फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Scientists decide the roadmap for 2047 amid increasing population and decreasing land holdings

Karnal News: बढ़ती आबादी-घटती जोत के बीच वैज्ञानिकों ने तय किया 2047 का रोडमैप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Mar 2023 03:00 AM IST
विज्ञापन
Scientists decide the roadmap for 2047 amid increasing population and decreasing land holdings
देव शर्मा
विज्ञापन

करनाल। 2023 को मिलेट्स ईयर (मोटा अनाज वर्ष) घोषित किया गया है, लेकिन ये वर्ष दुग्ध उत्पादन और पशु नस्लों के संरक्षण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। देश के वैज्ञानिकों ने आजादी के शताब्दी वर्ष यानि 2047 तक का रोडमैप तैयार कर लिया है। जिसमें बढ़ती आबादी और घटती जोत भूमि के बीच कई बड़ी चुनौतियों को पार करते हुए कई बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। इसमें वैज्ञानिक सीधे तौर पर मानव जीवन को प्रभावित वाले रोगों के स्रोतों पर मंथन कर रहे हैं।
बीते वर्षों में देखा गया है कि चाहे कोरोना हो या जूनोटिक, ब्रुसेलोसिस, रैबीज, चर्म रोग आदि कई बीमारियां पशु-पक्षियों से इंसानों में आई हैं। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर व्याख्यान देने हुए आईसीएआर के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. बीएन त्रिपाठी ने बताया कि पशु पक्षियों की 70 प्रतिशत बीमारियां, किसी न किसी तरह इंसानों के शरीर तक पहुंच जाती हैं। हमें पशु प्रेम बनाए रखते हुए पशु पक्षियों को सुरक्षित करना होगा। इसके लिए मिट्टी, पानी और वातावरण को स्वस्थ करना होगा। उन्होंने 2047 के रोडमैप पर बातचीत करते हुए कहा कि अभी पशुधन की 187 और पोल्ट्री की 22 पंजीकृत नस्लें हैं।
विज्ञापन

देश में दूध की उपलब्धता 425 ग्राम प्रति व्यक्ति है। जिसे 2047 तक एक किलो प्रति व्यक्ति तक पहुंचने के लक्ष्य की ओर देश कदम बढ़ा रहा है। इसके लिए ताप सहनशील और अधिक दूध देने वाली देशी नस्लों को संरक्षित करने पर काम किया जा रहा है। पशुओं से निकलने वाली ग्रीन हाउस गैसों को कम करने पर एनडीआरआई सहित कई संस्थान काम कर रहे हैं। 1950 में दूध का उत्पादन 17 मिलियन टन था, जो अब 210 मिलिटन टन तक पहुंच चुका है, जो करीब 1200 प्रतिशत की वृद्धि है। देसी नस्लों को संरक्षित करने पर काम किया जा रहा है। जीनोम तकनीक पर बढ़ रहे हैं। जिससे आज हम पहले ही जान लेते हैं, ये सांड़ कैसा होगा। जबकि पिछले सालों में उसके पैदा होने के बाद, उसके व्यवहार को परखने पर ही पता लग पाता था। इसमें काफी समय लग जाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


देश में 20.9 करोड़ से 30.2 करोड़ पहुंची पशुओं की संख्या
डॉ. बीएन त्रिपाठी ने कहा कि पहले देश में 20.9 करोड़ पशु थे लेकिन 30.2 करोड़ हैं। खेती वाली जमीन 120 मिलियन हेक्टेयर थी, जो अब तक 140 मिलियन हेक्टेयर हुई है लेकिन आबादी 34 करोड़ से 140 करोड़ हो गई है। तात्पर्य ये है कि जमीन नहीं बढ़ रही है, लेकिन आबादी कई गुना बढ़ रही है। ऐसे में दुग्ध की उत्पादकता बड़ी चुनौती है लेकिन एनडीआरआई जैसे संस्थानों के प्रयासों से हम काफी बेहतर स्थिति में हैं। यही कारण है कि हम अपना लक्ष्य एक लीटर प्रति व्यक्ति तय कर पाए हैं। अन्य क्षेत्रों में भी काफी बेहतर कार्य हुआ है। जैसे अंडे का उत्पादन देश में सिर्फ पांच बिलियन था, जो अब बढ़कर 122 बिलियन हो गया है।


मनचाही बछिया पैदा करने की तकनीक शीघ्र देश को समर्पित करेगा एनडीआरआई
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि पशुओं में मनचाही बछिया पैदा करने की तकनीक यानि सेक्स सीमेन पर काम तो हुआ है, लेकिन ये तकनीक विदेशों में तैयार हो चुकी है, भारत में भी ये तकनीक बाहर से आई हैं, सीमेन बाहर से लाया जा रहा है, जो काफी महंगा पड़ता है लेकिन एनडीआरआई इस तकनीक पर काम कर रहा है, करीब 70 प्रतिशत तक शोध सफल रहा है। शीघ्र ही इस पूर्ण स्वदेशी तकनीक को एनडीआरआई देश को समर्पित करेगा। इससे कृत्रिम गर्भाधान के जरिये सिर्फ बछिया या बछड़ा ही पैदा होगा, ये सुनिश्चित हो सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed