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Karnal News: ऐसा तंत्र बने...बेटी को समय पर मदद मिले
Sat, 23 Aug 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 23 Aug 2025 01:22 AM IST
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मनीषा हत्याकांड पर बुजुर्ग महिलाओं ने जताई चिंता, बोलीं-बेटियों को बाहर भेजने से लग रहा डर
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
मनीषा हत्याकांड ने महिला समाज को झकझोर कर रख दिया है। बेटियों की सुरक्षा के लिए बुजुर्ग महिलाएं चिंतित हैं। वह तुलनात्मक रूप से आज के समाज को अधिक असुरक्षित बताती हैं। इस घटना को समाज के लिए शर्मनाक बताते हुए बोलीं कि पहले गांव में बेटियां सुरक्षित महसूस करती थीं, लेकिन आज हालात इतने बिगड़ गए हैं कि परिवार अपनी बेटियों को अकेले भेजने से भी डरने लगे हैं। बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि यह घटना केवल एक परिवार या उसकी बेटी से नहीं, बल्कि पूरे समाज से अन्याय है। उनका कहना है कि जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी और कानून का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक बेटियां सुरक्षित नहीं हो सकतीं। हमें ऐसा तंत्र विकसित करना होगा कि बेटियां सुरक्षित महसूस करें और सुरक्षित रहें। मदद की आवश्यकता पर उन तक समय रहते सहायता पहुंच सके। कोई भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई हो।
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बेटियों को बाहर भेजने से लग रहा डर
फोटो-151
-आनंद विहार निवासी रामप्यारी देवी ने हालात को बहुत खराब बताया। बोलीं कि पहले के समय में बेटियां खेतों में अकेली भी काम कर लिया करती थीं, कोई गलत निगाह तक नहीं उठाता था। लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बेटियों को बाहर भेजते हुए चिंता महसूस होती है। गांव की सोच में काफी बदलाव आ रहे है। ऐसी घटनाओं को होते देख लड़कियों को घरों से निकलने पर अंकुश उचित नहीं है। हमें उनकी सुरक्षा के लिए और जागरूक होना होगा। आज की जरूरत को देखते हुए जरूरी है कि बेटियां आत्मनिर्भर बनें जिसके लिए उन्हें सही सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
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पहले प्रशासन मजबूत हुआ करता था
फोटो-152
वसंत बिहार निवासी मीनू देवी बोलीं कि मनीषा प्रकरण को सुन कर रूह कांप गई थी। अपनी मां-बहन और बेटियों को खोने का दर्द प्रदेश में हर कोई महसूस कर पा रहा होगा। पहले के समय में प्रशासन मजबूत हुआ करता था लेकिन आज हालात कमजोर होते दिख रहे हैं। हमें संवेदनशीलता को और बढ़ाना होगा। किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। जिससे कोई अपराधी बच नहीं पाए। शिकायत आती है तो प्रशासन का कर्तव्य होना चाहिए की वह बिना किसी बहाने के कार्रवाई करें।
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माता-पिता की बढ़ रही है चिंता
फोटो-153
वसंत विहार की रहने वाली सुशीला रानी का कहना है कि आज के समय में माता-पिता चिंता में रहते हैं जब उनकी बेटी पढ़ने या नाैकरी के लिए बाहर जाती है। पहले के समय में गांवों में घरों के दरवाजे बिना किसी डर के खुले रहते थे लेकिन अब गलियों में भी बेटियों को निकलने के लिए मना कर दिया जाता है। मनीषा प्रकरण जैसी घटनाओं से बेटियों को अपने जीवन में और भी अधिक संघर्ष करना पड़ रहा है। जहां एक तरफ देश विकास कर रहा है वहीं दूसरी ओर बेटियां खतरे में हैं। हमें ऐसा तंत्र विकसित करना होगा कि बेटियां बाहर जाते समय सुरक्षित महसूस करें और सुरक्षित रहें भी।
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सवाल नहीं करें, उन्हें सुरक्षा दें
फोटो-154
पालम कॉलोनी अंगूरी देवी ने बताया कि मनीषा की हत्या काफी बेरहमी से की गई। घटना के बारे में सोचकर अपनी पोतियों के लिए डर लगता है। इतनी उम्र होने पर यही समझ आया कि कपड़ों आदि से फर्क नहीं पड़ता। समाज की सोच बदलनी होगी। वरिष्ठ महिला होने के नाते समाज से अपील है कि बहन-बेटियों पर सवाल करने के बजाय उनकी रक्षा की जाए। ऐसा माहौल तैयार किया जाए कि एक बेटी-बहन बिना किसी डर के कहीं भी आ-जा सके। खतरा महसूस होने पर उसके पास साधन हो कि वह मदद मांग सके और उसके पास समय रहते मदद पहुंच सके। सरकार को ऐसा पुलिस तंत्र विकसित करना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
मनीषा हत्याकांड ने महिला समाज को झकझोर कर रख दिया है। बेटियों की सुरक्षा के लिए बुजुर्ग महिलाएं चिंतित हैं। वह तुलनात्मक रूप से आज के समाज को अधिक असुरक्षित बताती हैं। इस घटना को समाज के लिए शर्मनाक बताते हुए बोलीं कि पहले गांव में बेटियां सुरक्षित महसूस करती थीं, लेकिन आज हालात इतने बिगड़ गए हैं कि परिवार अपनी बेटियों को अकेले भेजने से भी डरने लगे हैं। बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि यह घटना केवल एक परिवार या उसकी बेटी से नहीं, बल्कि पूरे समाज से अन्याय है। उनका कहना है कि जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी और कानून का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक बेटियां सुरक्षित नहीं हो सकतीं। हमें ऐसा तंत्र विकसित करना होगा कि बेटियां सुरक्षित महसूस करें और सुरक्षित रहें। मदद की आवश्यकता पर उन तक समय रहते सहायता पहुंच सके। कोई भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई हो।
बेटियों को बाहर भेजने से लग रहा डर
फोटो-151
-आनंद विहार निवासी रामप्यारी देवी ने हालात को बहुत खराब बताया। बोलीं कि पहले के समय में बेटियां खेतों में अकेली भी काम कर लिया करती थीं, कोई गलत निगाह तक नहीं उठाता था। लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बेटियों को बाहर भेजते हुए चिंता महसूस होती है। गांव की सोच में काफी बदलाव आ रहे है। ऐसी घटनाओं को होते देख लड़कियों को घरों से निकलने पर अंकुश उचित नहीं है। हमें उनकी सुरक्षा के लिए और जागरूक होना होगा। आज की जरूरत को देखते हुए जरूरी है कि बेटियां आत्मनिर्भर बनें जिसके लिए उन्हें सही सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
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पहले प्रशासन मजबूत हुआ करता था
फोटो-152
वसंत बिहार निवासी मीनू देवी बोलीं कि मनीषा प्रकरण को सुन कर रूह कांप गई थी। अपनी मां-बहन और बेटियों को खोने का दर्द प्रदेश में हर कोई महसूस कर पा रहा होगा। पहले के समय में प्रशासन मजबूत हुआ करता था लेकिन आज हालात कमजोर होते दिख रहे हैं। हमें संवेदनशीलता को और बढ़ाना होगा। किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। जिससे कोई अपराधी बच नहीं पाए। शिकायत आती है तो प्रशासन का कर्तव्य होना चाहिए की वह बिना किसी बहाने के कार्रवाई करें।
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माता-पिता की बढ़ रही है चिंता
फोटो-153
वसंत विहार की रहने वाली सुशीला रानी का कहना है कि आज के समय में माता-पिता चिंता में रहते हैं जब उनकी बेटी पढ़ने या नाैकरी के लिए बाहर जाती है। पहले के समय में गांवों में घरों के दरवाजे बिना किसी डर के खुले रहते थे लेकिन अब गलियों में भी बेटियों को निकलने के लिए मना कर दिया जाता है। मनीषा प्रकरण जैसी घटनाओं से बेटियों को अपने जीवन में और भी अधिक संघर्ष करना पड़ रहा है। जहां एक तरफ देश विकास कर रहा है वहीं दूसरी ओर बेटियां खतरे में हैं। हमें ऐसा तंत्र विकसित करना होगा कि बेटियां बाहर जाते समय सुरक्षित महसूस करें और सुरक्षित रहें भी।
सवाल नहीं करें, उन्हें सुरक्षा दें
फोटो-154
पालम कॉलोनी अंगूरी देवी ने बताया कि मनीषा की हत्या काफी बेरहमी से की गई। घटना के बारे में सोचकर अपनी पोतियों के लिए डर लगता है। इतनी उम्र होने पर यही समझ आया कि कपड़ों आदि से फर्क नहीं पड़ता। समाज की सोच बदलनी होगी। वरिष्ठ महिला होने के नाते समाज से अपील है कि बहन-बेटियों पर सवाल करने के बजाय उनकी रक्षा की जाए। ऐसा माहौल तैयार किया जाए कि एक बेटी-बहन बिना किसी डर के कहीं भी आ-जा सके। खतरा महसूस होने पर उसके पास साधन हो कि वह मदद मांग सके और उसके पास समय रहते मदद पहुंच सके। सरकार को ऐसा पुलिस तंत्र विकसित करना चाहिए।