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Karnal News: समाधान शिविर... नौ शिकायतें आईं, एक भी मौके पर नहीं निपटाई
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व्यक्ति की समस्या सुनते उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा । प्रवक्ता
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिला प्रशासन की ओर से लगाए जाने वाले समाधान शिविर अब महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। वीरवार को आयोजित समाधान शिविर में नौ शिकायतें आईं, जिनमें से एक भी शिकायत का अधिकारी मौके पर समाधान नहीं कर पाए। शिविर में आने वाले लोगों के लिए हेल्प डेस्क भी नहीं था। निरक्षर फरियादियों को फार्म भरने के लिए थमा दिया गया और वे कर्मचारी के मुंह ताकते नजर आए। कई फरियादियों ने वर्षों से लंबित मामलों का समाधान न होने पर नाराजगी जताई।
पर्यटन विभाग के एक रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर का मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा, जो तीन वर्षों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया है। समाधान शिविर में एसडीएम प्रदीप कुमार ने स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए कहा।
सोमवार को आयोजित समाधान शिविर में अधिकारियों की अनुपस्थिति और शिकायतों को गंभीरता से न सुने जाने को लेकर अमर उजाला ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और इस बार समाधान शिविर का आयोजन तय समय पर किया गया। अधिकारी समय पर अपने स्थानों पर पहुंचे और फरियादियों की शिकायतों को सुनने के साथ-साथ उनका पंजीकरण भी कराया गया।
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रिटायर्ड अधिकारी बोले- थक गया चक्कर काटकर
पर्यटन विभाग के सेवानिवृत्त डिप्टी डायरेक्टर दिलबाग राय ने समाधान दिवस में अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनको स्वामित्व प्रॉपर्टी में सिर्फ नाम सही कराना है। इसके लिए वे तीन साल से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। वे बार-बार अधिकारियों से मिले पर उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। वे चक्कर काटकर थक चुके हैं। समाधान शिविर में भी उन्हें स्पष्ट जवाब न मिलने से उनकी निराशा झलकती रही।
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अधिकारियों को दिए निर्देश
एसडीएम प्रदीप कुमार ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए और फरियादियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने कहा कि समाधान शिविर का उद्देश्य ही जनता की समस्याओं का मौके पर निस्तारण करना है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिविर में भूमि विवाद, पेंशन, बिजली, पानी और राजस्व से जुड़े मामलों की ही शिकायतें आती हैं।
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लोगों की पीड़ा–
मेरे बेटे की हादसे में मृत्यु हो गई। अब मेरा पालन पोषण करने वाला कोई नहीं है। इसलिए मैं कुछ मदद के लिए यहां आई हूं। यहां से एक पर्ची मिली है और कहा गया है कि इस फॉर्म को भरवा लो।
- सरिता
- मेरी जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है। कई बार बीडीपीओ के पास जाकर शिकायत की है लेकिन, कोई समाधान नहीं हुआ। आज फिर एसडीएम ने बीडीपीओ को ही मेरी शिकायत को मार्क किया है।
- सुखधाम सिंह
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करनाल। जिला प्रशासन की ओर से लगाए जाने वाले समाधान शिविर अब महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। वीरवार को आयोजित समाधान शिविर में नौ शिकायतें आईं, जिनमें से एक भी शिकायत का अधिकारी मौके पर समाधान नहीं कर पाए। शिविर में आने वाले लोगों के लिए हेल्प डेस्क भी नहीं था। निरक्षर फरियादियों को फार्म भरने के लिए थमा दिया गया और वे कर्मचारी के मुंह ताकते नजर आए। कई फरियादियों ने वर्षों से लंबित मामलों का समाधान न होने पर नाराजगी जताई।
पर्यटन विभाग के एक रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर का मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा, जो तीन वर्षों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया है। समाधान शिविर में एसडीएम प्रदीप कुमार ने स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए कहा।
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सोमवार को आयोजित समाधान शिविर में अधिकारियों की अनुपस्थिति और शिकायतों को गंभीरता से न सुने जाने को लेकर अमर उजाला ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और इस बार समाधान शिविर का आयोजन तय समय पर किया गया। अधिकारी समय पर अपने स्थानों पर पहुंचे और फरियादियों की शिकायतों को सुनने के साथ-साथ उनका पंजीकरण भी कराया गया।
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रिटायर्ड अधिकारी बोले- थक गया चक्कर काटकर
पर्यटन विभाग के सेवानिवृत्त डिप्टी डायरेक्टर दिलबाग राय ने समाधान दिवस में अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनको स्वामित्व प्रॉपर्टी में सिर्फ नाम सही कराना है। इसके लिए वे तीन साल से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। वे बार-बार अधिकारियों से मिले पर उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। वे चक्कर काटकर थक चुके हैं। समाधान शिविर में भी उन्हें स्पष्ट जवाब न मिलने से उनकी निराशा झलकती रही।
अधिकारियों को दिए निर्देश
एसडीएम प्रदीप कुमार ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए और फरियादियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने कहा कि समाधान शिविर का उद्देश्य ही जनता की समस्याओं का मौके पर निस्तारण करना है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिविर में भूमि विवाद, पेंशन, बिजली, पानी और राजस्व से जुड़े मामलों की ही शिकायतें आती हैं।
लोगों की पीड़ा–
मेरे बेटे की हादसे में मृत्यु हो गई। अब मेरा पालन पोषण करने वाला कोई नहीं है। इसलिए मैं कुछ मदद के लिए यहां आई हूं। यहां से एक पर्ची मिली है और कहा गया है कि इस फॉर्म को भरवा लो।
- सरिता
- मेरी जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है। कई बार बीडीपीओ के पास जाकर शिकायत की है लेकिन, कोई समाधान नहीं हुआ। आज फिर एसडीएम ने बीडीपीओ को ही मेरी शिकायत को मार्क किया है।
- सुखधाम सिंह