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Karnal News: एक फीट की हाथी दांत भिंडी, 80 तरह के घीये देख रह गए दंग
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एक फीट की हाथी दांत भिंडी, 80 तरह के घीये देख रह गए दंग
- सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में आयोजित किसान मेले में सोनीपत के किसान लीलू की प्रदर्शनी में रखी सब्जियां रही आकर्षण का केंद्र
- कभी तीन लाख कर्ज में डूबा किसान आज लाखों कमा रहा, देसी खाद, गोबर और गोमूत्र से कर रहे सब्जी की खेती
जयभगवान सेन
घरौंडा (करनाल)। सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में प्रदेश स्तरीय किसान सब्जी मेले का आयोजन किया जा रहा है जिसमें सैकड़ों किसानों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का मौका मिला है। इस मेले में किसान लीलू की एक फुट की हाथी दांत भिंडी और 80 तरह के घीये देखकर हर कोई दंग रह गया।
यह सब उन्होंने मात्र देसी खाद, गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल करके किया है। किसान ने बताया कि उन्होंने खेती का तरीका बदला है। जिसने उसे कर्ज के दलदल से बाहर निकालकर लाखों का सब्जी कारोबारी बना दिया है।
मूलरूप से सोनीपत के रहने वाले किसान ने पहले दक्षिण भारत का भ्रमण करके वहां की सब्जी की खेती करने तकनीक को जाना फिर उस तकनीक को जब उन्होंने अपने खेतों में इस्तेमाल करना शुरू किया तो उत्पादन देख हर कोई दंग रह गया। घरौंडा के सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में प्रदेश स्तरीय किसान सब्जी मेले का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय आयोजन के पहले दिन रविवार को किसान लीलू ने भी प्रदर्शनी लगाई और खेती की तकनीक को अन्य किसानों से साझा किया। मेले में उनकी एक फुट की हाथी दांत नामक भिंडी, 20 से 22 किलो का घीया और 15 किलो वजन तक का एक कद्दू काफी चर्चा में रहा। मेले में 100 से ज्यादा किसान प्रदर्शनी लगाने पहुंचे हैं। - संवाद
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देसी खाद और नई तकनीक बढ़ाएगा आमदनी
किसान लीलू का कहना है कि किसान देसी खाद व दूसरे राज्यों की तकनीक को अपनाकर कुछ नया कर सकते हैं। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। उसने 2019 में सब्जी लगाने का कार्य शुरू किया था। उस समय उन पर साढ़े तीन लाख का कर्ज था, लेकिन गोबर की देसी खाद से उन्होंने सब्जियां तैयार कीं। जिनकी बाजार में अच्छी पहचान बनी। लगभग साढ़े चार साल के सफर में सब्जी की बिक्री करके वे टैक्स भी भरने लगे हैं।
विभिन्न राज्यों का दौरा कर जानी थी तकनीक
किसान लीलू का कहना है कि तकनीक जानने के लिए दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों, नक्सली क्षेत्र, उड़ीसा आदि का दौरा किया था। इस सफर में लगभग 50 हजार किलोमीटर की यात्रा की है। वे 80 प्रकार के घीयों की किस्म तैयार करते हैं। हाथी दांत भिंडी की किस्म शायद क्षेत्र में दिखाई नहीं देती है। इन सब्जियों का हरियाणा, पंजाब सहित उत्तर भारत में उत्पादन बहुत कम है। हाथी दांत भिंडी स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है, क्योंकि देसी खाद की सब्जियों में पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। अभी इस किस्म की मंडी में पकड़ कम है।
फटे कपड़े पहनकर बिताए नक्सली क्षेत्र में दिन
किसान लीलू ने बताया कि नक्सली क्षेत्र में सब्जियों के लिए फटे व पुराने कपड़े पहनकर जाते हैं, क्योंकि ऐसे लोगों को नक्सली परेशान नहीं करते हैं। अगर पेंट सूट पहनकर जाते हैं तो मारपीट व लूटपाट जैसी वारदात का भी शिकार हो सकते हैं। स्थानीय लोगों से मुलाकात करने के बाद ही उन्हें वहां की सब्जियों की तकनीक की जानकारी मिली है।
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- कभी तीन लाख कर्ज में डूबा किसान आज लाखों कमा रहा, देसी खाद, गोबर और गोमूत्र से कर रहे सब्जी की खेती
जयभगवान सेन
घरौंडा (करनाल)। सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में प्रदेश स्तरीय किसान सब्जी मेले का आयोजन किया जा रहा है जिसमें सैकड़ों किसानों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का मौका मिला है। इस मेले में किसान लीलू की एक फुट की हाथी दांत भिंडी और 80 तरह के घीये देखकर हर कोई दंग रह गया।
यह सब उन्होंने मात्र देसी खाद, गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल करके किया है। किसान ने बताया कि उन्होंने खेती का तरीका बदला है। जिसने उसे कर्ज के दलदल से बाहर निकालकर लाखों का सब्जी कारोबारी बना दिया है।
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मूलरूप से सोनीपत के रहने वाले किसान ने पहले दक्षिण भारत का भ्रमण करके वहां की सब्जी की खेती करने तकनीक को जाना फिर उस तकनीक को जब उन्होंने अपने खेतों में इस्तेमाल करना शुरू किया तो उत्पादन देख हर कोई दंग रह गया। घरौंडा के सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में प्रदेश स्तरीय किसान सब्जी मेले का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय आयोजन के पहले दिन रविवार को किसान लीलू ने भी प्रदर्शनी लगाई और खेती की तकनीक को अन्य किसानों से साझा किया। मेले में उनकी एक फुट की हाथी दांत नामक भिंडी, 20 से 22 किलो का घीया और 15 किलो वजन तक का एक कद्दू काफी चर्चा में रहा। मेले में 100 से ज्यादा किसान प्रदर्शनी लगाने पहुंचे हैं। - संवाद
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देसी खाद और नई तकनीक बढ़ाएगा आमदनी
किसान लीलू का कहना है कि किसान देसी खाद व दूसरे राज्यों की तकनीक को अपनाकर कुछ नया कर सकते हैं। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। उसने 2019 में सब्जी लगाने का कार्य शुरू किया था। उस समय उन पर साढ़े तीन लाख का कर्ज था, लेकिन गोबर की देसी खाद से उन्होंने सब्जियां तैयार कीं। जिनकी बाजार में अच्छी पहचान बनी। लगभग साढ़े चार साल के सफर में सब्जी की बिक्री करके वे टैक्स भी भरने लगे हैं।
विभिन्न राज्यों का दौरा कर जानी थी तकनीक
किसान लीलू का कहना है कि तकनीक जानने के लिए दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों, नक्सली क्षेत्र, उड़ीसा आदि का दौरा किया था। इस सफर में लगभग 50 हजार किलोमीटर की यात्रा की है। वे 80 प्रकार के घीयों की किस्म तैयार करते हैं। हाथी दांत भिंडी की किस्म शायद क्षेत्र में दिखाई नहीं देती है। इन सब्जियों का हरियाणा, पंजाब सहित उत्तर भारत में उत्पादन बहुत कम है। हाथी दांत भिंडी स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है, क्योंकि देसी खाद की सब्जियों में पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। अभी इस किस्म की मंडी में पकड़ कम है।
फटे कपड़े पहनकर बिताए नक्सली क्षेत्र में दिन
किसान लीलू ने बताया कि नक्सली क्षेत्र में सब्जियों के लिए फटे व पुराने कपड़े पहनकर जाते हैं, क्योंकि ऐसे लोगों को नक्सली परेशान नहीं करते हैं। अगर पेंट सूट पहनकर जाते हैं तो मारपीट व लूटपाट जैसी वारदात का भी शिकार हो सकते हैं। स्थानीय लोगों से मुलाकात करने के बाद ही उन्हें वहां की सब्जियों की तकनीक की जानकारी मिली है।