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11 वर्षीय शौर्य छाबड़ा ने शूटिंग में जीता सिल्वर
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करनाल: शुटर शौर्य। 63
उम्र छोटी कारनामे बढ़े, शौर्य छाबड़ा के चाहने वाले बढ़े... कुछ इन्हीं पंक्तियों से पहचान हो रही है ओपीएस विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल के 11 वर्षीय शौर्य छाबड़ा की। छोटी से उम्र में शौर्य छाबड़ा ने शूटिंग के माध्यम से स्कूल में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अभी हाल में ही 19-20 जुलाई को संपन्न दो दिवसीय शूटिंग प्रतियोगिता में शौर्य छाबड़ा ने सिल्वर मेडल जीता है। प्रतियोगिता का आयोजन दिल्ली पब्लिक स्कूल उदयपुर राजस्थान में 19 और 20 जुलाई को किया गया, जिसमें करनाल के ओपीएस विद्या मंदिर स्कूल के शौर्य छाबड़ा ने शूटिंग एकल प्रतियोगिता में 400 में से 365 को स्कोर कर चांदी पर कब्जा किया। वहीं, दूसरी ओर टीम इंवेट जिसमें तीन शूटर भाग लेते हैं में भी सिल्वर पर अपना हक जमाया।
शौर्य छाबड़ा ओपीएस विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल में 6 क्लास में पढ़ाई करता है। पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ वह खेलकूद में भी काफी तेज है। शूटिंग कोच रश्मि ने बताया कि शौर्य पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ शूटिंग में भी काफी अच्छा है। शूटिंग की ट्रेनिंग लेते हुए उन्हें अभी करीब एक साल ही हुआ है। उन्होंने बताया कि यह ऐसा पहला खिलाड़ी है जिसने 6 महीने में ही अहमदाबाद में आयोजित नेशनल स्तर की शूटिंग प्रतियोगिता में क्वालीफाई किया था।
बनना चाहते थे क्रिकेटर बन गए शूटर
शौर्य छाबड़ा बताते हैं कि वह क्रिकेटर बनना चाहते थे और करीब दो सालोें तक उन्होंने क्रिकेट खेला भी। लेकिन एक दिन उनके पिता रमन कुमार ने कहा कि बेटा आप को शूटिंग में हिस्सा लेना चाहिए। उन्होंने अपने पिता की बात मानी और वह शूटिंग सीखने लगे। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य इंटरनेशनल शूटर और डॉक्टर बनना है और इसके लिए वह कड़ी मेहनत भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता बिजनेशमैन हैं और माता दिल्ली पब्लिक स्कूल में टीचर हैं। उनके माता-पिता हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाते हुए उन्हें कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं।
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पढ़ाई के साथ-साथ हर रोज 4 घंटे लेते हैं शूटिंग का प्रशिक्षण
शूटिंग कोच रश्मि ने बताया कि शौर्य छाबड़ा पढ़ाई के बाद हर रोज 4 घंटे तक शूटिंग का प्रशिक्षण लेते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास करीब 20 बच्चे शूटिंग की कोचिंग लेते हैं, जिनमें 5 लड़कियां भी शामिल हैं। वैसे तो सभी बच्चे अच्छा खेते हैं लेकिन उम्र के हिसाब से शौर्य की कैचिंग पावर बहुत अच्छी है। शौर्य की जीत से कोच व उनके परिजन काफी खुश हैं।
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शौर्य छाबड़ा ओपीएस विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल में 6 क्लास में पढ़ाई करता है। पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ वह खेलकूद में भी काफी तेज है। शूटिंग कोच रश्मि ने बताया कि शौर्य पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ शूटिंग में भी काफी अच्छा है। शूटिंग की ट्रेनिंग लेते हुए उन्हें अभी करीब एक साल ही हुआ है। उन्होंने बताया कि यह ऐसा पहला खिलाड़ी है जिसने 6 महीने में ही अहमदाबाद में आयोजित नेशनल स्तर की शूटिंग प्रतियोगिता में क्वालीफाई किया था।
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बनना चाहते थे क्रिकेटर बन गए शूटर
शौर्य छाबड़ा बताते हैं कि वह क्रिकेटर बनना चाहते थे और करीब दो सालोें तक उन्होंने क्रिकेट खेला भी। लेकिन एक दिन उनके पिता रमन कुमार ने कहा कि बेटा आप को शूटिंग में हिस्सा लेना चाहिए। उन्होंने अपने पिता की बात मानी और वह शूटिंग सीखने लगे। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य इंटरनेशनल शूटर और डॉक्टर बनना है और इसके लिए वह कड़ी मेहनत भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता बिजनेशमैन हैं और माता दिल्ली पब्लिक स्कूल में टीचर हैं। उनके माता-पिता हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाते हुए उन्हें कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं।
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पढ़ाई के साथ-साथ हर रोज 4 घंटे लेते हैं शूटिंग का प्रशिक्षण
शूटिंग कोच रश्मि ने बताया कि शौर्य छाबड़ा पढ़ाई के बाद हर रोज 4 घंटे तक शूटिंग का प्रशिक्षण लेते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास करीब 20 बच्चे शूटिंग की कोचिंग लेते हैं, जिनमें 5 लड़कियां भी शामिल हैं। वैसे तो सभी बच्चे अच्छा खेते हैं लेकिन उम्र के हिसाब से शौर्य की कैचिंग पावर बहुत अच्छी है। शौर्य की जीत से कोच व उनके परिजन काफी खुश हैं।