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Karnal News: स्कूलों में खुद की उगाई सब्जियां खाएंगे विद्यार्थी
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- एक से आठवीं तक के सरकारी विद्यालयों में बनेगी पोषण वाटिका
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब खुद की उगाई गई सब्जियां खाएंगे। इसके लिए एक से आठवीं तक के स्कूलों में पोषण वाटिका बनाई जाएंगी, जिस स्कूल में जगह की कमी है, वहां भवन की छतों पर गमले, पाॅलीबैग में सब्जी उगा सकेंगे। इसमें विद्यार्थी व शिक्षकों का सहयोग रहेगा। इससे स्कूलों के करीब 80 हजार विद्यार्थी खुद की उगाई फल व सब्जी खाकर तंदरुस्त रहेंगे।
वहीं, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य की साल में दो बार 100 प्रतिशत जांच होगी। इनको सप्ताह में एक दिन आयरन व फोलिक एसिड की गोलियों भी दी जाएंगी। इसके लिए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को सुनिश्चित करना होगा कि वह विद्यार्थियों को कृमिनाशक दवा दिलाएंगे। वर्ष में दो बार शिक्षक प्रत्येक छात्रों की लंबाई और वजन मापेंगे। जिसके लिए स्कूल की दीवार पर लंबाई का पैमाना बनाया जाएगा, जिससे छात्रों की लंबाई सरकारी डाक्टरों की ओर से भी मापी जा सके।
मिड डे मील में बनाए जाने वाले विद्यार्थियों के भोजन को स्कूल मुखिया व उनके अभिभावक भी खाकर जांच करेंगे। मिड डे मील योजना के तहत सभी स्कूलों में स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक, कला प्रतियोगिता, कुकिंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। वहीं, विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन के लिए रजिस्टर लगाकर रिपोर्ट बनाई जाएगी, जिसको प्रतिमाह निदेशालय, मौलिक शिक्षा विभाग में भेजनी होगी।
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भोजन के लिए राशि आवंटित
भोजन के परीक्षण के लिए सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पहले ही राशि आवंटित की जा चुकी है। सभी विद्यालयों का माह में एक बार मिड डे मील का खाना सरकार की ओर से अनुमोदित प्रयोगशाला से चैक करवाया जाएगा। किसी बच्चे का जन्मदिन या स्कूल के शिक्षक की शादी की सालगिरह, जन्मदिन, त्योहार व किसी क्रांतिकारी के दिवस पर स्कूल में विशेष तिथि पर भोजन बनाया जाएगा। इसके लिए बच्चों के अभिभावकों को आमंत्रित किया जाएगा।
वर्जन
मिड-डे मील में विद्यार्थियों को शुद्ध व स्वच्छ भोजन प्रदान किया जाएगा। बच्चों के स्वास्थ्य की समय पर जांच होगी। मिड-डे मील में कई प्रकार का भोजन बनाया जाता है। बच्चों के स्वास्थ्य को सही रखने के लिए उन्हें सरकारी स्कूलों की पोषण वाटिका, गमलों व पाॅलीबैग में उगी सब्जियां खाने को दी जाएंगी।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब खुद की उगाई गई सब्जियां खाएंगे। इसके लिए एक से आठवीं तक के स्कूलों में पोषण वाटिका बनाई जाएंगी, जिस स्कूल में जगह की कमी है, वहां भवन की छतों पर गमले, पाॅलीबैग में सब्जी उगा सकेंगे। इसमें विद्यार्थी व शिक्षकों का सहयोग रहेगा। इससे स्कूलों के करीब 80 हजार विद्यार्थी खुद की उगाई फल व सब्जी खाकर तंदरुस्त रहेंगे।
वहीं, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य की साल में दो बार 100 प्रतिशत जांच होगी। इनको सप्ताह में एक दिन आयरन व फोलिक एसिड की गोलियों भी दी जाएंगी। इसके लिए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को सुनिश्चित करना होगा कि वह विद्यार्थियों को कृमिनाशक दवा दिलाएंगे। वर्ष में दो बार शिक्षक प्रत्येक छात्रों की लंबाई और वजन मापेंगे। जिसके लिए स्कूल की दीवार पर लंबाई का पैमाना बनाया जाएगा, जिससे छात्रों की लंबाई सरकारी डाक्टरों की ओर से भी मापी जा सके।
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मिड डे मील में बनाए जाने वाले विद्यार्थियों के भोजन को स्कूल मुखिया व उनके अभिभावक भी खाकर जांच करेंगे। मिड डे मील योजना के तहत सभी स्कूलों में स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक, कला प्रतियोगिता, कुकिंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। वहीं, विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन के लिए रजिस्टर लगाकर रिपोर्ट बनाई जाएगी, जिसको प्रतिमाह निदेशालय, मौलिक शिक्षा विभाग में भेजनी होगी।
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भोजन के लिए राशि आवंटित
भोजन के परीक्षण के लिए सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पहले ही राशि आवंटित की जा चुकी है। सभी विद्यालयों का माह में एक बार मिड डे मील का खाना सरकार की ओर से अनुमोदित प्रयोगशाला से चैक करवाया जाएगा। किसी बच्चे का जन्मदिन या स्कूल के शिक्षक की शादी की सालगिरह, जन्मदिन, त्योहार व किसी क्रांतिकारी के दिवस पर स्कूल में विशेष तिथि पर भोजन बनाया जाएगा। इसके लिए बच्चों के अभिभावकों को आमंत्रित किया जाएगा।
वर्जन
मिड-डे मील में विद्यार्थियों को शुद्ध व स्वच्छ भोजन प्रदान किया जाएगा। बच्चों के स्वास्थ्य की समय पर जांच होगी। मिड-डे मील में कई प्रकार का भोजन बनाया जाता है। बच्चों के स्वास्थ्य को सही रखने के लिए उन्हें सरकारी स्कूलों की पोषण वाटिका, गमलों व पाॅलीबैग में उगी सब्जियां खाने को दी जाएंगी।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी