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Karnal News: नोटा से भी हारे मेयर समेत पार्षद के छह उम्मीदवार, तीन जमानत नहीं बचा पाए

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Mar 2025 02:14 AM IST
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Six councillor candidates including the mayor lost to NOTA, three could not save their deposits
करनाल। नगर निगम चुनाव में मेयर से लेकर पार्षद पद के छह दावेदार नोटा से भी हार गए। इनमें से तीन उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिनकी जमानत भी जब्त हो गई। इनमें दो मेयर पद के और एक पार्षद पद का उम्मीदवार शामिल है। खास बात ये है कि सभी आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे थे। पार्षद पद के उम्मीदवारों की बात करें तो निगम चुनाव में नगर निगम के 18 वार्डों से उतरे 70 उम्मीदवारों में से पांच प्रत्याशी नोटा से हारे हैं। इनमें वार्ड पांच, सात से दो-दो उम्मीदवार और एक उम्मीदवार वार्ड 19 से है। हालांकि सभी उम्मीदवार आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनावी रण में उतरे थे, लेकिन लोगों ने उनको समर्थन नहीं दिया। उनसे ज्यादा वोट नोटा को मिले।
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नगर निगम चुनाव में कुल पोल हुए 147210 वैध मतों में से नोटा को 2684 वोट मिले। मेयर पद की दावेदारी में आए प्रत्याशियों की लिस्ट में शामिल नोटा पर 1521 मतदाताओं ने वोट की जबकि 18 वार्डों में पार्षद पद के चुनाव में नोटा को 1163 वोट मिले। मेयर चुनाव के चार प्रत्याशियों में से यश गोयल नोटा से भी हार गया। उनको महज 1461 वोट मिले। वे नोटा से तो हारे ही साथ में उनकी जमानत भी जब्त हो गई। वहीं, मेयर पद के दूसरे आजाद प्रत्याशी मुकेश रघुवंशी को 2327 वोट मिले। ये नोटा से तो नहीं हारे लेकिन इनकी जमानत जरूर जब्त हो गई।
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नगर निगम के वार्ड पांच में नोटा को 43 वोट मिले जबकि आजाद प्रत्याशी अमित को 32 और सचिन पांचाल को 38 वोट मिले। इसलिए ये दोनों प्रत्याशी नोटा से भी हार गए। दूसरी ओर वार्ड सात में नोटा को 75 वोट मिले। जबकि आजाद उम्मीदवार चरण सिंह को 51 और मनोज को 30 वोट मिले। यहां नोटा ने दोनों को हरा दिया।
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इनके अलावा वार्ड 19 से आजाद की जमानत भी जब्त हो गई और नोटा से भी हार मिली। वार्ड 19 से नोटा को 173 वोट मिले जबकि सेवा सिंह को 138 वोट मिले। वे नोटा से हार गए। इस वार्ड में 8198 वोट पोल हुए। यहां जमानत बचाने के लिए 1366 वोट चाहिए थे। जबकि आजाद उम्मीदवार सेवा सिंह को 138 वोट मिले। जिसकी वजह से उनकी जमानत भी जब्त हो गई।

अंग्रेजी के शब्द नोटा का मतलब है कि इन प्रत्याशियों में से कोई नहीं। अगर किसी मतदाता को अपने उम्मीदवारों में से कोई उम्मीदवार पसंद नहीं है तो उनके पास नोटा का विकल्प होता है। जिससे वे ये साबित करते हैं कि ये प्रत्याशी मत प्राप्त करने वाले नोटा के माध्यम से ये कहना चाह रहे हैं कि वे इतने मतदाताओं की पसंद अनुसार नहीं हैं।
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