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Karnal News: इंद्री एस्केप ड्रेन पर 110 करोड़ से बनेगा सोलर प्लांट
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करनाल। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इंद्री एस्केप ड्रेन पर 20 मेगावाट क्षमता का सोलर एनर्जी प्लांट स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) के तहत प्रस्तावित परियोजना पर करीब 110 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गांव मंगलपुर और बुढ़ाखेड़ा के निकट ड्रेन के करीब 6,800 मीटर लंबे हिस्से में प्लांट स्थापित किया जाएगा। इससे प्रतिवर्ष 28 से 30 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन होने की संभावना है। परियोजना की अनुमानित परिचालन अवधि 30 वर्ष रखी गई है।
परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए नगर निगम आयुक्त सलोनी शर्मा ने वीरवार को निगम कार्यालय में नगर निगम, सिंचाई विभाग और वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें स्थल की निशानदेही, तकनीकी डिजाइन, विभागीय अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), सोलर पैनलों की स्थापना, सुरक्षा और भविष्य में रखरखाव जैसे पहलुओं पर चर्चा की गई। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि निर्माण शुरू होने से पहले सभी तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएं।
ऐसे बनेगी बिजली
प्लांट में सोलर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल सूर्य के प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में बदलेंगे। इसके बाद इन्वर्टर बिजली को ग्रिड के अनुरूप परिवर्तित करेगा। ट्रांसफार्मर से वोल्टेज आवश्यक स्तर पर लाया जाएगा और फिर ग्रिड कनेक्शन के माध्यम से बिजली विद्युत नेटवर्क तक पहुंचेगी। सिंचाई और वन विभाग को परियोजना से संबंधित जरूरी एनओसी जारी करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया है। दोनों विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इससे प्रतिवर्ष करीब 22 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
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परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए नगर निगम आयुक्त सलोनी शर्मा ने वीरवार को निगम कार्यालय में नगर निगम, सिंचाई विभाग और वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें स्थल की निशानदेही, तकनीकी डिजाइन, विभागीय अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), सोलर पैनलों की स्थापना, सुरक्षा और भविष्य में रखरखाव जैसे पहलुओं पर चर्चा की गई। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि निर्माण शुरू होने से पहले सभी तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएं।
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ऐसे बनेगी बिजली
प्लांट में सोलर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल सूर्य के प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में बदलेंगे। इसके बाद इन्वर्टर बिजली को ग्रिड के अनुरूप परिवर्तित करेगा। ट्रांसफार्मर से वोल्टेज आवश्यक स्तर पर लाया जाएगा और फिर ग्रिड कनेक्शन के माध्यम से बिजली विद्युत नेटवर्क तक पहुंचेगी। सिंचाई और वन विभाग को परियोजना से संबंधित जरूरी एनओसी जारी करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया है। दोनों विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इससे प्रतिवर्ष करीब 22 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
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