की लाइट बंद रखें। प्रकाश स्रोत के नीचे किसी चौड़े टब में पानी भरकर उसमें सर्फ या सैंपू या कोई तेल डाल दें। कीट गिरकर मर जाएंगे। धान के खेत में प्रकाश प्रपंच लगा दें। टब में पानी भरकर उसमें थोड़ा सा डीजल डाल दें। कीट उसमें गिरकर मर जाएंगे। हर दिन लगातार पानी बदलते रहें। इससे कीट उड़कर सड़कों पर नहीं आ पाएंगे।
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घर की जालियों को पार कर घुस जाते हैं अंदर
ये जीव घरों में खिड़की-दरवाजों पर लगी जाली को पार कर अंदर घुस जाते हैं। टीवी स्क्रीन व लाइट के आगे, खाने-पीने की चीजों पर गिर जाते हैं। रोशनी पर आकर्षित होने के कारण शहर में लगी तमाम लाइटों पर शाम को ये कीट बड़ी संख्या में नजर आते हैं। होटल, ढाबा, दुकान सहित हर जगह इनका प्रकोप बढ़ चुका है। बिना शीशे वाले वाहनों के चालकों, दोपहिया वाहन चालकाें व ट्रैक्टर चालकों का शाम को सड़कों पर चलना मुश्किल कर दिया है।
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धान को भी पहुंचाता है क्षति
गन्ना प्रजनन केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक कीट विज्ञान डा. एसके पांडेय ने बताया कि धान के तने पर इनकी बहुत अधिक संख्या पाई जा रही है। यह कीट पत्तियों पर नहीं बैठता। इनका प्रकोप अगस्त से बढ़ा है। धान के पौधे पर जहां पत्तियों का पर्ण कंचूक होता है वहां ये लगातार रस चूसते हैं। रस चूसने के दौरान अपने मलद्वार से चीनी का घोल गिराते हैं। उस घोल पर काले फफूंद की वृद्धि हो जाती है। इस कारण खेत में पैच के रूप में धान में हॉपर बर्न हो जाता है। पौधे पीले पड़ जाते हैं। नतीजन बालियां कम निकलती हैं और नुकसान होता है।
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ये करें उपाय
डा. पांडेय ने बताया कि इन कीड़ों का स्वभाव प्रकाश स्रोत पर जाना है। इसलिए शाम को दो-तीन घंटे घर के बाहर की लाइट बंद रखें। प्रकाश स्रोत के नीचे किसी चौड़े टब में पानी भरकर उसमें सर्फ या सैंपू या कोई तेल डाल दें। कीट गिरकर मर जाएंगे। धान के खेत में प्रकाश प्रपंच लगा दें। टब में पानी भरकर उसमें थोड़ा सा डीजल डाल दें। कीट उसमें गिरकर मर जाएंगे। हर दिन लगातार पानी बदलते रहें। इससे कीट उड़कर सड़कों पर नहीं आ पाएंगे।