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Karnal News: 17 लाख का कर्ज और अधूरे सपने छोड़ ताबूत में लौटा कंवलजीत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:51 PM IST
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Kanwaljit returned in a coffin, leaving behind a debt of 17 lakh and unfulfilled dreams.
ताबूत में आया कंवलजीत सिंह का शव।
इंद्री। जिस बेटे को परिवार ने बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश भेजा था, वह करीब तीन महीने बाद ताबूत में घर लौटा। बेटे की कमाई से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने और कर्ज उतरने के सपने देख रहे माता-पिता के सामने अब उसकी मौत का असहनीय दुख है। इंग्लैंड के साउथहॉल में संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाले धमनहेड़ी निवासी 20 वर्षीय कंवलजीत सिंह का शव 13 दिन बाद भारत पहुंचा। जिस घर में फरवरी में बेटी की शादी की तैयारियां होनी थीं, वहां अब बेटे की मौत का मातम है।
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परिवार ने कंवलजीत को 19 जुलाई 2026 को इंग्लैंड भेजा था। इसके लिए करीब 16 से 17 लाख रुपये खर्च किए गए, जिनमें बड़ी रकम कर्ज के रूप में जुटाई गई थी। पिता सुरेंद्र सिंह लकड़ी का फर्नीचर बनाने का काम करते हैं। परिवार की उम्मीद थी कि कंवलजीत विदेश में मेहनत करेगा और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ कर्ज चुकाने में मदद करेगा। लेकिन विदेश जाने के कुछ ही महीनों बाद उसकी मौत की खबर ने परिवार की उम्मीदें तोड़ दीं।
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ताऊ जोगिंदर सिंह के अनुसार, इंग्लैंड पहुंचने के बाद कंवलजीत को भाषा की परेशानी का सामना करना पड़ा। वहां अंग्रेजी में बातचीत होने के कारण उसे काम और रोजमर्रा के जीवन में दिक्कत होती थी। बाद में वहां रह रहे एक रिश्तेदार की मदद से उसे कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम मिल गया। इसके बावजूद वह विदेश में खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था।
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मां से कहा था, मन नहीं लग रहा
परिवार के मुताबिक, 17 अक्तूबर को काम से लौटने के बाद कंवलजीत ने मां से फोन पर बात की थी। उसने कहा था कि वहां उसका मन नहीं लग रहा। मां ने उसे वापस बुलाने के लिए टिकट कराने की बात कही थी। कंवलजीत ने कुछ देर बाद बात करने की बात कहकर फोन काट दिया। उसी रात परिवार को उसकी मौत की सूचना मिली। परिजनों के अनुसार, कमरे में उसे फंदे पर लटका पाया गया था। हालांकि, उसकी मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इंग्लैंड की पुलिस मामले की जांच कर रही है।

परिवार में सबसे छोटा बेटा था
कंवलजीत दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था। उसने वर्ष 2024 में इंद्री के शहीद उधम सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की थी। उसका बड़ा भाई अर्शदीप भी बेहतर भविष्य की उम्मीद में वर्ष 2023 में स्पेन गया था, लेकिन भाषा की परेशानी और बीमारी के कारण जून 2026 में भारत लौट आया था। परिवार ने छोटे बेटे को विदेश भेजकर उम्मीद की थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन अब उसी बेटे को खोने का गम है।

ताबूत में आया कंवलजीत सिंह का शव।

ताबूत में आया कंवलजीत सिंह का शव।

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