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Karnal News: निगम के किराएदार बन सकते हैं दुकान मालिक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jul 2024 07:20 AM IST
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Shop owners can become tenants of the corporation
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। मुख्यमंत्री शहरी स्थानीय निकाय स्वामित्व योजना के तहत नगर निगम के किराएदार दुकान के मालिक बन सकते हैं। इसके लिए हरियाणा सरकार की ओर से सेल ऑफ शॉप पोर्टल को दोबारा खोला गया है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 जुलाई है।

नगर निगम के संयुक्त आयुक्त जसपाल सिंह गिल ने बताया योजना के तहत 20 वर्ष या इससे अधिक समय से किराए पर चली आ रही दुकानों या बूथों की स्थाई अलॉटमेंट के लिए आवेदन करने के लिए पोर्टल को खोला गया है। सेल ऑफ शॉप पोर्टल पर नगर निगम की 556 दुकाने पंजीकृत हैं, इनमें से 291 दुकानों के किराएदारों ने मालिकाना हक लेने के लिए आवेदन किया था।
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इनमें से 165 दुकानें शामलात कस्बा भूमि पर है, जिन पर सिविल कोर्ट ने स्टे लगाया हुआ है। उन्होंने बताया कि 65 दुकानें अन्य विभागों की भूमि पर बनी हुई हैं, ऐसे केस संबंधिथ विभाग को आगामी कार्यवाही के लिए भेजे गए हैं। इसके अतिरिक्त 43 दुकानों की रजिस्टरी करवाई जा चुकी है।
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दस्तावेजों की कमी के कारण 19 केस रद्द किए गए हैं तथा दो केस प्रक्रियाधीन हैं। जिन दुकानों की रजिस्ट्री करवाई गई है, उनमें कर्ण पार्क स्थित बाइक मार्किट, पुरानी सब्जी मंडी, अर्जुन गेट व जुंडला गेट क्षेत्र वनगर सुधार मंडल की दुकानें शामिल हैं। ऐसे दुकानदार जो 31 दिसंबर 2020 तक 20 साल की अवधि पूरी कर चुके हैं, वह इस पॉलिसी का लाभ लेने के पात्र हैं।
आवेदक या दुकानदार द्वारा कन्वेंस डीड की एनओसी के लिए, नियमानुसार दुकान की भूमि से संबंधित विकास शुल्क, जल सीवरेज उपयोग शुल्क तथा ठोस अवशेष शुल्क को ऑनलाइन नगर निगम कार्यालय में जमा करवाना होगा। डिमांड नोटिस प्राप्त होने के उपरांत कुल राशि का 25 प्रतिशत भुगतान 15 दिनो के अंदर-अंदर जमा करवाने के बाद शेष राशि का पूर्ण भुगतान 3 माह के अंदर-अंदर करना होता है। इसके अलावा कन्वेंस डीड पर आने वाले रजिस्ट्रेशन व स्टैम्प ड्यूटी तथा अन्य खर्चे भी आवेदक द्वारा वहन किए जाएंगे।


तो दुकानदारों को पड़ेगा महंगा

जिन दुकानदारों ने अब तक आवेदन करने में रूचि नहीं दिखाई है, उन्हें भविष्य में किराए को लेकर दुकान महंगी पड़ सकती है। ऐसी दुकानों का मौका-मुआयना होगा तथा पॉलिसी के तहत उनके किराए का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा। पॉलिसी में फार्मूले के अनुसार जिस लोकेशन में दुकान स्थित है, वहां कलेक्टर रेट से एक साल का जितना किराया बनेगा, उसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की फिक्सड डिपोजिट पर वार्षिक ब्याज दर की तर्ज पर अतिरिक्त प्रभार जुड़ जाएगा। इस प्रकार एक वर्ष की जितनी कुल राशि बनेगी, वह दुकानदार को चुकानी होगी।

किराएदार दुकानदारों को इस मौके का लाभ उठाया चाहिए। इस अवधि के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा, इसके पश्चात आवेदन नहीं किया जा सकता। - जसपाल सिंह गिल, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम
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