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12वीं तक के विद्यार्थी हर माह देंगे मूल्यांकन टेस्ट
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नई शिक्षा नीति के तहत अब स्कूलों में पढ़ाई का तरीका भी बदलेगा। विद्यार्थियों में लर्निंग लेवल बढ़ाने यानी सीखने की ललक पैदा की जाएगी। पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों का हर माह मूल्यांकन टेस्ट भी लिया जाएगा। ताकि उनकी पढ़ाई की स्थिति का पता चलता रहे। इस टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर विद्यार्थियों को तीन श्रेणी में विभाजित किया जाएगा। जो विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर होंगे, उनके शिक्षा स्तर में सुधार लाने के लिए रोजाना सुबह एक घंटे की अतिरिक्त कक्षा भी लगेगी।
जुलाई माह से टेस्ट लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। मंगलवार को उपायुक्त अनीश यादव की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति को लेकर लघु सचिवालय में बैठक हुई। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा सहित अन्य अधिकारियों से उन्होंने इस पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हर बच्चे का लर्निंग लेवल कितना है, संबंधित शिक्षक के हवाले से विद्यालयवार इसकी जानकारी विभाग के पास होनी चाहिए। उसी आधार पर लर्निंग से कितने विद्यार्थियों का स्तर बढ़ाया गया है। यह भी रिकॉर्ड रखा जाए। इसका विश्लेषण कर एक डाटा तैयार करें और उसी आधार पर अगले वर्ष के लिए योजना बनाई जाए।
इस श्रेणी में किए विभाजित
श्रेणी - अंक
एल-1 : 50 से 60 प्रतिशत अंक
एल-2 : 34 से 50 प्रतिशत अंक
एल-3 : 33 प्रतिशत अंक
महीने में 15 बार विजिट करेंगे अधिकारी
मूल्यांकन स्तर की जांच करने के लिए डीईओ, डीईईओ, एबीआरसी और बीआरपी स्कूलों का निरीक्षण भी करेंगे। इसके लिए उनकी विशेष ड्यूटी लगाई जाएगी। प्रत्येक अधिकारी को महीने में कम से कम 15 बार विजिट करना होगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारी बच्चों की पढ़ाई और ज्ञान का लेवल चेक करेंगे। जिले में 487 प्राइमरी, 1018 मिडिल, 60 उच्च और 116 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। उपायुक्त ने कहा कि जिन स्कूलों में साइंस की प्रयोगशालाएं हैं, वे सभी एक्टिव रहनी चाहिए।
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परिणाम के आधार पर पंजाब से आगे हरियाणा
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल ने बताया कि शिक्षा में हरियाणा पंजाब से आगे है। जिले की बात करें तो गत दो वर्षों में 10वीं व 12वीं के परीक्षा परिणामों में काफी सुधार आया है। अवसर और दीक्षा एप पर परिणाम अपलोड किए जाते हैं, इस एप पर अध्यापकों की उपस्थिति भी लगती है। उड़ान प्रोजेक्ट के तहत जिले और खंड स्तर पर गठित मॉनिटरिंग टीमें विद्यार्थियों की स्कूली जरूरतों को देखने के लिए काम करती हैं।
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करनाल। नई शिक्षा नीति के तहत अब स्कूलों में पढ़ाई का तरीका भी बदलेगा। विद्यार्थियों में लर्निंग लेवल बढ़ाने यानी सीखने की ललक पैदा की जाएगी। पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों का हर माह मूल्यांकन टेस्ट भी लिया जाएगा। ताकि उनकी पढ़ाई की स्थिति का पता चलता रहे। इस टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर विद्यार्थियों को तीन श्रेणी में विभाजित किया जाएगा। जो विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर होंगे, उनके शिक्षा स्तर में सुधार लाने के लिए रोजाना सुबह एक घंटे की अतिरिक्त कक्षा भी लगेगी।
जुलाई माह से टेस्ट लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। मंगलवार को उपायुक्त अनीश यादव की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति को लेकर लघु सचिवालय में बैठक हुई। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा सहित अन्य अधिकारियों से उन्होंने इस पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हर बच्चे का लर्निंग लेवल कितना है, संबंधित शिक्षक के हवाले से विद्यालयवार इसकी जानकारी विभाग के पास होनी चाहिए। उसी आधार पर लर्निंग से कितने विद्यार्थियों का स्तर बढ़ाया गया है। यह भी रिकॉर्ड रखा जाए। इसका विश्लेषण कर एक डाटा तैयार करें और उसी आधार पर अगले वर्ष के लिए योजना बनाई जाए।
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इस श्रेणी में किए विभाजित
श्रेणी - अंक
एल-1 : 50 से 60 प्रतिशत अंक
एल-2 : 34 से 50 प्रतिशत अंक
एल-3 : 33 प्रतिशत अंक
महीने में 15 बार विजिट करेंगे अधिकारी
मूल्यांकन स्तर की जांच करने के लिए डीईओ, डीईईओ, एबीआरसी और बीआरपी स्कूलों का निरीक्षण भी करेंगे। इसके लिए उनकी विशेष ड्यूटी लगाई जाएगी। प्रत्येक अधिकारी को महीने में कम से कम 15 बार विजिट करना होगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारी बच्चों की पढ़ाई और ज्ञान का लेवल चेक करेंगे। जिले में 487 प्राइमरी, 1018 मिडिल, 60 उच्च और 116 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। उपायुक्त ने कहा कि जिन स्कूलों में साइंस की प्रयोगशालाएं हैं, वे सभी एक्टिव रहनी चाहिए।
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परिणाम के आधार पर पंजाब से आगे हरियाणा
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल ने बताया कि शिक्षा में हरियाणा पंजाब से आगे है। जिले की बात करें तो गत दो वर्षों में 10वीं व 12वीं के परीक्षा परिणामों में काफी सुधार आया है। अवसर और दीक्षा एप पर परिणाम अपलोड किए जाते हैं, इस एप पर अध्यापकों की उपस्थिति भी लगती है। उड़ान प्रोजेक्ट के तहत जिले और खंड स्तर पर गठित मॉनिटरिंग टीमें विद्यार्थियों की स्कूली जरूरतों को देखने के लिए काम करती हैं।