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बिना अनुमति के ही लगा संडे बाजार, पुलिस ने जमकर हड़काया
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अनलॉक 1.0 को शुरू हुए बीस दिन हो गए, लेकिन जिला प्रशासन ने संडे बाजार को खोलने की इजाजत नहीं दी है। यहां दुकान लगाने वाले गुजराती दुकानदारों के आगे भुखमरी की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे परेशान होकर रविवार को करीब सौ से अधिक दुकानदारों ने बिना प्रशासनिक अनुमति के ही बाजार में दुकानों को लगा लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने 50 से अधिक दुकानोें को जबरन हटवा दिया। इसके बावजूद कई दुकानदार हटने को राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि अब भूखों मरने की नौबत आ रही है, ऐसे में दुकानों को बंद नहीं कर सकते।
संडे बाजार को गरीबों का बाजार कहा जाता है। आजादी से भी पहले गुजरात से करीब तीन चार सौ परिवार करनाल आकर बस गए थे। यह सभी परिवार सप्ताह के छह दिन रेहड़ी, टैंपों आदि से बर्तन लेकर आवासीय कालोनियों में जाते हैं। बर्तनों के बदले वह धनाढ्य परिवारों से पुराने कपड़े लेते हैं। इन्हीं पुराने कपड़ों को धोकर, इस्तरी करने के बाद वह रविवार को सेक्टर-12 में पेट्रोल पंप के पास संडे बाजार में बेचते हैं, जिससे उनके परिवार का गुजारा होता है, लेकिन लॉकडाउन में संडे मार्केट बंद होने से इन परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। जब पूरा बाजार और सब्जी मंडी भी खुल गयी तो ये दुकानदार अनुमति के लिए उपायुक्त कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। दुकानदारों का कहना है कि जिला प्रशासन संडे बाजार खोलने की इजाजत नहीं देने का कारण भी बताने को तैयार नहीं है। ऐसे में थक हारकर करीब सौ से अधिक दुकानदारों ने बिना प्रशासनिक अनुमति के ही संडे बाजार में दुकानें लगा दीं। कुछ दुकानों को पुलिस ने हटा दिया जबकि अन्य का कहना था कि जब तक प्रशासन की ओर से उनके परिवारों के खाने पीने की व्यवस्था नहीं की जाती वो दुकानें लगाएंगे। इसके बाद शाम तक दुकानें लगी रहीं।
-जब सभी बाजार खुल गए तो सप्ताह में सिर्फ एक दिन लगने वाले बाजार को जिला प्रशासन इजाजत क्यों नहीं दे रहा है। आज बाहरी दुकानदार तो आए नहीं, ग्राहकों को बाजार खुलने की जानकारी भी नहीं है, इसलिए भीड़ तो थी ही नहीं लेकिन इसके बावजूद दुकानों को दूर दूर लगाकर सामाजिक दूरी का पालन किया गया है। जिला प्रशासन आखिर बताए तो क िक्यों संडे बाजार को खोलने की अनुमति नहीं दे रहा है।
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-मनोज कुमार, दुकानदार संडे बाजार करनाल।
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संडे बाजार को गरीबों का बाजार कहा जाता है। आजादी से भी पहले गुजरात से करीब तीन चार सौ परिवार करनाल आकर बस गए थे। यह सभी परिवार सप्ताह के छह दिन रेहड़ी, टैंपों आदि से बर्तन लेकर आवासीय कालोनियों में जाते हैं। बर्तनों के बदले वह धनाढ्य परिवारों से पुराने कपड़े लेते हैं। इन्हीं पुराने कपड़ों को धोकर, इस्तरी करने के बाद वह रविवार को सेक्टर-12 में पेट्रोल पंप के पास संडे बाजार में बेचते हैं, जिससे उनके परिवार का गुजारा होता है, लेकिन लॉकडाउन में संडे मार्केट बंद होने से इन परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। जब पूरा बाजार और सब्जी मंडी भी खुल गयी तो ये दुकानदार अनुमति के लिए उपायुक्त कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। दुकानदारों का कहना है कि जिला प्रशासन संडे बाजार खोलने की इजाजत नहीं देने का कारण भी बताने को तैयार नहीं है। ऐसे में थक हारकर करीब सौ से अधिक दुकानदारों ने बिना प्रशासनिक अनुमति के ही संडे बाजार में दुकानें लगा दीं। कुछ दुकानों को पुलिस ने हटा दिया जबकि अन्य का कहना था कि जब तक प्रशासन की ओर से उनके परिवारों के खाने पीने की व्यवस्था नहीं की जाती वो दुकानें लगाएंगे। इसके बाद शाम तक दुकानें लगी रहीं।
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-जब सभी बाजार खुल गए तो सप्ताह में सिर्फ एक दिन लगने वाले बाजार को जिला प्रशासन इजाजत क्यों नहीं दे रहा है। आज बाहरी दुकानदार तो आए नहीं, ग्राहकों को बाजार खुलने की जानकारी भी नहीं है, इसलिए भीड़ तो थी ही नहीं लेकिन इसके बावजूद दुकानों को दूर दूर लगाकर सामाजिक दूरी का पालन किया गया है। जिला प्रशासन आखिर बताए तो क िक्यों संडे बाजार को खोलने की अनुमति नहीं दे रहा है।
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-मनोज कुमार, दुकानदार संडे बाजार करनाल।