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Karnal News: फर्जी नामों पर सब्सिडी हड़पने के मामले में आरोपी पक्ष आया सामने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Sep 2023 02:11 AM IST
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The accused party came forward in the case of grabbing subsidy in fake names
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुंजपुरा। किसान उत्पादक कंपनी रजिस्टर्ड करा कर करोड़ों रुपए की सब्सिडी हड़पने के आरोप लगने के बाद शुक्रवार को आरोपी पक्ष भी सामने आया। आरोपी पक्ष ने जहां सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस पूरे प्रकरण के पीछे शिकायतकर्ता पक्ष से जुड़े कुछ लोगों की राजनीतिक मंशा होना बताया।
दूसरी तरफ पीड़ित पक्ष ने अपने आरोपों को सही ठहराते हुए मामला दर्ज किए जाने मांग दोहराई। बागवानी विभाग हरियाणा के निदेशक डॉक्टर अर्जुन सिंह सैनी ने डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर बिल्लू यादव की अध्यक्षता मेंं जांच कमेटी गठित कर दी। बागवानी अधिकारियों ने बागवानी विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की सब्सिडी जारी करने एवं 50 लाख रुपए का लोन स्वीकृत किए जाने के आरोपों को नकारते हुए कहा कि अभी तक न कोई सब्सिडी जारी हुई न किसी तरह का लोन स्वीकृत किया गया है।
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केवल प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। निदेशक डॉक्टर अर्जुन सैनी ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में केवल यह मुद्दा ही जांच का विषय है कि किसान कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड करवाई गई फर्म में 159 किसानों को सदस्य बनाते समय उनके निजी दस्तावेजों का प्रयोग करने की संबंधित किसानों से सहमति ली गई या नहीं।
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उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि फर्म के सभी डायरेक्टरों ने फर्म का रजिस्ट्रेशन करवाने की लिए किसानों के दस्तावेजों को उनकी सहमति के बिना फाइल में सूचीबद्ध करवाने या लगाए जाने का आरोप सत्य पाया गया तो सख्त एक्शन लिया जाएगा। जिसके तहत आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करते हुए प्राथमिकी दर्ज करवाई जाएगी। किसी किसान के पास सब्सिडी जारी करने एवं लोन स्वीकृत होने के पुख्ता कोई प्रमाण है तो वह जांच अधिकारी के सम्मुख प्रस्तुत कर सकता है। उधर इस मामले में जांच टीम ने पूछताछ एवं जांच कार्य शुरू कर दिया।
जांच कमेटी के अध्यक्ष डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर बिल्लू यादव ने बताया कि उन्होंने सूचना भेज कर शिकायतकर्ता पक्ष को विभाग के जिला कार्यालय में बुलाया था। जहां उनसे पूछताछ करते हुए उनके बयान लिए गए। दूसरी तरफ कुंजपुरा थाना प्रभारी तरसेम ने बताया कि बागवानी विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है। अब तक की गई प्राथमिक जांच में करोड़ों रुपए सब्सिडी हड़पने जैसा कोई तथ्य अभी तक उनके सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने के बाद ही सब कुछ क्लियर हो पाएगा।


शिकायतकर्ता संजीव कुमार की शिकायत पर इस चर्चित मामले की दोबारा जांच शुरू हो गई है। इससे कुछ दिन पूर्व भी मामले की जांच की गई थी लेकिन उसमें शिकायतकर्ता पक्ष संतुष्ट नहीं हो पाया था। इसके बाद विभाग के प्रदेश मुख्यालय से अब स्पेशल जांच टीम गठित की गई है।


बागवानी विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना कि अब तक केवल प्रोजेक्ट ही मंजूर हुआ है। इसमें किसी तरह की कोई सब्सिडी जारी नही की गई। न कोई लोन स्वीकृत किया गया है।इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी नियम एवं शर्तें पूरी होने के बाद वीडियोग्राफी करवा कर नियमानुसार विभागीय सुविधा हासिल की जा सकती है।




नियम : फॉर्मर कंपनी एक्ट के तहत इस तरह की कंपनी रजिस्टर्ड करवाने में यह जरूरी नियम है कि फर्म के 90 प्रतिशत सदस्य एक ही कलस्टर से संबंधित होने चाहिए।इस संख्या की शर्त पूरी न होने पर फर्म को संबंधित विभाग से कोई सब्सिडी एवं ग्रांट नही मिल सकती। सभी सदस्यों की आईडी की जांच की जाती है।
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