इस स्कूल में अध्यापक हो रहे बहरे

अमर उजाला, कैथ्ाल Updated Thu, 21 Nov 2013 11:32 PM IST
विज्ञापन
school, noise, student

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
कैथल के अमरगढ़ गामड़ी में स्थित राजकीय उच्च विद्यालय गली नंबर चार में पढ़ना और पढ़ाना दुष्वार हो चला है। स्कूल में समस्याओं के इतने अंबार हैं कि अध्यापक यहां ड्यूटी करते हुए कानों की बीमारियों का शिकार हो गए हैं।
विज्ञापन

बच्चों की तो सुध शायद किसी अधिकारी को है ही नहीं। दसवीं तक 1300 विद्यार्थियों के लिए यह स्कूल केवल 1600 वर्ग जगह में चल रहा है। जहां प्रार्थना करने के लिए भी जगह नहीं है। दो मंजिला भवन में बच्चों को ऊपर चढ़ते-उतरते समय चोट लगने का भय बना रहता है।
32 के बजाय 18 कमरों से काम
यहां स्कूल के विद्यार्थियों के बैठने के लिए मात्र 18 कमरे हैं। जबकि बच्चों की संख्या के हिसाब से कम से कम 32 कमरों की आवश्यकता है। जगह न होने के कारण ड्यूल डेस्क को एक कमरे में भर दिया गया है, ताकि बच्चे बरामदे सहित कमरों में बैठ सकें। बच्चों को मिड-डे मील भी कक्षाओं के अंदर ही उपलब्ध करवाना पड़ता है। जिसके कारण स्कूल में पूरी तरह से अव्यवस्था का आलम है।

स्कूल में बच्चों को रोकने के लिए कुछ सीनियर बच्चों को गेट पर रजिस्ट्रर लेकर बैठाया जाता है। ताकि आने जाने वाले विद्यार्थियों का पहचान हो सके। इस स्कूल में पिछले महीने अभिभावकों, अध्यापकों और जिला शिक्षा अधिकारियों के बीच में स्कूल को शिफ्ट करने के लिए काफी जद्दोजहद हुई थी। एक महीने के मशक्कत के बाद भी अधिकारियों से इसका कोई समाधान नहीं हो पाया। स्कूल के अध्यापक  भी कहते हैं कि वे इस स्कूल में बहरे हो गए हैं। पास की सड़क से शोर अधिक होने कारण सुनने की समस्या हो गई है।

स्कूल के रसोई में आंगनबाड़ी केंद्र
इसके अलावा स्कूल में एक अंदर छोटा-सा रसोई का कमरा है जिसमें आंगनबाड़ी केंद्र खुला है। इस आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 25 विद्यार्थी आते हैं। इसी कमरों में बच्चों के बगल में सिलेंडर से बच्चों के लिए खाने का सामान तैयार किया जाता है। जिस कारण कभी भी हादसा हो सकता है।

आंगनबाड़ी वर्कर रीतु ने बताया कि मजबूरी के कारण उन्होंने बच्चों के पास खाना बनाना पड़ता हैै। उनके पास कोई जगह नहीं है। स्कूल के अध्यापकों ने बताया कि स्कूल की समस्या से जिला प्रशासन व जिला शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी जानते हैं। कई बार स्कूल में समस्या लेकर आए है। लेकिन किसी प्रकार का समाधान नहीं निकला है।

दूसरी मंजिल पर बैठते हैं छोटे बच्चे
नियम के अनुसार स्कूल में प्राथमिक पाठशाला के विद्यार्थियों को दूसरी मंजिल पर नहीं बैठाया जा सकता है लेकिन स्कूल में जगह न होने के कारण मजबूरी में विद्यार्थियों को स्कूल की दूसरी मंजिल पर बैठाना पड़ता है। यहां भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

कई बार दी जानकारी
स्कूल के इंचार्ज ईश्वर दत्त शर्मा ने बताया कि समस्या के बारे में जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारियों कोे सूचित है, लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया है। स्कूल में पिछले महीने दो शिफ्टों व अन्य स्कूल में प्राथमिक स्कूल को शिफ्ट करने का मामला करीब दो महीने तक चलता रहा। जिसमें अभिभावकाें ने भी स्कूल में आकर रोष प्रकट किया। लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us