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करवा चौथ : रात 8:09 बजे होगा चंद्रोदय
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। करवा चौथ का पर्व 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा। सुहागिन पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने और पूजा-अर्चना करने के पश्चात किया जाता है।
करवा चौथ के दिन करवा माता के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा करने का विधान है। महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
भद्रा की स्थिति
श्री श्याम बालाजी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, इस बार भद्रा 28 अक्तूबर की सुबह 5:31 बजे शुरू होकर 29 अक्तूबर की सुबह 4:27 बजे तक समाप्त होगी। भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। ऐसी स्थिति में भद्रा काल समाप्त होने के बाद सुबह सरगी ग्रहण करने और दिनभर पूजा-पाठ व धार्मिक अनुष्ठान करने में भद्रा से संबंधित बाधा की आशंका नहीं रहेगी।
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चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 29 अक्तूबर, सुबह 1:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त : 29 अक्तूबर, रात 10:09 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 5:38 से शाम 6:56 बजे तक
चंद्रोदय का संभावित समय : रात 8:09 बजे
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करनाल। करवा चौथ का पर्व 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा। सुहागिन पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने और पूजा-अर्चना करने के पश्चात किया जाता है।
करवा चौथ के दिन करवा माता के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा करने का विधान है। महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
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भद्रा की स्थिति
श्री श्याम बालाजी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, इस बार भद्रा 28 अक्तूबर की सुबह 5:31 बजे शुरू होकर 29 अक्तूबर की सुबह 4:27 बजे तक समाप्त होगी। भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। ऐसी स्थिति में भद्रा काल समाप्त होने के बाद सुबह सरगी ग्रहण करने और दिनभर पूजा-पाठ व धार्मिक अनुष्ठान करने में भद्रा से संबंधित बाधा की आशंका नहीं रहेगी।
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चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 29 अक्तूबर, सुबह 1:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त : 29 अक्तूबर, रात 10:09 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 5:38 से शाम 6:56 बजे तक
चंद्रोदय का संभावित समय : रात 8:09 बजे