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Karnal News: मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित होगी पहाड़ों की बर्फबारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Mar 2025 02:39 AM IST
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Snowfall in the mountains will prove to be a boon for the wheat crop in the plains
- 26 से पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से नियंत्रित होगा तापमान, गेहूं की फसल के लिए आगामी सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण
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देव शर्मा
करनाल। आगामी 10 दिन गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन्हीं दिनों में जब गेहूं की फसल खेतों से कटकर मंडियों और घरों तक पहुंचेगी। ऐसे में यदि लू चलती है तो गेहूं की फसल को भारी नुकसान हो सकता है, जिसके लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
वहीं, एक राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित बैठक में भारतीय मौसम विभाग ने हरियाणा, पंजाब और उत्तरप्रदेश सहित मैदानी इलाकों के किसानों को राहतभरी खबर दी है। इस सप्ताह हिमाचल और जम्मू कश्मीर आदि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है, जो मैदानी क्षेत्रों में लहलहाती गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित होगी। लू चलने की संभावना नहीं है। इससे औसत तापमान गेहूं के लिए अनुकूल रहेगा, जिसमें गेहूं का दाना परिपक्व होगा।
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गेहूं की फसल खेतों में तैयार है। समय से बिजाई वाली गेहूं की फसल में गेहूं का दाना बन चुका है, अब आगामी एक सप्ताह के दौरान गेहूं का दाना सख्त यानी परिपक्व होगा। खासतौर पर इस सप्ताह यदि लू चलती है तो गेहूं की फसल को भारी नुकसान हो सकता है, क्योंकि दाना परिपक्व होने से पहले ही सूख सकता है, जिससे गेहूं का दाना कमजोर और हल्का रह सकता है, जिसका असर पैदावार पर सीधे तौर पर पड़ सकता है, लेकिन तापमान बढ़ने का गेहूं की फसल को फायदा होगा। इससे दाने में भराव ठीक होगा।
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भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि औसत तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहेगा तो गेहूं की परिपक्वता व पैदावार के लिए उत्तम रहेगा। अभी तक मौसम गेहूं के अनुकूल रहा है। देशभर में इस बार गेहूं में कोई बीमारी आने की भी सूचना नहीं मिली है। इसलिए इस बार देश में बंपर पैदावार के आसार हैं।
डॉ. तिवारी ने बताया कि जहां अभी फसल हरी है, अति विलंबित बिजाई की गई है, वहां तापमान बढ़ता है तो वहां हल्की एक सिंचाई की जा सकती है, वह भी शाम के समय लेकिन जहां फसल हरी नहीं है, उस गेहूं में सिंचाई की आवश्यकता नहीं है। तापमान के बढ़ने से किसानों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, इससे गेहूं के दाने में भराव बेहतर होगा। तय निर्धारित औसत तापमान से अधिक होने की संभावना नहीं है।

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के निदेशक डॉ. रतन तिवारी बताते हैं कि गेहूं की फसल 145 से 155 दिन में परिपक्व होती है, आगामी एक सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण हैं। मध्य भारत व प्रायद्वीप क्षेत्र में गेहूं की 16 प्रतिशत कटाई हो चुकी है, लेकिन हरियाणा-पंजाब आदि मैदानी क्षेत्रों में अभी गेहूं परिपक्व हो रहा है। सोमवार को राष्ट्रीय स्तर पर हुई एक ऑनलाइन बैठक में भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने हरियाणा, पंजाब सहित मैदानी क्षेत्रों के लिए राहत की खबर दी है। आईएमडी का अनुमान है कि 25 से 29 मार्च तक मैदानी क्षेत्र में लू चलने की संभावना नहीं है। 26 मार्च के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश आदि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है, जिसके प्रभाव से मैदानी क्षेत्रों में तापमान नियंत्रित रहेगा। तब तक गेहूं का दाना परिपक्व हो जाएगा, जो गेहूं की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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