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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अंजनथली के किसानों से सीखा गेहूं उगाना
नीलोखेड़ी
Updated Sat, 14 Dec 2013 11:16 PM IST
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नीलोखेड़ी में कनाडा की इपनी कंपनी व अमेरिका की समिटि कंपनी के कनाडा में स्थित उपाध्यक्ष एडटियन जॉनस्टान व समिटि के भारत स्थित कृषि वैज्ञानिकों ने गांव अंजनथली का दौरा किया और न्यूट्रेट एक्सपर्ट डोज पद्धति से बिजाई की गई गेहूं की फसल का निरीक्षण किया।
इंटरनेशनल प्लांट न्यूरीशयन इंस्टीट्यूट कनाडा के उपाध्यक्ष एडटियन जॉनस्टान ने भारत स्थित दक्षिण एशिया के निदेशक कौशिक मजूमदार कृषि वैज्ञानिक डॉ. एचएस जार, डॉ. रामस्वरूप व अंजनथली किसान सोसाइटी के अध्यक्ष विनोद कुमार भी शामिल थे।
पांच सदस्यों का यह दल अंजनथली के पूर्व सरपंच जिलेसिंह के खेतों में पहुंचा। जिलेसिंह ने खेतों में एक्सपर्ट डोज पद्धति से गेहूं की बिजाई की गई थी। दक्षिण एशिया के निदेशक कौशिक मजूमदार ने बताया कि इस पद्धति से गेहूं की बिजाई के समय 13 किलोग्राम यूरिया व 50 किलोग्राम पोटाश डाला जाता है, जबकि आमतौर पर किसान गेहूं की बिजाई के समय यूरिया व पोटाश डालते ही नहीं।
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बिजाई के बाद गेहूं को पानी लगाते समय किसान एक एकड़ में एक कट्टा यूरिया का डालते हैं, जबकि इस विधि से 35 किलोग्राम यूरिया डाला जाता है। उन्होंने बताया कि इस विधि से खेतों में फास्फोरस की पूर्ति होती है और उपज में भी बढ़ोतरी होती है।
कनाडा के उपाध्यक्ष जॉनस्टान ने बताया कि जमीन व फसल की जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। इस विधि का इस्तेमाल कनाडा व अमेरिका में भी किया जाता है और परिणाम भी बढ़िया जा रहे हैं। विश्व की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि खेतों में प्राचीन पद्धति से बीजी जा रही है।
बढ़ती आबादी को देखते हुए खेतों में नई तकनीक अपनानी होगी ताकि उत्पादन को बढ़ाकर आबादी के हिसाब से उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सके। अनुसंधान संस्थान कंपनी के साथ मिलकर काम कर रहा है। 2009 में इस पद्धति पर गहरा शोध किया गया और 2013 में विकल्प को हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार, ओडिसा, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश व मध्यप्रदेश में आजमाया जाएगा।
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इंटरनेशनल प्लांट न्यूरीशयन इंस्टीट्यूट कनाडा के उपाध्यक्ष एडटियन जॉनस्टान ने भारत स्थित दक्षिण एशिया के निदेशक कौशिक मजूमदार कृषि वैज्ञानिक डॉ. एचएस जार, डॉ. रामस्वरूप व अंजनथली किसान सोसाइटी के अध्यक्ष विनोद कुमार भी शामिल थे।
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पांच सदस्यों का यह दल अंजनथली के पूर्व सरपंच जिलेसिंह के खेतों में पहुंचा। जिलेसिंह ने खेतों में एक्सपर्ट डोज पद्धति से गेहूं की बिजाई की गई थी। दक्षिण एशिया के निदेशक कौशिक मजूमदार ने बताया कि इस पद्धति से गेहूं की बिजाई के समय 13 किलोग्राम यूरिया व 50 किलोग्राम पोटाश डाला जाता है, जबकि आमतौर पर किसान गेहूं की बिजाई के समय यूरिया व पोटाश डालते ही नहीं।
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बिजाई के बाद गेहूं को पानी लगाते समय किसान एक एकड़ में एक कट्टा यूरिया का डालते हैं, जबकि इस विधि से 35 किलोग्राम यूरिया डाला जाता है। उन्होंने बताया कि इस विधि से खेतों में फास्फोरस की पूर्ति होती है और उपज में भी बढ़ोतरी होती है।
कनाडा के उपाध्यक्ष जॉनस्टान ने बताया कि जमीन व फसल की जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। इस विधि का इस्तेमाल कनाडा व अमेरिका में भी किया जाता है और परिणाम भी बढ़िया जा रहे हैं। विश्व की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि खेतों में प्राचीन पद्धति से बीजी जा रही है।
बढ़ती आबादी को देखते हुए खेतों में नई तकनीक अपनानी होगी ताकि उत्पादन को बढ़ाकर आबादी के हिसाब से उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सके। अनुसंधान संस्थान कंपनी के साथ मिलकर काम कर रहा है। 2009 में इस पद्धति पर गहरा शोध किया गया और 2013 में विकल्प को हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार, ओडिसा, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश व मध्यप्रदेश में आजमाया जाएगा।