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Karnal News: तापमान के उतार-चढ़ाव से गेहूं की फसल पर खतरा, वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Feb 2026 01:27 AM IST
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Temperature fluctuations threaten wheat crop, scientists issue advisory
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से मौसम के बदलते रुख ने गेहूं उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दिन के तापमान में लगातार बढ़ोतरी और रात में नमी बने रहने से गेहूं की फसल में रोग लगने का खतरा बढ़ गया है। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान ने रबी सीजन को लेकर विशेष कृषि एडवाइजरी जारी की है, जिसमें किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जिले में इस समय अधिकतम तापमान 24 से 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है जबकि रात का तापमान 10 से 11 डिग्री के आसपास बना हुआ है। यह स्थिति गेहूं की फसल में पीली रतुआ, भूरी रतुआ, झुलसा रोग और पत्ती धब्बा जैसे रोगों के फैलाव के लिए अनुकूल मानी जा रही है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने बताया कि करनाल और आसपास के क्षेत्रों में पीली रतुआ रोग का खतरा सबसे अधिक बना हुआ है। अगर समय रहते इसकी पहचान नहीं हुई तो यह रोग कुछ ही दिनों में पूरी फसल को चपेट में ले सकता है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि देरी से लगाई गई फसल पर रोग का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
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किसानों के लिए जरूरी सावधानियां :

- रोजाना खेतों का निरीक्षण करें किसान।

- पत्तियों पर पीले या भूरे रंग की धारियां या धब्बे दिखें तो तुरंत उपचार करें।

- जरूरत से ज्यादा यूरिया का प्रयोग न करें।

- सिंचाई संतुलित मात्रा में करें और खेत में जलभराव न होने दें।
- रोगग्रस्त पत्तियों को नष्ट करें ताकि संक्रमण न फैले।

- पीली व भूरी रतुआ के लिए प्रोपिकोनाजोल, टेबुकोनाजोल या इनके मिश्रण का छिड़काव करें।
- छिड़काव सुबह या शाम के समय करें और हवा तेज होने पर स्प्रे न करें।

- आवश्यकता पड़ने पर 10-15 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है।



किसान समय रहते करें दवा का छिड़काव : रतन

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक रतन तिवारी ने बताया कि पीली और भूरी रतुआ रोग की स्थिति में प्रोपिकोनाजोल या टेबुकोनाजोल युक्त फफूंदनाशक का छिड़काव सुबह-शाम किया जा सकता है। अगर किसान समय रहते रोग की पहचान कर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार दवा का प्रयोग करें तो फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
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