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04. दिल्ली जाने वाले यात्रियों की उम्मीदों केे झटका

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 02:36 AM IST
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Shock to the hopes of passengers going to Delhi
202: नये बस स्टैन्ड पर मौजुद यात्री। अमर उजाला
करनाल। कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद सिंघू बॉर्डर से रास्ता खुलने की यात्रियों की उम्मीद को उस समय झटका लगा, जब शनिवार को किसानों ने आंदोलन कायम रखने का निर्णय लिया। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया जा सकता है। किंतु ऐसा नहीं हुआ। फिलहाल करनाल से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को बहालगढ़ से लोनी बॉर्डर होते हुए अंतरराज्यीय बस अड्डा नई दिल्ली पहुंचना होगा। दूसरी ओर किसानों का संकेत है कि यदि सरकार उनकी सभी मांगें मान लेती है तो आंदोलन खत्म कर दिया जाएगा।
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25 नवंबर 2020 को करनाल से जब किसानों के काफिले दिल्ली की सीमाओं की ओर जा रहे तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पर असर पड़ने लगा था। 26 नवंबर के बाद से करनाल से आईएसबीटी दिल्ली जाने वाले यात्रियों की समस्या बढ़ गई थी जो आज तक बरकरार है। इस बीच बस चालकों ने वाया नरेला व सोनीपत क्षेत्र से वैकल्पिक मार्गोँ से बसें निकाली लेकिन अब बहालगढ़ से लोनी बार्डर से होते हुए बसें अतिरिक्त फेरा लगाकर चल रही हैं। जिस कारण यात्रियों का करीब 20 किलोमीटर सफर बढ़ा हुआ है।
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कोरोना काल से पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित नए बस अड्डे पर 600 से 700 तक बसें रुकती थी। कोरोना काल में जैसे ही परिवहन को संचालित किया गया तो यात्रियों की संख्या कम थी। धीरे-धीरे स्थिति में सुधार हुआ किंतु अभी भी कोरोना काल से पूर्व की तुलना में दिल्ली के लिए मिलने वाली बसों की संख्या सुबह से दोपहर तक दो तिहाई कम है। इस वजह से यात्री परेशान हैं और वे दिल्ली जाने-आने के लिए ट्रेन पकड़ते हैं। सुबह मिलने वाली पैसेंजर गाड़ी में अत्यधिक भीड़ होने की यही प्रमुख वजह है।
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वर्जन
यात्रियों की संख्या के लिहाज से बसों की संख्या पर्याप्त है। अब रोजाना करीब 500 बसें नए बस अड्डे पर रुकती हैं। सिंघू बॉर्डर से किसान यदि उठेंगे तो दिल्ली के लिए आवागमन सही होगा। अभी बहालग़ से लोनी बॉर्डर होते हुए बसें 20 से 25 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाकर जा रही हैं। इस कारण डीजल की खपत भी अधिक होती है।
- निशान सिंह, प्रभारी, नया बस अड्डा, करनाल।
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