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Karnal News: सिर्फ स्लोगन से नहीं बनेगी बात, किसानों को बतानी होगी जैविक विधियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Jan 2023 09:00 AM IST
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Slogan alone will not work, farmers will have to be told about organic methods
बात सिर्फ प्राकृतिक करें, जैविक खेती करें, रसायनों का प्रयोग न करें आदि स्लोगनों या नारों से नहीं बनेगी। किसानों को प्राकृतिक और संरक्षित खेती के साथ कीटनाशी और पौध संरक्षण की विधियां देनी होंगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद के प्रशिक्षकों ने सीएसएसआरआई में चल रहे प्रशिक्षण में हरियाणा के कृषि अधिकारियों को एकीकृत नाशीजीव की पद्धतियां बताई और उनसे इन ये पद्धतियां को किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
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आईपीएम अभिरुचि प्रशिक्षण के तहत वीरवार को सहायक वनस्पति अधिकारी चंद्रशेखर शर्मा, अनीषा बानों और दीपिका चक्रवाल ने कृमि और खरपतवार की पहचान करने और उनके प्रबंधन की जानकारी दी। सहायक निदेशक डॉ.नर्सी रेड्डी ने जैविक दवाओं के बारे में जानकारी दी। ग्रासहापर, टिड्डी की पहचान के साथ साथ अंतर और पहचान के बारे में जानकारी दी। साथ ही प्रशिक्षकों ने बताया कि जैविक दवाइयां, बीज उपचार और यांत्रिक विधि को किसानों तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है। यांत्रिक विधि में विभिन्न तरीके के प्रपंच (जाल) होते हैं। जिसमें लाइट ट्रैप, जिसमें कुछ वस्तुएं (औषधि) जलाकर ऐसे कीड़ो को एक स्थान पर आमंत्रित किया जाता है। दूसरा सेक्सफेरोमोन ट्रैप का प्रयोग। अक्सर ऐसे कीड़े मादा की गंध पहचान कर नर कीट आकर्षित होते हैं, मादा के पास चले जाते हैं और प्रजनन करते हैं। इस ट्रैप में 12 से 15 फेरोमोन जो एक सिंथेटिक कैप्सूल होता है को खेत में रखकर उस गंध को बाधित करते हैं। नर कीट इस दवा के पास आ जाता है और कन्फ्यूज हो जाता है। तब तक अंडे की प्रजनन क्षमता समाप्त हो जाती है। प्रजनन की प्रक्रिया बाधित हो जाती है। जिससे कीड़े धीरे धीरे खत्म हो जाते है, बढ़वार रुक जाती है। इसके साथ साथ एटमो पेथोजनिक नेमाटोड (ईपीएन) की भी जानकारी दी, ये एक तरह की फफूंद है, जिससे दीपक, सफेट लट व अन्य कीटों पर नियंत्रण किया जा सकता है। किसी भी रासायनिक खाद या दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। उचित मात्रा में रसायनों का प्रयोग सिर्फ अंतिम विकल्प के रूप में ही होना चाहिए। क्षेत्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के उपनिदेशक डॉ.वीडी निगम ने कहा कि किसानों को कीट, रोग आदि की पहचान होना आवश्यक है, ताकि वह अपनी मर्जी से किसी भी रसायन का प्रयोग करने से बचें। प्राकृतिक और संरक्षित खेती के प्रदर्शन के जरिये किसानों को जागरूक किया जाना आवश्यक है।
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इसमें सीएसएसआरआई के प्रधान वैज्ञानिक (फसल सुधार) डॉ.अरविंद कुमार भी मौजूद रहे।
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