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कोरोना से सुरक्षा को लेकर सख्ती तो कहीं लापरवाही
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करनाल। कोरोना की दूसरी लहर के कारण 85 दिन बाद शुक्रवार को स्कूल खुले। पहले दिन जिले भर के स्कूलों में करीब 17 प्रतिशत उपस्थिति रही यानी 176 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में करीब सात हजार बच्चे पहुंचे। वहीं कई स्कूलों में कोरोना सुरक्षा को लेकर सख्ती तो कहीं लापरवाही भी दिखाई दी। इंतजामों को जानने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों की 70 टीमों ने 146 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगह एक कमरे में दो-दो कक्षाएं लगी मिली। कई जगह नेटवर्क की दिक्कत के कारण विद्यार्थियों के तापमान जांच का रिकार्ड अवसर एप पर अपडेट नहीं हो पाया। इसके अतिरिक्त कई स्कूलों में ड्यूटी रोस्टर तैयार नहीं मिला। ऐसे स्कूलों को जांच टीमों ने भविष्य में लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी।
स्कूलों की जांच के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, छह खंड शिक्षा अधिकारी, एपीसी और सभी एबीआरसी के नेतृत्व में 70 जांच टीमों का गठन किया गया था। कक्षाएं लगने के सुबह 9 से 12 बजे तक के समय में प्रत्येक टीम ने दो-दो स्कूलों की जांच की। वहीं कई स्कूलों पूरी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी। पहले दिन स्कूलों में सिलेबस पर चर्चा हुई और विद्यार्थियों की शंकाओं का शिक्षकों ने समाधान किया। वहीं प्राइवेट स्कूल 19 जुलाई से खोले जाएंगे। -ब्यूरो
कक्षा के हिसाब से चार जोन में बांटे गए स्कूल
9वीं से 12वीं तक की चार कक्षाओं के लिए स्कूल खोले गए हैं। ऐसे में स्कूलों में सामाजिक दूरी का अच्छे से पालन हो सके, इसके लिए कक्षाओं के हिसाब से स्कूलों को चार जोन में बांटा गया। कई स्कूलों में एक कमरे में 20 से ज्यादा बच्चे नहीं थे। एक बच्चे को एक ही बैंच अलॉट किया। मास्क लगाने और सैनिटाइजेशन के बाद ही हर बच्चे को प्रवेश दिया गया।
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बिना पत्र और अस्वस्थ बच्चे वापस लौटाए
प्रत्येक स्कूल में गहनता से जांच के बाद ही विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल रेलवे रोड में 70 और राजकीय मॉडल संस्कृति कन्या स्कूल में 30 के करीब विद्यार्थी पहुंचे। वहीं अस्वस्थ विद्यार्थियों को वापस भेज दिया गया। स्कूल प्रिंसिपल मोहिंद्र नरवाल ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से पूरी व्यवस्था की गई। बिना अनुमति पत्र के स्कूल आए विद्यार्थी भी वापस भेजे। ग्रामीण स्कूलों में इस तरह की स्थिति ज्यादा दिखाई दी।
शिक्षा अधिकारियों ने ली शिक्षकों की क्लास
जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी ने कोहंड और घरौंडा के स्कूल का निरीक्षण किया। वहीं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा ने तरावड़ी स्कूल की स्थिति को देखा। तरावड़ी स्कूल में छात्र संख्या कम थी। विद्यार्थियों के जाने के बाद अधिकारी ने यहां शिक्षकों की क्लास ली। उनके पढ़ाने के तरीके को देखने के अतिरिक्त किताबी ज्ञान को भी जांचा। सवालों का सही जवाब न देने वाले शिक्षकों को उन्होंने अपना ज्ञान दुरुस्त करने की नसीहत भी दी।
दोस्तों से मिलकर हुई खुशी, शिक्षकों के भी चेहरे खिले
राजकीय स्कूल की छात्रा नेहा, स्वाति, देवयानी और शोर्या ने बताया कि कई दिनों बाद एक साथ स्कूल पहुंचे हैं। दोस्तों से रोजाना ऑनलाइन क्लास में ही मुलाकात होती थी। आज स्कूल में मिलकर खुशी हुई है। एक साथ पढ़ने का मजा भी अलग है। कई दिनों से अकेले ही पढ़ाई कर रहे थे। इधर, शिक्षकों के चेहरे भी विद्यार्थियों को देखकर खिले दिखाई दिए। शिक्षक बीर सिंह, दीपक गोस्वामी, रमेश कांता और गीता ने बताया कि परीक्षा में अच्छी अंकों के लिए के लिए स्कूल आकर पढ़ना हर बच्चे के लिए जरूरी है। विद्यार्थी आने लगे हैं, देखकर खुशी हुई।
रोजाना ऑनलाइन ही क्लास लग रही थी। कई बार स्कूल आने का मन करता था लेकिन वे बंद थे। स्कूल खुलने पर उत्साहित हूं। - दिव्या, छात्रा, रेलवे रोड स्कूल
पहले दिन अच्छा माहौल रहा। सिलेबस पर शिक्षकों के साथ चर्चा भी हुई। कुछ चैप्टर की दिक्कत भी, वो भी शिक्षक से समझे हैं। - मोहिनी, छात्रा, रेलवे रोड स्कूल
वर्जन- फोटो-- 113 नंबर है।
पहले दिन 17 प्रतिशत उपस्थिति रही। हमारी टीमों ने भी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर जायजा लिया। जहां कमियां मिली, वहां सुधार के निर्देश दिए। सोमवार से उपस्थिति बढ़ने की उम्मीद है। - राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी
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स्कूलों की जांच के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, छह खंड शिक्षा अधिकारी, एपीसी और सभी एबीआरसी के नेतृत्व में 70 जांच टीमों का गठन किया गया था। कक्षाएं लगने के सुबह 9 से 12 बजे तक के समय में प्रत्येक टीम ने दो-दो स्कूलों की जांच की। वहीं कई स्कूलों पूरी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी। पहले दिन स्कूलों में सिलेबस पर चर्चा हुई और विद्यार्थियों की शंकाओं का शिक्षकों ने समाधान किया। वहीं प्राइवेट स्कूल 19 जुलाई से खोले जाएंगे। -ब्यूरो
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कक्षा के हिसाब से चार जोन में बांटे गए स्कूल
9वीं से 12वीं तक की चार कक्षाओं के लिए स्कूल खोले गए हैं। ऐसे में स्कूलों में सामाजिक दूरी का अच्छे से पालन हो सके, इसके लिए कक्षाओं के हिसाब से स्कूलों को चार जोन में बांटा गया। कई स्कूलों में एक कमरे में 20 से ज्यादा बच्चे नहीं थे। एक बच्चे को एक ही बैंच अलॉट किया। मास्क लगाने और सैनिटाइजेशन के बाद ही हर बच्चे को प्रवेश दिया गया।
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बिना पत्र और अस्वस्थ बच्चे वापस लौटाए
प्रत्येक स्कूल में गहनता से जांच के बाद ही विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल रेलवे रोड में 70 और राजकीय मॉडल संस्कृति कन्या स्कूल में 30 के करीब विद्यार्थी पहुंचे। वहीं अस्वस्थ विद्यार्थियों को वापस भेज दिया गया। स्कूल प्रिंसिपल मोहिंद्र नरवाल ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से पूरी व्यवस्था की गई। बिना अनुमति पत्र के स्कूल आए विद्यार्थी भी वापस भेजे। ग्रामीण स्कूलों में इस तरह की स्थिति ज्यादा दिखाई दी।
शिक्षा अधिकारियों ने ली शिक्षकों की क्लास
जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी ने कोहंड और घरौंडा के स्कूल का निरीक्षण किया। वहीं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा ने तरावड़ी स्कूल की स्थिति को देखा। तरावड़ी स्कूल में छात्र संख्या कम थी। विद्यार्थियों के जाने के बाद अधिकारी ने यहां शिक्षकों की क्लास ली। उनके पढ़ाने के तरीके को देखने के अतिरिक्त किताबी ज्ञान को भी जांचा। सवालों का सही जवाब न देने वाले शिक्षकों को उन्होंने अपना ज्ञान दुरुस्त करने की नसीहत भी दी।
दोस्तों से मिलकर हुई खुशी, शिक्षकों के भी चेहरे खिले
राजकीय स्कूल की छात्रा नेहा, स्वाति, देवयानी और शोर्या ने बताया कि कई दिनों बाद एक साथ स्कूल पहुंचे हैं। दोस्तों से रोजाना ऑनलाइन क्लास में ही मुलाकात होती थी। आज स्कूल में मिलकर खुशी हुई है। एक साथ पढ़ने का मजा भी अलग है। कई दिनों से अकेले ही पढ़ाई कर रहे थे। इधर, शिक्षकों के चेहरे भी विद्यार्थियों को देखकर खिले दिखाई दिए। शिक्षक बीर सिंह, दीपक गोस्वामी, रमेश कांता और गीता ने बताया कि परीक्षा में अच्छी अंकों के लिए के लिए स्कूल आकर पढ़ना हर बच्चे के लिए जरूरी है। विद्यार्थी आने लगे हैं, देखकर खुशी हुई।
रोजाना ऑनलाइन ही क्लास लग रही थी। कई बार स्कूल आने का मन करता था लेकिन वे बंद थे। स्कूल खुलने पर उत्साहित हूं। - दिव्या, छात्रा, रेलवे रोड स्कूल
पहले दिन अच्छा माहौल रहा। सिलेबस पर शिक्षकों के साथ चर्चा भी हुई। कुछ चैप्टर की दिक्कत भी, वो भी शिक्षक से समझे हैं। - मोहिनी, छात्रा, रेलवे रोड स्कूल
वर्जन- फोटो-- 113 नंबर है।
पहले दिन 17 प्रतिशत उपस्थिति रही। हमारी टीमों ने भी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर जायजा लिया। जहां कमियां मिली, वहां सुधार के निर्देश दिए। सोमवार से उपस्थिति बढ़ने की उम्मीद है। - राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी