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रत्नावली युवा सांग महोत्सव शुरू
कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 08 Feb 2014 12:25 AM IST
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कुरुक्षेत्र में भगवान परशुराम कॉलेज की ओर से सांस्कृतिक एवं युवा विभाग केयू के सौजन्य से चार दिवसीय रत्नावनी युवा सांग महोत्सव का शुभारंभ, सन्निहित सरोवर स्थित हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास परिसर में धूमधाम से हुआ।
इस मौके पर केयू कुलसचिव डॉ. केसी रल्हण ने मुख्यतिथि के रूप में शिरकत करते हुए, दीप प्रज्ज्वलित किया। कॉलेज प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यातिथि को स्मृति-चिह्न प्रदान किया।
युवा रत्नावली सांग महोत्सव में सांग प्रस्तुत करने वाली राजकीय महाविद्यालय नरवाना की टीम ने सोमवती चापसिंह सांग का मंचन किया।
प्राचार्य डॉ. योगेश्वर जोशी ने कहा कि सांग हमारी प्राचीन संस्कृति का अंग है। केयू प्रशासन इसके लिए साधुवाद का पात्र है। जिसने इस संस्कृति को बचाने के लिए ऐसे महोत्सव का आयोजन किया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन विद्यार्थियों में सांग विधा का प्रचार करेगा।
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कॉलेज प्रबंधन समिति के महासचिव सतपाल शर्मा ने कहा कि प्राचीन काल में सांग ही मनोरंजन का साधन होता था। कार्यक्रम में मंच का संचालन डॉ. प्रशांत शर्मा ने किया।
इस अवसर पर संरक्षक पवन शर्मा, अध्यक्ष नारायण दत्त, राजकुमार वत्स, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. सुभाष, प्रोफेसर शीशपाल, प्रोफेसर कैलाश चंद, डॉ. हीरा लाल, डॉ. नंद किशोर, प्रोफेसर अनिल कौशिक, डॉ. रमा शर्मा, डॉ. सरिता राय, डॉ. प्रवीण कुमारी, अनिल शर्मा व नीरज वशिष्ठ मौजूद थे।
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इस मौके पर केयू कुलसचिव डॉ. केसी रल्हण ने मुख्यतिथि के रूप में शिरकत करते हुए, दीप प्रज्ज्वलित किया। कॉलेज प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यातिथि को स्मृति-चिह्न प्रदान किया।
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युवा रत्नावली सांग महोत्सव में सांग प्रस्तुत करने वाली राजकीय महाविद्यालय नरवाना की टीम ने सोमवती चापसिंह सांग का मंचन किया।
प्राचार्य डॉ. योगेश्वर जोशी ने कहा कि सांग हमारी प्राचीन संस्कृति का अंग है। केयू प्रशासन इसके लिए साधुवाद का पात्र है। जिसने इस संस्कृति को बचाने के लिए ऐसे महोत्सव का आयोजन किया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन विद्यार्थियों में सांग विधा का प्रचार करेगा।
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कॉलेज प्रबंधन समिति के महासचिव सतपाल शर्मा ने कहा कि प्राचीन काल में सांग ही मनोरंजन का साधन होता था। कार्यक्रम में मंच का संचालन डॉ. प्रशांत शर्मा ने किया।
इस अवसर पर संरक्षक पवन शर्मा, अध्यक्ष नारायण दत्त, राजकुमार वत्स, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. सुभाष, प्रोफेसर शीशपाल, प्रोफेसर कैलाश चंद, डॉ. हीरा लाल, डॉ. नंद किशोर, प्रोफेसर अनिल कौशिक, डॉ. रमा शर्मा, डॉ. सरिता राय, डॉ. प्रवीण कुमारी, अनिल शर्मा व नीरज वशिष्ठ मौजूद थे।