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Karnal News: प्रयोगशाला से खेतों तक पहुंची तकनीक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 01:18 AM IST
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Technology that reached from the laboratory to the fields
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। मौसम में बदलाव, बेमौसम बारिश और सूखे जैसी चुनौतियों के बीच वैज्ञानिक अनुसंधान कृषि क्षेत्र के लिए नई उम्मीद बना है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) प्रयोगशालाओं में विकसित फसल किस्मों और उन्नत तकनीकों को किसानों तक पहुंचा रहा है। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, फसल नुकसान कम करना और खेती को बदलती परिस्थितियों के अनुकूल बनाना है।
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में कृषि अनुसंधान से 55 हजार करोड़ रुपये का योगदान मिला। इससे फसलों, बागवानी, पशुधन और मत्स्य पालन के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। कुल 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य पैदा हुआ। पिछले वर्ष 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की गईं। इनमें 94 फीसदी किस्में जलवायु अनुकूल हैं। 29 किस्में पोषण संवर्धन यानी बायोफोर्टिफिकेशन से जुड़ी हैं। जलवायु अनुकूल किस्में प्रतिकूल मौसम में फसल की सहनशीलता बढ़ाती हैं। पोषण संवर्धित किस्में खाद्यान्न में पोषक तत्वों की मात्रा बेहतर बनाती हैं। कृषि अनुसंधान का लक्ष्य अब खाद्य और पोषण सुरक्षा से भी जुड़ा है।
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किसानों तक पहुंची तकनीक

आईसीएआर के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान उसकी वैज्ञानिक तकनीकें करीब एक करोड़ किसानों तक सीधे पहुंचीं। मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसानों तक भी जानकारी पहुंचाई गई। नई किस्मों का लाभ तभी मिलेगा जब किसानों को प्रमाणित बीज मिलें। उन्हें खेती के सही तरीके की जानकारी भी आवश्यक है। कृषि विज्ञान केंद्र इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
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स्थानीय परिस्थितियों का महत्व

डॉ. जाट ने बताया कि खेती में सही किस्म का चयन महत्वपूर्ण है। मिट्टी, तापमान और सिंचाई की उपलब्धता फसल के प्रदर्शन को प्रभावित करती है। हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल किस्मों पर जोर है। पानी के बेहतर इस्तेमाल और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन से किसानों को मदद मिलेगी। यह खेती को अधिक टिकाऊ बनाएगा।
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