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गन्ना प्रजातियों को अगेती बनाने वाले जीन की कर रहे खोज
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गन्ना प्रजनन केंद्र करनाल में अगेती प्रजाति के लिए जीन चिह्नित करने का कार्य चल रहा है। अनुसंधान प्रक्रिया के तहत केंद्र में वैज्ञानिक आरटीपीसीआर मशीन के माध्यम से जीन के व्यवहार की जांच कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार अगेती प्रजाति से न सिर्फ गन्ने की किस्मों में सुधार होगा, बल्कि किसानों को कम समय और कम परिश्रम में अधिक लाभ मिलेगा।
केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके पांडे ने बताया कि कम अवधि वाली फसल प्रजातियां विकसित करने की दिशा में अनुसंधान किए जा रहे हैं। गन्ने की अगेती किस्मों पर काम करने के लिए विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय) की ओर से गन्ना प्रजनन केंद्र करनाल को जून 2019 में प्रोजेक्ट दिया गया है। इसके तहत गन्ने की अगेती प्रजातियों के उन जीन की पहचान की जाएगी जो उसके अगेती होने के लिए उत्तरदायी हैं। उन जीन का इस्तेमाल दूसरी किस्मों में सुधार के लिए किया जा सकेगा। निसंदेह यह नई गन्ना प्रजातियां ईजाद करने में क्रांतिकारी कदम साबित होगा, जिसका फायदा लाखों किसानों व चीनी उद्योग को होगा।
उन्होंने बताया कि इंसानों व वनस्पति में डीएनए से प्रोसेस होकर आरएनए बनता है और आरएनए से प्रोटीन बनता है। आरएनए जीन के व्यवहार को रेगुलेट करता है। आरएनए के आधार पर गन्ना प्रजनन केंद्र में गन्ने की अगेती व पछेती प्रजातियों के गुणों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है। इससे पता चलेगा कि किसी किस्म को अगेती बनने के लिए कौन से जीन जिम्मेदार हैं। अगेती किस्म से उनका आणुवाणिक विश्लेषण करके भविष्य में गन्ना किस्में सुधारने में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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अनुसंधानकर्ता एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एमआर मीना ने बताया कि फसलों में आरएनए (रीबोन्यूक्लिक एसिड) अनुक्रमण विधि से अगेती किस्मों के उत्तरदायी जीन को खोज रहे हैं। इस विधि से खोजे गए आणुवाणिक मार्कर को फिर से अगेती किस्मों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक से गन्ना प्रजनन क्षेत्र में जीन चयन की प्रक्रिया में सुधार आएगा। उन्होंने बताया कि गन्ने की एक प्रजाति को विकसित करने में करीब 12 वर्ष लगते हैं और उसके बाद उसके विस्तार में चार-पांच वर्ष लग जाते हैं। नई खोज के बाद दो से तीन वर्ष का समय लगेगा। संवाद
अब तक विकसित अगेती किस्में
अब तक प्रजनन केंद्र से गन्ने की अगेती किस्में सीओ-0238, सीओ-237, सीओ-98014, सीओ-15023, सीओ-5009, सीओ-118 व सीओसीओ-89003 विकसित की गई हैं। अगेती किस्में आठ से दस महीने में परिपक्व हो जाती हैं। सामान्य किस्में 11 से 12 महीने तक समय लेती हैं।
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केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके पांडे ने बताया कि कम अवधि वाली फसल प्रजातियां विकसित करने की दिशा में अनुसंधान किए जा रहे हैं। गन्ने की अगेती किस्मों पर काम करने के लिए विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय) की ओर से गन्ना प्रजनन केंद्र करनाल को जून 2019 में प्रोजेक्ट दिया गया है। इसके तहत गन्ने की अगेती प्रजातियों के उन जीन की पहचान की जाएगी जो उसके अगेती होने के लिए उत्तरदायी हैं। उन जीन का इस्तेमाल दूसरी किस्मों में सुधार के लिए किया जा सकेगा। निसंदेह यह नई गन्ना प्रजातियां ईजाद करने में क्रांतिकारी कदम साबित होगा, जिसका फायदा लाखों किसानों व चीनी उद्योग को होगा।
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उन्होंने बताया कि इंसानों व वनस्पति में डीएनए से प्रोसेस होकर आरएनए बनता है और आरएनए से प्रोटीन बनता है। आरएनए जीन के व्यवहार को रेगुलेट करता है। आरएनए के आधार पर गन्ना प्रजनन केंद्र में गन्ने की अगेती व पछेती प्रजातियों के गुणों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है। इससे पता चलेगा कि किसी किस्म को अगेती बनने के लिए कौन से जीन जिम्मेदार हैं। अगेती किस्म से उनका आणुवाणिक विश्लेषण करके भविष्य में गन्ना किस्में सुधारने में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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अनुसंधानकर्ता एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एमआर मीना ने बताया कि फसलों में आरएनए (रीबोन्यूक्लिक एसिड) अनुक्रमण विधि से अगेती किस्मों के उत्तरदायी जीन को खोज रहे हैं। इस विधि से खोजे गए आणुवाणिक मार्कर को फिर से अगेती किस्मों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक से गन्ना प्रजनन क्षेत्र में जीन चयन की प्रक्रिया में सुधार आएगा। उन्होंने बताया कि गन्ने की एक प्रजाति को विकसित करने में करीब 12 वर्ष लगते हैं और उसके बाद उसके विस्तार में चार-पांच वर्ष लग जाते हैं। नई खोज के बाद दो से तीन वर्ष का समय लगेगा। संवाद
अब तक विकसित अगेती किस्में
अब तक प्रजनन केंद्र से गन्ने की अगेती किस्में सीओ-0238, सीओ-237, सीओ-98014, सीओ-15023, सीओ-5009, सीओ-118 व सीओसीओ-89003 विकसित की गई हैं। अगेती किस्में आठ से दस महीने में परिपक्व हो जाती हैं। सामान्य किस्में 11 से 12 महीने तक समय लेती हैं।