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खेल संपन्न होने के बाद निजी स्कूलों का स्पोर्ट्स फंड माफ
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गगन तलवार
करनाल। स्पोर्ट्स फंड जमा न कराने वाले निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को शिक्षा विभाग की ओर से हुई खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेने दिया गया था, लेकिन अब ऐसे स्कूलों को शिक्षा विभाग ने इस सत्र के लिए स्पोर्ट्स फंड जमा न कराने की छूट दी है। ये आदेश तब जारी हुए हैं, जब विभिन्न जिलों में खंड और जिला स्तर की प्रतियोगिताएं संपन्न हो चुकी हैं।
खेल संपन्न होने के बाद लिए गए इस निर्णय पर विद्यार्थियों के अलावा खेल प्रतियोगिताओं से जुड़े पीटीआई भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि अब किसी भी खिलाड़ी को इस निर्णय से कोई लाभ नहीं होगा।
इधर, जिला शिक्षा विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग के निदेशक की ओर से जारी पत्र में केवल निजी स्कूलों को ही स्पोर्ट्स फंड जमा कराने की राहत दी गई है। जबकि सरकारी स्कूलों को इस फंड का भुगतान करना होगा। वहीं जिन निजी स्कूलों ने प्रतियोगिताएं शुरू होने से पहले ही स्पोर्ट्स फंड भर दिया था, वे भी अब विभाग से फंड वापस देने की मांग करने लगे हैं। ब्यूरो
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17 नवंबर को अमर उजाला ने उजागर किया था मामला
नियम के अनुसार निजी स्कूलों को खेल सुविधा के नाम पर फीस में अभिभावकों से स्पोर्ट्स फंड के रूप में वसूला पैसा शिक्षा विभाग के पास जमा कराना होता है। लेकिन जिले के 302 स्कूलों ने इस फंड के लाखों रुपये जमा नहीं कराए। ऐसे में इन स्कूलों के विद्यार्थियों को खेलों में हिस्सा नहीं लेने दिया गया। 17 नवंबर के अंक में अमर उजाला ने स्कूलों की ओर से जमा नहीं कराए गए पैसे और विद्यार्थियों को खेल से वंचित रखने के मामले को उजागर किया था, क्योंकि स्कूलों की इस मनमानी का नुकसान बच्चों को हुआ, जिन्हें पूरा पैसा स्कूल को देेने के बाद भी स्कूली गेम्स में हिस्सा नहीं लेने दिया गया।
62 ने एडवांस और 25 ने बाद में कराया फंड जमा
शिक्षा विभाग की एईओ संगीता ने बताया कि 17 नवंबर से पहले तक केवल 62 स्कूलों ने ही स्पोर्ट्स फंड का पैसा जमा कराया था। मामला उजागर होने के बाद 25 और स्कूलों ने पैसा जमा कराया है। जबकि सभी स्कूलों को प्रति विद्यार्थी के हिसाब से यह फंड जमा कराना होता है। अब विभाग की ओर से फंड न लेने का पत्र जारी हुआ है।
खिलाड़ी बोले, पहले निर्णय लेते तो हम भी खेल पाते
खिलाड़ी स्वाति, विनय, लक्ष्य और विवेक का कहना है कि स्पोर्ट्स न भरने की निजी स्कूलों को दी गई राहत से उन्हें कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि इन आदेशों से पहले खंड और जिला स्तर के मुकाबले हो चुके हैं। अब केवल राज्य स्तरीय खेल होने बाकी हैं, इसमें केवल जिला स्तर के विजेता खिलाड़ी ही हिस्सा लेंगे। यदि विभाग पहले यह निर्देश जारी करता तो सभी को खेलने का मौका मिलता।
इतना जमा होता है फंड
- कक्षा एक से आठवीं तक 15 रुपये प्रति विद्यार्थी।
- 9वीं और 10वीं का 30 रुपये प्रति विद्यार्थी।
- 11वीं और 12वीं कक्षा में कला संकाय में 60, वाणिज्य में 72 और विज्ञान संकाय में 90 रुपये प्रति विद्यार्थी।
( स्कूलों को इस नियम के अनुसार शिक्षा विभाग को फंड जमा कराना होता है और इतना ही स्कूल द्वारा विद्यार्थी से लेने का नियम है)
सेकेंडरी शिक्षा हरियाणा के निदेशक ने पत्र जारी कर प्राइवेट स्कूलों को सत्र 2021-22 के लिए स्पोर्ट्स फंड जमा कराने में छूट प्रदान की है। इसके लिए सभी स्कूलों को सूचना दे दी है।
- राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स
सरकारी स्कूलों को अपना स्पोर्ट्स फंड जमा कराना होगा। जिन स्कूलों ने स्पोर्ट्स फंड नहीं दिया है, वे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से पहले ही जमा करा दें।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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करनाल। स्पोर्ट्स फंड जमा न कराने वाले निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को शिक्षा विभाग की ओर से हुई खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेने दिया गया था, लेकिन अब ऐसे स्कूलों को शिक्षा विभाग ने इस सत्र के लिए स्पोर्ट्स फंड जमा न कराने की छूट दी है। ये आदेश तब जारी हुए हैं, जब विभिन्न जिलों में खंड और जिला स्तर की प्रतियोगिताएं संपन्न हो चुकी हैं।
खेल संपन्न होने के बाद लिए गए इस निर्णय पर विद्यार्थियों के अलावा खेल प्रतियोगिताओं से जुड़े पीटीआई भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि अब किसी भी खिलाड़ी को इस निर्णय से कोई लाभ नहीं होगा।
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इधर, जिला शिक्षा विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग के निदेशक की ओर से जारी पत्र में केवल निजी स्कूलों को ही स्पोर्ट्स फंड जमा कराने की राहत दी गई है। जबकि सरकारी स्कूलों को इस फंड का भुगतान करना होगा। वहीं जिन निजी स्कूलों ने प्रतियोगिताएं शुरू होने से पहले ही स्पोर्ट्स फंड भर दिया था, वे भी अब विभाग से फंड वापस देने की मांग करने लगे हैं। ब्यूरो
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17 नवंबर को अमर उजाला ने उजागर किया था मामला
नियम के अनुसार निजी स्कूलों को खेल सुविधा के नाम पर फीस में अभिभावकों से स्पोर्ट्स फंड के रूप में वसूला पैसा शिक्षा विभाग के पास जमा कराना होता है। लेकिन जिले के 302 स्कूलों ने इस फंड के लाखों रुपये जमा नहीं कराए। ऐसे में इन स्कूलों के विद्यार्थियों को खेलों में हिस्सा नहीं लेने दिया गया। 17 नवंबर के अंक में अमर उजाला ने स्कूलों की ओर से जमा नहीं कराए गए पैसे और विद्यार्थियों को खेल से वंचित रखने के मामले को उजागर किया था, क्योंकि स्कूलों की इस मनमानी का नुकसान बच्चों को हुआ, जिन्हें पूरा पैसा स्कूल को देेने के बाद भी स्कूली गेम्स में हिस्सा नहीं लेने दिया गया।
62 ने एडवांस और 25 ने बाद में कराया फंड जमा
शिक्षा विभाग की एईओ संगीता ने बताया कि 17 नवंबर से पहले तक केवल 62 स्कूलों ने ही स्पोर्ट्स फंड का पैसा जमा कराया था। मामला उजागर होने के बाद 25 और स्कूलों ने पैसा जमा कराया है। जबकि सभी स्कूलों को प्रति विद्यार्थी के हिसाब से यह फंड जमा कराना होता है। अब विभाग की ओर से फंड न लेने का पत्र जारी हुआ है।
खिलाड़ी बोले, पहले निर्णय लेते तो हम भी खेल पाते
खिलाड़ी स्वाति, विनय, लक्ष्य और विवेक का कहना है कि स्पोर्ट्स न भरने की निजी स्कूलों को दी गई राहत से उन्हें कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि इन आदेशों से पहले खंड और जिला स्तर के मुकाबले हो चुके हैं। अब केवल राज्य स्तरीय खेल होने बाकी हैं, इसमें केवल जिला स्तर के विजेता खिलाड़ी ही हिस्सा लेंगे। यदि विभाग पहले यह निर्देश जारी करता तो सभी को खेलने का मौका मिलता।
इतना जमा होता है फंड
- कक्षा एक से आठवीं तक 15 रुपये प्रति विद्यार्थी।
- 9वीं और 10वीं का 30 रुपये प्रति विद्यार्थी।
- 11वीं और 12वीं कक्षा में कला संकाय में 60, वाणिज्य में 72 और विज्ञान संकाय में 90 रुपये प्रति विद्यार्थी।
( स्कूलों को इस नियम के अनुसार शिक्षा विभाग को फंड जमा कराना होता है और इतना ही स्कूल द्वारा विद्यार्थी से लेने का नियम है)
सेकेंडरी शिक्षा हरियाणा के निदेशक ने पत्र जारी कर प्राइवेट स्कूलों को सत्र 2021-22 के लिए स्पोर्ट्स फंड जमा कराने में छूट प्रदान की है। इसके लिए सभी स्कूलों को सूचना दे दी है।
- राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स
सरकारी स्कूलों को अपना स्पोर्ट्स फंड जमा कराना होगा। जिन स्कूलों ने स्पोर्ट्स फंड नहीं दिया है, वे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से पहले ही जमा करा दें।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी