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मंदबुद्धि युवती की नाक की रसौली का सफल ऑपरेशन
करनाल
Updated Sun, 22 Sep 2013 10:19 PM IST
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कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में एक मंदबुद्धि युवती के नाक की रसौली का सफल ऑपरेशन किया गया। किशोरी को सांस लेने में तकलीफ रहती थी। ऑपरेशन के बाद किशोरी पूरी तरह से स्वस्थ है।
खास बात यह है कि किशोरी गरीब परिवार से संबंध रखती है और पिता ने बेटी के इलाज के लिए दो माह तक मजदूरी तक छोड़ दी। यह ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जयवर्धने और उनकी टीम ने किया है। अपनी तरह का यह पहला ऑपरेशन है। डॉ. जयवर्धने ने बताया कि इलाज के दौरान उन्हें काफी परेशानी आई।
युवती मंदबुद्धि थी और वह कोई भी बात ठीक से नहीं समझ पा रही थी। इसलिए टीम ने पूरी तत्परता से काम किया ताकि किसी तरह की परेशानी किशोरी को पेश न आए। गांव बैरसाल की रहने वाली रिंपी को 29 अगस्त को उपचार के लिए करनाल मेडिकल कॉलेज लाया गया था।
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रिंपी को नाक के अंदर रसौली थी। इसकी वजह से वह सांस लेने में तकलीफ महसूस करती थी। यहां तीस अगस्त को उसका ऑपरेशन किया गया। डॉ. जयवर्धने ने बताया कि दो घंटे का समय ऑपरेशन में लगा। मंदबुद्धि होने के कारण इंडोस्कोप से ऑपरेशन किया गया। इसमें नेजोबियल सिस्टम को अपनाया गया। रिंपी को पूरी तरह से बेहोश कर ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन के दौरान डॉ. सरिता बिश्नोई, डॉ. ललित, डॉ. किरण सहयोग के लिए मौजूद रही।
तीन साल से थी तकलीफ
डॉ. जयवर्धने ने बताया कि रिंपी की नाक में बाईं ओर रसौली होने के कारण एक साइड की नाक बंद हो गई थी। इस कारण उसे सांस लेने में काफी परेशानी होती थी। नाक के कारण मुंह पर बाईं ओर सूजन थी और सूजन से चेहरा बिगड़ा हुआ था। सूजन की वजह से रिंपी का होंठ भी फूला हुआ था।
इसके कारण रिंपी की आवाज भी ठीक नहीं निकलती थी। रिंपी के पिता बनारसी दास ने बताया कि तीन साल पहले रिंपी के नाक में सूजन हुई थी। पहले तो उसे झाड़ फूंक से इलाज कराते रहे। बाद में किसी ने सलाह दी कि यह मेडिकल साइंस की बीमारी है। इसके बाद उसे इलाज के लिए यहां पर लाया गया। इस ऑपरेशन के बाद अब रिंपी पूरी तरह से ठीक है और वह खूब हंसती खेलती है। रिंपी के पिता ने बताया कि इलाज के लिए उन्होंने दो माह तक कामकाज छोड़े रखा।
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खास बात यह है कि किशोरी गरीब परिवार से संबंध रखती है और पिता ने बेटी के इलाज के लिए दो माह तक मजदूरी तक छोड़ दी। यह ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जयवर्धने और उनकी टीम ने किया है। अपनी तरह का यह पहला ऑपरेशन है। डॉ. जयवर्धने ने बताया कि इलाज के दौरान उन्हें काफी परेशानी आई।
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युवती मंदबुद्धि थी और वह कोई भी बात ठीक से नहीं समझ पा रही थी। इसलिए टीम ने पूरी तत्परता से काम किया ताकि किसी तरह की परेशानी किशोरी को पेश न आए। गांव बैरसाल की रहने वाली रिंपी को 29 अगस्त को उपचार के लिए करनाल मेडिकल कॉलेज लाया गया था।
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रिंपी को नाक के अंदर रसौली थी। इसकी वजह से वह सांस लेने में तकलीफ महसूस करती थी। यहां तीस अगस्त को उसका ऑपरेशन किया गया। डॉ. जयवर्धने ने बताया कि दो घंटे का समय ऑपरेशन में लगा। मंदबुद्धि होने के कारण इंडोस्कोप से ऑपरेशन किया गया। इसमें नेजोबियल सिस्टम को अपनाया गया। रिंपी को पूरी तरह से बेहोश कर ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन के दौरान डॉ. सरिता बिश्नोई, डॉ. ललित, डॉ. किरण सहयोग के लिए मौजूद रही।
तीन साल से थी तकलीफ
डॉ. जयवर्धने ने बताया कि रिंपी की नाक में बाईं ओर रसौली होने के कारण एक साइड की नाक बंद हो गई थी। इस कारण उसे सांस लेने में काफी परेशानी होती थी। नाक के कारण मुंह पर बाईं ओर सूजन थी और सूजन से चेहरा बिगड़ा हुआ था। सूजन की वजह से रिंपी का होंठ भी फूला हुआ था।
इसके कारण रिंपी की आवाज भी ठीक नहीं निकलती थी। रिंपी के पिता बनारसी दास ने बताया कि तीन साल पहले रिंपी के नाक में सूजन हुई थी। पहले तो उसे झाड़ फूंक से इलाज कराते रहे। बाद में किसी ने सलाह दी कि यह मेडिकल साइंस की बीमारी है। इसके बाद उसे इलाज के लिए यहां पर लाया गया। इस ऑपरेशन के बाद अब रिंपी पूरी तरह से ठीक है और वह खूब हंसती खेलती है। रिंपी के पिता ने बताया कि इलाज के लिए उन्होंने दो माह तक कामकाज छोड़े रखा।