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छह सौ मजदूरों ने रातभर जुटकर उपनहर की पटरी को बचाया
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पश्चिमी यमुना नहर की उप नहर की पटरी बचाने के प्रयास करते श्रमिक।
माई सिटी रिपोर्टर
घरौंडा। 600 श्रमिकों सहित सिंचाई विभाग का विभागीय अमला रातभर जूझता रहा। हथिनी कुंड बैराज से सुबह तक 4000 क्यूसेक पानी कम करा दिया गया। वहीं पश्चिमी यमुना नहर की उपनहर की पटरियों को बचाने में कामयाबी मिल गई है। जिससे आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांसें ली हैं। नहर में पानी का बहाव और कम कराने के बाद ही मुख्य नहर की पटरी का पुनरनिर्माण किया जा सकेगा।
बृहस्पतिवार दोपहर बाद अचानक घोघड़ीपुर गांव के समीप पश्चिमी यमुना नहर की करीब डेढ़ फुट की पटरी देखते ही देखते पानी में बह गई थी। हालांकि जिस तरफ पटरी टूटी, उस तरफ इसी की उपनहर बह रही थी। इस कारण पटरी टूटने से निकला पानी उपनहर में समा गया, लेकिन पानी का दबाव अधिक बढ़ने के कारण उपनहर की पटरी दरकने लगी थी, जिससे ग्रामीण घबरा गए थे।
सिंचाई विभाग के अफसरों के भी हाथपांव फूल गए थे। राहत कार्य शुरू कराया गया जो पूरी रात जारी रहा। शुक्रवार को भी यहां 600 श्रमिक जुटे थे। पांच जेसीबी, छह ट्रैक्टर व कई ग्रामीण भी जुटे रहे। इंजीनियरों के निर्देशन में उपनहर की पटरी को बचाने का कार्य युद्धस्तर पर किया गया। सिंचाई विभाग के एसडीओ ने बताया कि अब कोई खतरा नहीं है। हथिनी कुंड बैराज से दोपहर तक 4000 क्यूसेक पानी कम करा दिया है, अब सिर्फ 3000 क्यूसेक पानी बह रहा है, इसे और कम कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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घरौंडा। 600 श्रमिकों सहित सिंचाई विभाग का विभागीय अमला रातभर जूझता रहा। हथिनी कुंड बैराज से सुबह तक 4000 क्यूसेक पानी कम करा दिया गया। वहीं पश्चिमी यमुना नहर की उपनहर की पटरियों को बचाने में कामयाबी मिल गई है। जिससे आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांसें ली हैं। नहर में पानी का बहाव और कम कराने के बाद ही मुख्य नहर की पटरी का पुनरनिर्माण किया जा सकेगा।
बृहस्पतिवार दोपहर बाद अचानक घोघड़ीपुर गांव के समीप पश्चिमी यमुना नहर की करीब डेढ़ फुट की पटरी देखते ही देखते पानी में बह गई थी। हालांकि जिस तरफ पटरी टूटी, उस तरफ इसी की उपनहर बह रही थी। इस कारण पटरी टूटने से निकला पानी उपनहर में समा गया, लेकिन पानी का दबाव अधिक बढ़ने के कारण उपनहर की पटरी दरकने लगी थी, जिससे ग्रामीण घबरा गए थे।
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सिंचाई विभाग के अफसरों के भी हाथपांव फूल गए थे। राहत कार्य शुरू कराया गया जो पूरी रात जारी रहा। शुक्रवार को भी यहां 600 श्रमिक जुटे थे। पांच जेसीबी, छह ट्रैक्टर व कई ग्रामीण भी जुटे रहे। इंजीनियरों के निर्देशन में उपनहर की पटरी को बचाने का कार्य युद्धस्तर पर किया गया। सिंचाई विभाग के एसडीओ ने बताया कि अब कोई खतरा नहीं है। हथिनी कुंड बैराज से दोपहर तक 4000 क्यूसेक पानी कम करा दिया है, अब सिर्फ 3000 क्यूसेक पानी बह रहा है, इसे और कम कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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